– प्लेनरी सेशन में अध्यात्म, राजनीति, व्यापार और प्रशासनिक सेवा से जुड़ी हस्तियों ने रखे अपने विचार
– अरुणाचल प्रदेश के गृहमंत्री और अंतर्राज्यीय सीमा मामलों के मंत्री मामा नटुंग ने लिया भाग
– पत्रकारों से चर्चा मेें गृहमंत्री नटुंग का बड़ा बयान, बोले- एक कदम तो छोड़िये भारत की एक इंच जमीन भी चाइना ले नहीं पाएगा
– पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान और भारतीय विदेश सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी भूतपूर्व राजदूत दीपक वोहरा भी रहे मौजूद
आबू रोड,राजस्थान। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन में चल रहे चार दिवसीय वैश्विक शिखर सम्मेलन के प्लेनरी सेशन में अध्यात्म, राजनीति, व्यापार और प्रशासनिक सेवा से जुड़ी हस्तियों ने अपने विचार व्यक्त किए। विश्व नवनिर्माण के लिए आध्यात्मिक जागृति विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश से छह हजार से अधिक लोग भाग ले रहे हैं।
सम्मेलन के प्लेनरी सेशन में मुख्य अतिथि अरुणाचल प्रदेश के गृहमंत्री और अंतर्राज्यीय सीमा मामलों के मंत्री मामा नटुंग ने कहा कि हमें यहां परमात्मा ने बुलाया ताकि हमारा देश भारत हमको जाने। नालंदा विश्वविद्यालय तब था, जब मिडिल ईस्ट में शिक्षा का कोई नामो-निशान नहीं था। इसलिए भारत विश्व गुरु था। दुनिया की समस्याओं का समाधान ब्रह्माकुमारीज के पास है। दुनिया ये मान रही है कि ब्रह्माकुमारीज़ संजीवनी बूटी का काम कर रही है। क्लाइमेट चेंज का समाधान केवल भारत के पास है। इस दौरान एक रोचक नजारा देखने को मिला। एक्सरसाइज के जो स्टेप गृहमंत्री ने सुबह के सेशन में सीखे, वहीं स्टेप अपने वक्तव्य के दौरान सभी लोगों को कराए।

ब्रह्माकुमारीज़ के गुण को ग्रहण करें-
पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान ने कहा कि मैं बुद्ध, महावीर, जनक की धरती बिहार से आया हूं। मैं 25 वर्षों से यहां से जुड़ा हूं। आज चौथी बार आया हूं। स्प्रिचुअल होना स्वयं के लिए, परिवार, समुदाय, देश, दुनिया, मानवता के लिए अनिवार्य है। हम सबका लक्ष्य मानवता की रक्षा है। ब्रह्माकुमारीज़ के 90 वर्षों की यात्रा के कारण भारत का भारततत्व बचा हुआ है। सुदूर क्षेत्रों में भी इनके सेंटर्स हैं। उन्होंने लोगों से आहृान किया कि ब्रह्माकुमारीज़ के गुण को ग्रहण करें और दुनिया को बेहतर करें।

जितनी अमेरिका की आबादी है, उतने तो हमारे विद्यार्थी हैं-
भारतीय विदेश सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी भूतपूर्व राजदूत दीपक वोहरा ने कहा कि अमेरिका के पास 34 करोड़ आबादी है। डोनाल्ड ट्रंप को बता दो कि भारत के पास 34 करोड़ विद्यार्थी हैं। आज जब भारत बोलता है तो दुनिया सुनती है, क्योंकि यह सशक्त भारत है। आज अगर पूरी दुनिया में कृषि खत्म हो जाए तो भारत में इतना चावल है कि वो कई महीनों तक दुनिया को खिला सकता है। ब्रह्माकुमारीज़ की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके संतोष दीदी ने आशीवर्चन दिए।

