प्रश्न- मेरे और मेरे पति के बीच में बहुत ही गलतफहमी हो चुकी है। मुझे उनका व्यवहार समझ में नहीं आ रहा है कि वो कौन-सी बात से मुझसे दु:खी या परेशान हैं। हमारे बीच की प्रॉब्लम इतनी बढ़ गई है कि हम एक-दूसरे से बात तक नहीं करते जिसके कारण मेरा मन बहुत परेशान रहता है और मैं मेडिटेशन भी सही तरीके से नहीं कर पाती हूँ। तो क्या करना चाहिए?
उत्तर- समस्या तो मैं इसको विकराल ही कहूँगा क्योंकि घर में साथ रहना, साथी हैं भले ही काम पर जाते हों लेकिन आपस में बातचीत ना हो तो घर में खुशी का माहौल तो नहीं रहेगा। गमगीनी सी छाई होगी। और इसका इफेक्ट बच्चों पर बहुत बुरा होता है। अगर छोटे बच्चे हैं तो लोग समझ नहीं सकते इन चीज़ों का इफेक्ट छोटे बच्चों पर कितना बुरा होता है। तो वो न बोलते हों किसी से नाराज़ हों। तो कुछ स्वमान मैं आपको दे रहा हूँ, आप इन स्वमानों का अभ्यास करना:- मैं एक महान आत्मा हूँ, इस घर की ईष्ट देवी हूँ और उन्हें भी देखना, दूर से ही देखना भले कि वो भी एक महान आत्मा है, वो भी भगवान का बच्चा है, बहुत अच्छा है। तो जितना आप स्वमान में रहेंगे मैं महान आत्मा हूँ, ईष्ट देवी हूँ, मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ, विश्व कल्याणकारी हूँ। जितना आप स्वमान में रहेंगे उतना ही आपका सम्मान बढ़ेगा। और उसके लिए आप जो जितना सोचेंगे कि ये महान आत्मा है, ये बहुत अच्छे हैं उतना ही आपसे गुड वायब्रेशन्स उनको जाएंगे और उनके विचारों में परिवर्तन आएगा। भोजन बनाते समय मैं परम पवित्र आत्मा हूँ। बहुत अच्छा अभ्यास करना ही है। आधा घंटा उनके लिए मेडिटेशन भी करें।
प्रश्न- मैं योग भट्टी कैसे करूं जिससे कि मेरी सारी इच्छा पूरी हो जाए, मैं जो चाहती हूँ बाबा मुझे दे दें, मेरी बात सुन लिया करें?
उत्तर- अपनों की बात सुनी जाती है। जहाँ बहुत प्यार होता है वहाँ सुनवाई होती है। भगवान ने तो सुनवाई की है हम सबकी, हम उनकी कम सुनते हैं। आप जितना सुनोगे वो भी उतना ही आपको सुनेगा बल्कि दस गुना ज्य़ादा सुनेगा। इसलिए चेक कर लो मैं उसकी बातों को सुनती हूँ? और मैंने ऐसी इच्छाएं तो नहीं रखी हुई हैं जो सांसारिक हैं और वो जानता है कि अगर ये पूरी हो गई तो ये फिर मेरी तरफ नहीं आएगी। कई ऐसा तो नहीं आपने सोचा हुआ हो मुझे करोड़पति बना दो। और प्रभु जी सोचते होंगे कि इन्हें करोड़पति बना तो दूं लेकिन ये फिर मुझे रोड पर छोड़ देंगे। मेरे साथ मित्र डे भी नहीं निभाएंगे। इसलिए अपनी इच्छाओं को भी एक बार जांच लें। इच्छाओं में कोई स्वार्थ तो नहीं है! इच्छाएं अगर निष्काम भाव की हैं, इच्छाएं अगर विश्व कल्याण की हैं तो योग से वो अवश्य पूरी हो जाती हैं। लेकिन आपको इन सबके लिए 4 घंटे योग रोज़ ज़रूर करना चाहिए।
प्रश्न- वैसे क्या इच्छाओं के साथ योग करना चाहिए या निष्काम भाव से?
उत्तर- एक्चुअली तो निष्काम भाव से योग करने से हमारे विकर्म नष्ट होते हैं और भाग्य स्वत: ही उदय हो जाएगा। लेकिन फिर भी कईयों को होता हैं कुछ चाहिए इसलिए योग लगाऊं, तो कर सकते हैं। योग बहुत अच्छा करना है लेकिन इच्छा ऐसी न हो आपका अकल्याण कर दे।
प्रश्न- नौकरी में सफलता के लिए क्या करें? नौकरी भी तो एक कामना व इच्छा ही है?
उत्तर- ये कामना ऐसी है जिसको कामना न कहकर आवश्यकता कहेंगे। ये उनकी आवश्यकता है, उनको अपना परिवार पालना है। उनको नौकरी चाहिए इसमें हम निष्काम भाव से नहीं रह सकते। हाँ, अगर हमारा योग बहुत अच्छा है तो स्वत: हमारा हर काम सहज सफल होंगे। लेकिन योग अच्छा नहीं है तो एक घंटा योग करेंगे कि मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ, सफलता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, इस संकल्प से। बाबा के नाम एक पत्र लिख दें रात को। बाबा को अर्पित करें मुझे ये चाहिए बाबा, आपकी मदद चाहिए मुझे। मुझे मदद करो जॉब होगी तो मैं अपने परिवार को ठीक से चला सकूंगा। क्योंकि ये आवश्यकता है। इसको कामना नहीं कहते। तो निश्चित रूप से सफलता मिलेगी।
प्रश्न- किसी ने कहा है कि मैं फलाने व्यक्ति से ही शादी करना चाहती हूँ या चाहता हूँ और इसके लिए मैं योग का अभ्यास करूं या फिर मेरी बिटिया बड़ी हो गई है, उसकी शादी नहीं हो रही है या फिर बेटा बड़ा हो गया है, नौकरी भी है पर शादी नहीं हो पा रही है, तो हम किस प्रकार से योग करें?
उत्तर- ये भी इनकी आवश्यकता होती है। पर जहाँ तक लड़के-लड़कियों की शादी की बात है, ऐसी बहुत सारी बातें आती हैं। मैं इससे ही शादी करना चाहती हूँ लेकिन वो एक साल के बाद कहेंगी अब मैं इसका मुंह भी नहीं देखना चाहती हूँ, समस्या यहां होती है। इसलिए योग सफल तो कर दे फिर योग करेंगी कि मैं इसका मुंह नहीं देखना चाहती हूँ। अब कौन-सा योग करूँ ये बताओ? इसलिए इन चीज़ों के लिए योग नहीं है। योग तो श्रेष्ठ कार्यों को सफल करने के लिए है। हाँ, किसी के बच्चे ज्ञान में नहीं हैं उनकी तो शादी करानी ही है। तो वो एक घंटा योग करेंगे। तो इसमें भी सहज सफलता हो जाती है। लेकिन सिर्फ आवश्यकता के लिए योग करेंगे फिर निष्काम भाव से योग चले।



