मन की बातें

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प्रश्न : मेरा नाम विक्रम है। मैं विद्यालय से दस साल से जुड़ा हुआ हूँ। अभी कुछ ही दिन पहले मुझे पता चला है कि मेरे ऊपर शनि की दशा बैठ गई है, और उसके बाद राहू और केतु की जो दशा है मेरे ऊपर चढ़ जायेगी। जिससे आपकी हालत और भी बद्द से बद्दतर होती चली जायेगी, मौत भी आपकी हो सकती है और ये क्रम सात साल तक चलता रहेगा,ऐसा ज्योतिषी जी का कहना है। क्या इसका कोई समाधान हो सकता है?
उत्तर : ये जो दशायें हैं ये और कुछ नहीं ये वास्तव में मनुष्यों के कर्मों का इफेक्ट है। कोई भारी विकर्मों का फल सामने आ रहा है। लेकिन इन सबको पार किया जा सकता है। देखिए पहली चीज़ तो है भय कि सात साल! सात साल भले ही लम्बा समय हो लेकिन राजयोग इन सबका समाधान देता है। अब ईश्वरीय ज्ञान आपके पास है। और बाबा की एक बात पर आप विश्वास करें भगवान ने जो वचन बोल दिए वो परम सत्य हैं। एक ज्योतिषी ने बोल दिया कि तुम्हारे ऊपर राहू की दशा है। और भगवान ने बोल दिया कि तुम्हारे ऊपर वृक्षपति की दशा है,सबसे बड़ी दशा। दूसरा मैं आपको कहूँगा कि ये दशा आदि, जो भी निगेटिव चीज़ें जीवन में आती हैं फाइनली हम कर्मों की गति के अनुसार जानते हैं कि ये पास्ट के कर्मों का खेल चलता है। कभी विकर्म सामने हैं तो कभी पुण्य कर्म सामने हैं। एक घंटा सुबह और एक घंटा शाम को आप योग करें। एक शक्तिशाली योग जिसको हम ज्वाला स्वरूप योग कहते हैं। बीजरूप योग कहते हैं। और संकल्प करें कि जो भी विकर्म मेरे इन सात सालों में बाधक बन कर आ रहे हैं वो नष्ट हों। तो आपके सभी विकर्म नष्ट होते जायेंगे और आपका मार्ग क्लीयर होता जायेगा।
आपके मन में भारीपन फील हो सकता है, कुछ छोटी-मोटी दुर्घटनायें जीवन में हो सकती हैं लेकिन आप सेफ निकलते जायेंगे। दूसरा आपको सारा दिन प्रैक्टिस करनी है कि मेरे सिर पर सर्वशक्तिवान का वरदानी हाथ है। उसमें मैं सदा ही सुरक्षित हूँ और दो तीन स्वमान अपने पास रख लें। ताकि कोई समय का बुरा इफेक्ट आपके ऊपर होता है तो वो साथ-साथ समाप्त होता रहे। मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ, मैं सम्पूर्ण प्रकृति का मालिक हूँ, मैं सम्पूर्ण क्रियेटर हूँ, मैं विघ्न विनाशक हूँ ये चारों स्वमान आप सारा दिन में याद करते रहें। और जैसा मैंने कहा सर्वशक्तिवान का वरदानी हाथ मेरे सिर पर है मेरे ऊपर तो बृहस्पति की दशा है। ये सब गुड फीलिंग करते हुए मुझे कुछ नहीं होने जा रहा है, मैं बिल्कुल सेफ हूँ। मेरे सात साल बहुत सुन्दर व्यतीत होंगे। रोज़ सवेरे उठकर ये सात बार याद करेंगे। क्योंकि सवेरे के संकल्प सब्कॉन्शियस माइंड कमांड के रूप में स्वीकार कर लेता है। कई बार ऐसा भी होता है जब हमारी ऐसी स्थिति होती है तो कुछ भी करने का मन नहीं होता, तो योग भी करने का मन नहीं होता है लेकिन हम एक घंटे को 4 भागों में बांट सकते हैं। 15 मिनट गाने सुनकर कर लें, अपने मन को फ्रेश कर लें। 15 मिनट पाँच स्वरूपों का अभ्यास करना है। तीसरे में हमें बाबा को सामने रखते हुए उससे बातें करनी हैं। बुद्धि को परमधाम में ले जाने की बात नहीं, सामने बाबा को देखें, बाबा के चित्र के सामने बैठ जायें और बात कर लें। और 15 मिनट भिन्न भिन्न तरह की ड्रिल कर लें। सूक्ष्म वतन में जायें बापदादा के सामने, उनसे तिलक लें, वरदान लें, सफलता की बात लें और फिर परमधाम में जायें। फिर अभ्यास करें कि मैं आत्मा भृकुटि में आ बैठी हूँ। ब्रेन में मेरी सारी शक्तियां फैल रही हैं, चारों ओर फैल रही हैं। धीरे-धीरे इम्प्रूवमेंट होने लगेगा और योग अच्छा हो जायेगा।