इन्होंने भी व्यक्त किए विचार-
– वाराणसी से आईं श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा की महामंडलेश्वर मुक्तेश्वरी गिरि महाराज ने कहा कि महादेव ने बताया सेवा से बड़ा कोई कर्म नहीं, सरलता से बड़ा कोई धर्म नहीं है। आज सेवा और सरलता ही ब्रह्माकुमारीज़ की पहचान है। हमारा उद्देश्य एक ही है राष्ट्र सेवा और समर्पण।
– बेंगलुरु विधायक दिनेश गुंडु राव ने कहा कि मैं ब्रह्माकुमारीज़ में आकर मुझे लगा कि बहुत पहले आ जाना चाहिए था। ब्रह्माकुमारीज़ पवित्रता का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनका कोई दूसरा एजेंडा नहीं है। ब्रह्माकुमारीज़ कभी किसी चीज की अपेक्षा नहीं रखती, बल्कि मानवता, प्रेम, शांति और सद्भाव को फैलाने का कार्य करती हैं।
– पेसिफिक मेडिकल यूनिवर्सिटी उदयपुर के डिपार्टमेंट ऑफ न्यूरो साइंसेस के कंसल्टेंट इंटरवेंशल न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अतुलाभ बाजपेयी ने कहा कि आप वर्षों तक योगा करते हैं तो एकाग्रता बढ़ती है। जो सांसारिक सुखों से अनुभव नहीं होता, वह एक योगी करता है। स्वयं को स्वस्थ करें, परिवार को सुखी करें और राष्ट्र को सशक्त करें।
– ब्रह्माकुमारीज ऑस्ट्रेलिया एंड एशिया के रीजनल डायरेक्टर ब्रह्माकुमार चार्ली हॉग ने कहा कि जब लंदन में ब्रह्माकुमारीज़ से मिला, तो मुझे केवल परमात्मा शिव बाबा का ही परिचय नहीं मिला, बल्कि मेरा पूरा जीवन बदल गया। मैं सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठता हूं। राजयोग मेडिटेशन विश्व के लिए भारत का महान उपहार है।
– जयपुर की डायरेक्टर राजयोगिनी सुषमा दीदी ने राजयोग साधना के बारे में बताते हुए योग की गहन अनुभूति करवाई। उन्होंने कहा जब हम योग शब्द सुनते हैं तो बहुत भारी लगता है, लेकिन यहां आकर पता चलता है कि यह तो बहुत आसान है। मेडिटेशन का अर्थ स्वयं को जानना और उस परमपिता परमात्मा से जुड़ना है।

– मेडिकल विंग के सचिव डॉ. बनारसीलाल शाह ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि परमात्मा को आए हुए 90 वर्ष हो गए हैं। अब जाने की तैयारी हो रही है। आप सभी भी अपना भाग्य बना लो। ब्रह्माकुमारीज़ ने पिछले तीन साल में पूरे देश में आठ करोड़ लोगों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई है।
ये भी रहे मौजूद-
माउंट एवरेस्ट को फतह करने वाली पहली महिला सुप्रसिद्ध पर्वतारोही डॉ. मनस्वी अग्रवाल का विशेष रूप से सम्मान किया गया। उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल, दिल्ली खादी बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एवं विधायक वीर सिंह ढिंगन, टांगरी इंश्योरेंस एंड फाइनेंशियल ग्रुप कनाडा के अध्यक्ष अश्विनी टांगरी, लोढ़ा फाउंडेशन मुंबई की चेयरमैन मंजू लोढ़ा, राजस्थान सरकार के कृषि एवं पंचायती राज विभाग के आयुक्त नरेश कुमार गोयल, एंकर सुश्री पीनाज त्यागी, एमएस जय भारत स्पाइसेस प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक-अध्यक्ष सुरेंद्र नाथ पांडा, प्रख्यात उद्योगपति राधेश्याम भाई, सिक्किम केंद्रीय विश्वविद्यालय गंगटोक के कुलपति प्रो. सांतनु कुमार स्वैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन जयपुर की बीके चंद्रकला दीदी ने किया।


