राजयोगी बृजमोहन भाई जी की प्रथम पुण्य तिथि पर सदभावना दिवस के रुप में मनाने का संकल्प लिया
राजयोगी बृजमोहन भाई जी का जीवन एक खुली किताब थी
उनके संकल्प,बोल और कर्म में विश्व कल्याण की प्रेरणा थी
उनका जीवन ईमानदारी,जिम्मेदारी से भरा हुआ था
उनमें ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना थी,अनेकता में एकता कैसे हो इसके ज्ञाता थे
आबू रोड, राजस्थान। ब्रह्माकुमारीज संस्था के पूर्व महासचिव राजयोगी बीके बृजमोहन भाई जी की प्रथम पुण्य स्मृति पर शांतिवन के डायमण्ड हॉल में ‘सबका मालिक एक’ सर्वधर्म सभा आयोजित की गई। इसमें विभिन्न धर्मों के प्रमुखों और आध्यात्मिक प्रतिनिधियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर सभी प्रमुख अतिथियों ने उनकी स्मृति दिवस को ‘सद्भावना दिवस’ के रूप में मनाने का संकल्प लिया।

जनकल्याण और सेवा के लिए समर्पित था जीवन : बीके आशा दीदी
ओम शांति रिट्रीट सेंटर की डायरेक्टर बीके आशा दीदी ने कहा कि बीके बृजमोहन भाई जी का संपूर्ण जीवन जनकल्याण, बाबा, यज्ञ और सेवा को समर्पित था। उनके साथ 52 वर्षों की सेवा का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि प्रेरणा भवन उनके संकल्पों और प्रेरणा का परिणाम है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता पर आधारित 1064 एपिसोड तैयार होने तथा प्रेरणा भवन की गीता ज्ञानदर्शिका को जनसेवा के लिए समर्पित किए जाने की जानकारी भी दी।

एक परमपिता की संतान हैं हम सभी, यही है विश्व बंधुत्व का आधार : बीके करुणा भाई जी
संस्था के महासचिव राजयोगी बीके करुणा भाई जी ने कहा कि आत्मिक पहचान, एक परमात्मा में विश्वास और दूसरों का भला करना आध्यात्मिक जीवन के प्रमुख आधार हैं। उन्होंने कहा कि जाति, धर्म, भाषा और संप्रदाय से ऊपर उठकर सभी को साथ लेकर चलना ही ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की सच्ची भावना है।

धर्म जोड़ता है, जबकि विभाजन की मानसिकता दूरियां बढ़ाती है : महामंडलेश्वर संत आचार्य कमल किशोर जी महाराज
दिव्य शक्ति अखाड़ा, सहारनपुर के महामंडलेश्वर संत आचार्य कमल किशोर जी महाराज ने कहा कि धार्मिक और सामाजिक भेदभाव के कारण समाज में दीवारें खड़ी हो गई हैं। इन्हें तोड़ने के लिए आध्यात्मिक चेतना और ‘सबका मालिक एक’ की भावना को अपनाना आवश्यक है।

राष्ट्र की एकता और मानवता के लिए सर्वधर्म संवाद जरूरी : महामंडलेश्वर गोस्वामी सुशील जी महाराज
भारतीय सर्वधर्म संसद के नेशनल कन्वेनर एवं महर्षि भृगु पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर गोस्वामी सुशील जी महाराज ने कहा कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और मानवता के लिए सर्वधर्म सम्मेलनों की आवश्यकता बढ़ गई है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ को भारतीय संस्कृति का मूल भाव बताते हुए सभी धर्मों और समुदायों के प्रति समान सम्मान पर जोर दिया।

प्रत्येक कर्म का हिसाब परमात्मा के सामने देना है : प्रो. मोहम्मद सलीम
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के वाइस प्रेसीडेंट प्रो. मोहम्मद सलीम ने कहा कि एक ईश्वर ही समस्त सृष्टि का रचयिता और पालनहार है। मनुष्य को अपने जीवन के प्रत्येक कर्म का हिसाब देना है। यह विश्वास हमें नैतिकता, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

बीके जयंती दीदी ने कराया राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास
संस्था की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके जयंती दीदी ने राजयोग मेडिटेशन के लाभ बताए और उपस्थित लोगों को अभ्यास कराकर गहन शांति एवं दिव्यता की अनुभूति कराई।










अनेक धर्मों के प्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि
सभा में राजयोगी भ्राता मृत्यंजय जी, दिल्ली पारसी अंजुमन के ट्रस्टी मर्जबन नरीमन जैयवाला, इंस्टीट्यूट ऑफ हार्मनी एंड पीस स्टडीज के फाउंडर डॉ. एम.डी. थॉमस, टेम्पल ऑफ अंडरस्टैंडिंग इंडिया फाउंडेशन के महासचिव डॉ. ए.के. मर्चेंट, आश्रम हरि मंदिर, पटौदी के महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव जी महाराज, सिख स्कॉलर एंड इंटरफेथ लीडर के चेयरमैन सरदार परमपाल सिंह, बहाई ऑफिस ऑफ पब्लिक अफेयर्स की डायरेक्टर मिसेज कारमेल मोहाबिलपुर त्रिपाठी, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति फिरोज बकैत अहमद, जूना अखाड़ा, हरिद्वार के महामंडलेश्वर परमहंस स्वामी प्रबुधानंद गिरी जी महाराज तथा तिब्बतन पार्लियामेंट इन एक्साइल के पूर्व स्पीकर आचार्य येशी पुण्टोस्क ने भी अपने विचार रखे और शुभकामनाएं दीं।


कार्यक्रम का संचालन नई दिल्ली से आईं बीके सपना बहन तथा ओम शांति रिट्रीट सेंटर की राजयोग शिक्षिका बीके हुसैन बहन ने किया। सभा ने सर्वधर्म सद्भाव, विश्व बंधुत्व और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।