प्रश्न : मेरा नाम श्वेता है। मेरे पति अपनी माँ और बहन की हर बात मानते हैं और मेरी सही बात भी स्वीकार नहीं करते। और वो दोनों मेरे पति से मेरी शिकायत करती रहती हैं जिससे वे मुझे बुरी तरह डांटते हैं। शादी को 2 साल हो गये हैं लेकिन स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है। कई बार विचार आता है कि क्या ऐसे ही जीवन भर मुझे सहना और झेलना पड़ेगा? कृपया बतायें क्या करूँ?
उत्तर : मैं अपनी सभी छोटी व बड़ी बहनों को कहना चाहूँगा देखिए परिवार में प्यार और अपनापन तो तभी हो सकता है जब ये जो शिकायत करने की आदत है ना या किसी को डोमिनेट करने का संस्कार है इससे थोड़ा बचें। अब नई लड़की आपके घर में बहू बनकर आ गई है तो उसको अपने में समाना है। हो सकता है उसकी भी कुछ गलती हो या उसमें कुछ कमज़ोरियां हो लेकिन मनुष्य ही गलती करता है कोई पशु-पक्षी तो गलती कर नहीं रहे हैं। मैं ये कहना चाहूँगा कि जो व्यवहार हम दूसरों से कर रहे हैं ये सृष्टि का सिद्धान्त है वो ही व्यवहार हमें भी प्राप्त होगा। अब उनको अपनी पत्नी को भी महत्त्व देना ही चाहिए क्योंकि एक परिवार से दूसरे परिवार में आना वहाँ एडजस्ट होना, संस्कार मिलन करना और अपनी एक छाप छोडऩा और बहुत सारी बातों को फेस करना, समाना और पुराने प्यार को या पुरानी बातों को भुलाना ये कोई सहज काम नहीं होता। इसलिए इसमें मनुष्य को बहुत सहयोग की आवश्यकता होती है। ऐसे में आपको चाहिए बहुत स्पिरिचुअल पॉवर। राजयोग में स्पिरिचुअलिटी में सिखाया जाता है कि हमारे वायब्रेशन्स दूसरों को बदल सकते हैं। तो स्पिरिचुअल नॉलेज के द्वारा उन तीनों को सुबह पाँच बजे जब तीनों सोये होंगे आप थोड़ा-सा राजयोग अभ्यास करेंगी 10 मिनट, योगाभ्यास माना सर्वशक्तिवान की किरणें मुझपर आ रही हैं, इन संकल्पों को रिपीट भी कर सकती हैं। मैं भगवान की संतान हूँ, मेरा जीवन बहुत सुखी है आपको मानस पटल से वो पर्दा हटाना पड़ेगा जो आपको उदास कर रहा है। जीवन भर ऐसा थोड़े ही है कि ऐसा ही रहेगा। परमात्म शक्तियों को अपने अन्दर लायेंगी, धारण करेंगी। फिर उन तीनों को आत्मा देखेंगी। ये तीनों आत्मायें हैं, भगवान के बच्चे हैं, बहुत अच्छे हैं। ये मेरे बहुत अच्छे फ्रेंड हैं, ये मेरे बहुत सहयोगी हैं, तीनों मुझे बहुत प्यार करते हैं। इसमें रोज़ सवेरे 10 मिनट टाइम लगायेंगी ना तो उनकी भावनायें, उनके विचार बदलेंगे, उनका व्यवहार बदलेगा और आपका जीवन बहुत सुखी हो जायेगा। लेकिन मैं आपको कहूँगा कि भविष्य में कभी भी आपको दूसरों से ऐसा व्यवहार नहीं करना है। ये सीख लेना है कि अगर हमसे कोई ऐसा व्यवहार कर रहा है तो हमें कैसा लग रहा है।

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