सम्मेलन में लोगों गृहमंत्री द्वारा बताए टिप्स को फॉलो करते हुए।
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– पत्रकारों से विशेष चर्चा में कई मुद्दों पर की बात
एक कदम तो छोड़िये भारत की एक इंच जमीन भी चाइना ले नहीं पाएगा: गृहमंत्री नटुंग
– अरुणाचल प्रदेश के गृहमंत्री और इंटर स्टेट बॉर्डर अफेयर्स मंत्री मामा नटुंग का बड़ा बयान
आबू रोड,राजस्थान।। वैश्विक शिखर सम्मेलन में आए अरुणाचल प्रदेश के गृहमंत्री और इंटर स्टेट बॉर्डर अफेयर्स मंत्री मामा नटुंग ने पत्रकारों से चर्चा में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पहले अरुणाचल प्रदेश को भारत का आखिरी प्रदेश कहा जाता था, अब वह भारत का पहला राज्य है, जो गांव देश का आखिरी गांव था, आज वो देश का पहला गांव कहा जाता है। बॉर्डर में फोर्सेज के साथ अरुणाचल प्रदेश की जनता चट्टान के जैसे खड़ी है। निश्चिंत रहिए सोचना तो बहुत दूर की बात है, वे एक इंच जमीन भी नहीं ले सकते। चीन को चेताते हुए कहा कि ये 1962 वाला भारत नहीं है, यह नया भारत है, ये न्यू इंडिया है। 1962 में चाइना ने जो आक्रमण किया, अब वो भारत नहीं है। बीच-बीच में अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं में तनाव होते हैं, पड़ोसी से तनाव होता रहता है, उसमें क्या है?
गृहमंत्री नटुंग ने कहा कि तेजी से विकास करते भारत को कुछ पड़ोसी देख नहीं पा रहे हैं। वह भारत के सुखी होने से दुखी हैं। इसलिए कभी वो जेनजी का उपयोग कर रहे हैं। कभी ड्रोन से ड्रग्स भेज रहे हैं। युवाओं को कमजोर करना चाहते हैं। क्योंकि युवा कमजोर हुए तो देश कमजोर होगा। यह भारत को कमजोर करने की साजिश है, इसलिए देशवासियों को सतर्क रहना है।
विदेश में आज भारत को सम्मान की नजरों से देखते हैं-
भारतीय विदेश सेवा के सेवानिवृत्त अफसर और आर्मेनिया और सूडान में भारत के राजदूत रहे दीपक वोहरा ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि मुझे नौ भाषाएं आती हैं, लेकिन एक भी भाषा में मैं ब्रह्माकुमारीज़ में हुए अनुभव को बयान नहीं कर सकता हूं। पहले भी मैं वर्ष 1974 में आया था। मेरी पहली पोस्टिंग पेरिस में हुई थी, तब वहां हमारी छवि गरीब और भिखमंगों की थी। लेकिन आज लोग भारत को सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। लेकिन आज मैं फ्रांस जाता हूं तो मेरा भारतीय पासपोर्ट देखकर मेरे स्वागत को उमड़ पड़ते हैं। देखिए, आज फ्रांस जल रहा है। पश्चिम और उत्तर अफ्रीका से आए जेहादी मुस्लिमों ने फ्रांस को जला दिया है। अब भारत को अपना दरवाजा बंद करना होगा, इन पर हम विश्वास नहीं कर सकते हैं। मैं पठान का बेटा हूं, पठान पिता और सिख मां का बेटा हूं। आज 35 देश हमारे प्रधानमंत्री मोदी को सम्मानित कर चुके हैं, उनमें 11 मुस्लिम देश भी शामिल हैं। हमारे पीएम मोदी के टेबल पर एक बार में 82 आमंत्रण रखे होते हैं। अब ये भारत का समय है।

