ब्रेक को पॉवरफुल बनायें

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व्यक्ति परखने में बहुत होशियार होता है। कोई भी गलती होती है जो नीति प्रमाण नहीं है, तो समझते हैं कि यह नहीं करना चाहिए, यह सत्य नहीं है, यथार्थ नहीं है, अयथार्थ है, व्यर्थ है। ये समझते भी हैं लेकिन समझते हुए फिर भी करते तो हैं ना! तो इसको क्या कहेंगे? सोचो ज़रा… यह हर व्यक्ति से होता है। किस ओर हम जा रहे हैं, कैसा हमारा व्यक्तित्व बन रहा है…!!! अगर इस तरह का हमसे हो रहा है तो कौन-सी शक्ति की कमी है? जैसे आजकल कार चलाते हैं, देख भी रहे हैं कि एक्सीडेंट होने की सम्भावना है, ब्रेक लगाने की कोशिश करते हैं, लेकिन ब्रेक लगे ही नहीं तो ज़रूर एक्सीडेंट होगा ना! ब्रेक है लेकिन पॉवरफुल नहीं है और यहाँ के बजाय वहाँ लग गई तो भी क्या होगा? इतना समय तो परवश होगे ना! चाहते हुए भी कर नहीं पाते। ब्रेक लगा नहीं सकते या ब्रेक पॉवरफुल न होने के कारण ठीक लग नहीं सकती! तो यह चेक करने की ज़रूरत है। जब ऊंची पहाड़ी पर चढ़ते हैं तो क्या लिखा हुआ होता है कि ब्रेक चेक करें। क्योंकि ब्रेक सेफ्टी का साधन है। तो कन्ट्रोलिंग पॉवर का या ब्रेक लगाने का अर्थ यह नहीं कि लगाओ यहाँ और लगे वहाँ। कोई व्यर्थ को कन्ट्रोल करना चाहते हैं, समझते हैं, यह रॉन्ग है तो उसी समय रॉन्ग को राइट में परिवर्तन होना चाहिए। इसको कहा जाता है कन्ट्रोलिंग पॉवर। ऐसे नहीं कि सोच भी रहे हैं लेकिन आधा घंटा व्यर्थ चला जाये सोचने-सोचने में, पीछे कन्ट्रोल में आये। बहुत पुरूषार्थ करके आधे घंटे के बाद परिवर्तन हुआ तो उसको कन्ट्रोलिंग पॉवर नहीं, रूलिंग पॉवर नहीं कहा जाता। यह हुआ थोड़ा-थोड़ा अधीन और थोड़ा-थोड़ा अधिकारी- मिक्स। तो इसको राज्य अधिकारी कहेंगे या पुरूषार्थी कहेंगे? तो अब पुरूषार्थी नहीं राज्य अधिकारी बनो। इस स्वराज्य अधिकार का श्रेष्ठ मज़ा है। अभी समय है स्वराज्य अधिकारी बनने का। सु-राज्य माना सदा मौज में रहना। मौज में रहने वाला कभी मूंझता नहीं है। अगर मूंझना है तो मौज नहीं है। इस संगमयुग पर मौज ही मौज है ना! अभी भी- कभी मौज, कभी मूंझना। हमें अपने जीवन के हर पल को जीना है। माना स्वयं के राज्य की मौज में रहना है। थोड़ी बहुत कमी रह भी जाती है तो उसे उसी वक्त ठीक कर मौज में रहने की आदत बनायें, न कि मूंझते रहें। मौज वाले महान बन जायेंगे और मूंझने वाले वहाँ भरी ढोयेंगे। समझते हो कि यह ठीक नहीं है, यह नहीं होना चाहिए, ऐसा होना चाहिए – तो उसी वक्त ब्रेक लगायें। और ब्रेक को पॉवरफुल बनायें। हमें परमात्मा ने अपने मन को अपने लक्ष्य की तरफ ले जाने के लिए कई बातें बताई हैं। बाबा कहते तुम ही विश्व के मालिक थे। विश्व पर आपका ही राज्य था। आपने ही इस धरा पर अनेक बार राज्य किया है। इस स्मृति को सामने लाओ और अपने मन में विचार करो और बुद्धि रूपी यंत्र से उसे निहारो। ऐसा बार-बार स्मृति में लाने पर और बुद्धि नेत्र से देखने से ये अनुभूति होगी, आपको एहसास होगा कि वास्तव में बाबा जो कहता है वो मैं हूँ और ऐसा विश्वास अपने आप में बढ़ेगा। और आप में वो सारी शक्तियां इमर्ज होंगी। और आप अपने को शक्तिशाली महसूस करेंगे। तो इस तरह अपने आपको बाबा ने जो बातें कही उन बातों को स्मृति में लाकर उस स्थिति में स्थित कर अपने को शक्तिशाली बनाना। तभी हम आने वाले समय में स्वराज्य के अधिकारी बनेंगे। अब हमारा राज्य आया की आया।

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