अनुभवी बनकर वातावरण को शक्ति दो…

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एक है सोचना, एक है अनुभव करना। तो यह अपने से पूछो मुझे आत्मा का अनुभव है? अभी इस बात के अनुभवी बनने का अभ्यासी बनो, बाबा भी कहते इसकी थोड़ी कमी है। अगर अनुभव हो जाये तो वो भूलता नहीं है। बाबा कहते नॉलेजफुल बहुत हैं लेकिन अनुभवीमूर्त नहीं। तो जो भी प्रॉब्लम्स हैं वो कर्म का ही सूक्ष्म रूप हैं, संस्कार का ही परिणाम सामने आता है। इसीलिए बाबा समय प्रति समय हमको आत्म-अभिमानी स्थिति का अनुभव करने के लिए कहता है। ट्रैफिक कंट्रोल करो, माना संकल्पों की ट्रैफिक बंद करके साइलेंस स्वरूप की स्मृति में रहो। साइलेंस स्वरूप तो आत्मा ही है। ऐसे समय व्यर्थ व साधारण संकल्प की तो बात ही नहीं है। अभी बाबा ने 8 बारी ड्रिल की बात कही, वो इसीलिए कहा कि बीच-बीच में बार-बार यह अभ्यास करते रहने से लिंक जुटा रहता है जिससे निरंतर साइलेंस स्वरूप आत्मा का नशा(स्थिति) रहे क्योंकि लिंक टूटा फिर जोड़ा तो इसमें मेहनत भी लगेगी, टाइम भी लगेगा। तो चेक करते रहो और चेंज करते रहो। योग किया या युद्ध किया, यह तो खुद को ही पता पड़ता है। मन के अंदर की गति(स्थिति) क्या है, वो हम ही जानते हैं क्योंकि आत्म-अभिमानी नहीं या मन के ऊपर कंट्रोल नहीं तो हमारा वायदा क्या है? मनजीते जगतजीत कैसे बनेंगे! मायाजीत कै से बनेंगे! तो जितना समय चाहे मन कंट्रोल में रहे, यह प्रैक्टिस बहुत चाहिए। कर्म-कॉन्सेस की जगह सोल-कॉन्सेस की स्थिति हो।
मन को विन करो तो वन नम्बर में आ जायेंगे। मन की मालिक आत्मा है, तो मन के मालिक बनो तब कर्मेन्द्रियाँ ऑर्डर मानेंगी। तो मैं आत्मा मालिक हँू, यह स्मृति पक्की हो जाये, नहीं तो वही पुराने संस्कार प्रकट होते रहेंगे, बार-बार धोखा खाते रहेंगे, परेशान होते रहेंगे। तो मतलब अमृतवेले योग का महत्त्व अनुभव में हो। अमृतवेले से लेकर बाबा मेरे लिए आता है, हमारा टीचर हमारे लिए आता है, बाबा वाणी सुनाने हमारे लिए आता है, खास हमारे को पढ़ा रहा है, ऐसे स्वयं को एक योग्य स्टूडेंट समझ करके बैठो। अभी एक सेकण्ड में मैं आत्मा हँू, उस अनुभूति में रहो…और कुछ नहीं सोचना…।
तो सभी ने अनुभव किया या युद्ध की? इसके लिए रोज़ कोई-न-कोई स्वमान स्मृति में रखो और उसको चेक करो तो अनुभवी मूर्त बनना है। जो हम कहते हैं, उसके अनुभव में रहें। परमात्मा ही हमारा सब कुछ है, यह अनुभव है? तो अनुभवी मूर्त बनेगी तो सब समस्यायें खत्म हो जायेंगी क्योंकि मालिक बन गये, करनकरावनहार बन गये, तो वो वायब्रेशन वायुमण्डल को पॉवरफुल बनाता है। ऐसे शक्तिशाली वायुमण्डल में जो भी स्टूडेंट आयेंगे उन्हें भी मदद मिलेगी फिर आपका सेंटर देखो कितना उन्नति को पाता है। तो खुद अनुभवी बनके वातावरण को अनुभव की शक्ति दो, स्टूडेंट को हिम्मत दिलाओ अनुभव की।

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