आत्मा में पहले से ही मौजूद सतयुगी संस्कार इमर्ज करें…

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जो आत्माएं सतयुग में थीं, कलियुग तक पहुंचते-पहुंचते थक गईं, मैली भी हो गई, गंदी भी हो गई, लेकिन वो ही आत्मा अब क्लीन-क्लीन होगी, फ्रेश होगी, चार्ज होगी और वो ही आत्मा सुबह के लिए फिर से तैयार हो जाएगी।

आज जब हम अखबार देखते हैं तो कहते हैं ये सब तो बढ़ता ही जा रहा है। एक साल बाद का अखबार हम आज ही देख सकते हैं। आज जो हो रहा है ना, एक साल बाद वो छोटा लगेगा। इस समय वातावरण जो हमारी सृृष्टि का है, देश का है, हमारे शहर का है, वो थोड़ा-सा भारी है। आने वाले समय में और भारी हो सकता है। लेकिन उसमें रहते हुए हमें अपने को बचाना है, फिर हम अपने परिवार को बचाएंगे। फिर हम अपने काम के क्षेत्र पर लोगों को बचाएंगे और ये करते-करते हमारे शहर का और सृष्टि का वातावरण बदल जाएगा। पहले किसी एक ने गुस्सा किया होगा, तब आज हम सब गुस्सा करते हैं। डिवोर्स भी पहले कभी किसी एक ने दिया होगा, यह कोई ज्य़ादा पुरानी बात नहीं है। पचास साल पहले तक शादी करके भेजा हो बेटी को तो उसको पता था कि उसको वहीं रहना है। बीस साल पहले भी यही पता था लेकिन अब नहीं पता होता है। अब उसको यही पता है कि प्रॉब्लम आ गई तो वापिस आ जाना। बीस साल पहले तक ये ऑप्शन नहीं था। तो किसी एक ने किया, पाँच ने किया, दस ने किया, फिर तो ये नॉर्मल हो गया। तो जैसे ही वो नॉर्मल हो गया, उसके करने की संख्या बढ़ती गई। अगर वो चीज़ निगेटिव में अप्लाई होती है तो वो पॉजि़टिव में भी एप्लिकेबल है। लोग हैरानी से देखेंगे आपकी तरफ। उसने आपको इतना बड़ा धोखा दिया और आपने माफ कर दिया। बड़े अजीब हो आप, तो कहना हाँ जी, अजीब हूँ। लोग अजीब कहेंगे अभी, लेकिन इस फेज़ को हमने क्रॉस करना है। क्योंकि हमें पता है जो हम कर रहे हैं, सही है।
क्या हमें वो स्पेशल वाली आत्मा बनना है, जो सतयुगी संस्कारों को इस सृष्टि पर फिर से लेकर आएगी? सतयुगी संस्कार हर आत्मा के अंदर ऑलरेडी रिकॉर्डेड हैं। सुबह हुई, दोपहर हुई, थोड़ी देर बाद शाम होगी, फिर रात होगी। रात के बाद फिर सुबह होगी। इसी तरह इस सृष्टि पर सतयुग था, फिर त्रेतायुग आया, फिर द्वापरयुग आया, फिर कलियुग आया। अभी तो हम कहते हैं घोर कलियुग। तो घोर कलियुग के बाद कोई और युग नहीं है? साइकल रिपीट हो जाता है। घोर कलियुग के बाद फिर सतयुग आएगा। जो आत्माएं सतयुग में थीं, कलियुग तक पहुंचते-पहुंचते थक गईं, मैली भी हो गई, गंदी भी हो गई, लेकिन वो ही आत्मा अब क्लीन-क्लीन होगी, फ्रेश होगी, चार्ज होगी और वो ही आत्मा सुबह के लिए फिर से तैयार हो जाएगी।
सतयुग में जो आत्माएं थीं, वो अभी यहीं पर होंगी। अपने आपसे कहना है, मुझ आत्मा के पास सतयुग वाले संस्कार ऑलरेडी थे। अगर हम अभी सुबह फ्रेश हैं, रात को थककर मैले हो जाएं और रात को कोई हमें कहे बस थोड़ी देर में आप एकदम फ्रेश हो जाएंगे फिर से। अगर किसी ने सुबह से रात तक की जर्नी देखी नहीं होगी, वो रात को विश्वास नहीं करेगा कि थोड़ी देर में फ्रेश हो सकता है। कहेगा, अब तो मैं बिल्कुल थक चुका हूँ। कोई कहेगा कुछ नहीं अभी आप थोड़ी देर में देखना फ्रेश हो जाओगे। क्योंकि हमने वो साइकल नहीं देखा लेकिन जिसने देखा है उसको पता है।
परमात्मा आकर हमें कहते हैं एक समय था आप बिल्कुल फ्रेश थे, प्युअर थे, डिवाइन थे। इतने डिवाइन थे कि आज भी उन डिवाइन चित्रों की मंदिरों में पूजा हो रही है। वो जो देवी-देवता थे जिनकी हम पूजा कर रहे हैं, वो आज कहाँ हैं। वो जो सतयुग में आत्माएं थीं, वो कलियुग में कहाँ हैं? अब अपने आपसे पूछना हम कौन हैं। हम वो देवी-देवता हैं जो थक गए हैं। जो सुबह चाज्र्ड थे, रात तक आते-आते थक गए। अब जब हम थके हुए हैं और परमात्मा कहता है अभी आप थोड़ी देर में ऐसे देवता बन जाओगे, तो हम कहते हैं ऐस थोड़े हो सकता है। हम विश्वास नहीं कर सकते, क्योंकि हम अपने आपको उससे बहुत दूर देखते हैं। कहाँ वो और कहाँ हम। लेकिन ऐसा होता है, और ऐसा ही हमारे साथ होना है। वो संस्कार जो मुझ आत्मा में रिकॉर्डेड थे, वो अभी भी हैं।

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