मन की बातें – राजयोगी ब्र.कु. सूरज भाई

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प्रश्न : मैं कल्पना हूँ, पुणे से। मेरी उम्र 49 साल है। मैंने अपनी सगी बहन को बहुत सारे पैसे दिए हैं। मैं उससे दो साल से वो पैसे मांग रही हूँ, लेकिन वो मुझे टाल रही है। डेट पर डेट वो मुझे देती जा रही है। पर दे नहीं रही है। जिस वजह से मैं बहुत टेन्शन में रहती हूँ। मन में भी कई बार सवाल उठते रहते हैं कि मैंने उसे पैसा क्यों दिया और उसके कारण मेरी नींद भी चली गई है। कृपया मुझे बतायें कि ऐसे में मुझे क्या करना चाहिए?
उत्तर : आजकल ऐसी मेंटेलिटी हो गई है कि अपनों से लोगों को बुरा व्यवहार मिलता है। तो फिर मनुष्य के मन में क्या आता है कि किसी को मदद न की जाए। निरसता आ जायेगी सम्बन्धों में। तो इसीलिए मनुष्य को ऐसा नहीं करना चाहिए। एक बुरा संदेश जाता है समाज को। कोई हमें बता रहा था कि कोई बड़ा अमाउंट हमने दे दिया किसी को विश्वास पर। अब वो कहता है कि मेरे पास तो कुछ नहीं है। मैं मर ही सकता हूँ, इसके अलावा तो कुछ हो नहीं सकता। साथ में धमकी भी दे दी कि तुम्हारे नाम सुसाइड नोट लिख जाऊंगा। इन्होंने पैसे मांगे मैं दे नहीं पाया तो। अब बेचारे फंस गये, इतना बड़ा अमाउंट। जैसे सदा ही हम कहते हैं कि कर्मों की गति को मनुष्य को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। कोई किसी का पैसा लेकर न दे, ये होगा नहीं। उसे देना पड़ेगा। कष्ट भी पायेगा और देना भी पड़ेगा। इसलिए प्यार से दे देना चाहिए। पहले तो मैं आपकी बहन को कहूँगा अगर वो कभी हमें सुनती हो तो जिसका लिया है उसका प्यार से, धन्यवाद देते हुए कि तुमने हमें समय पर मदद की थी, रिटर्न करें। अगर किसी के पास देने को ही न हो तो अपनी बात क्लीयर कर देनी चाहिए। अब आपको क्या करना है, रोज़ सवेरे 21 बार अभ्यास करें मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ। और दस मिनट अपनी बहन को गुड वायब्रेशन्स दें। संकल्प भी दें कि ये पैसा तो भगवान (शिव बाबा) का है। हम शिवबाबा के हैं तो हमारा सबकुछ शिवबाबा का है। तुम ये प्यार से लौटा दो। हमने तुम्हें समय पर मदद की थी। अब तुम्हारा कत्र्तव्य है कि तुम भी लौटा दो। तो गुड वायब्रेशन्स देंगे। ऐसे थॉट्स देंगे और विज़न भी बनायें कि वो आ गई है मेरे घर में, और प्यार से, मुस्कुराते हुए सॉरी करते हुए रिटर्न कर रही है। 21 दिन तक ये भी करेंगे। तो आपका पैसा वापस आ जायेगा।

प्रश्न : जहाँ हमने मकान बनाया है, वहाँ पहले किसी की समाधि थी। ऐसा हमको एक सयाने ने बताया। हमने पता भी किया तो वो सही निकला। और जब से हम यहाँ आये हैं तब से बहुत ही बुरे सपने आते हैं, कभी भी कोई छोटे या बड़े काम में हमें सफलता नहीं मिलती। बनते काम भी एंड तक आते-आते बिगड़ जाते हैं। हमने हवन आदि भी करवाया और कई तांत्रिक से भी प्रयोग कराये, उस आत्मा को दूसरी जगह भेजने के लिए। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। क्या उस मकान को बेच दिया जाये? या फिर हम वहाँ रहें तो कुछ समाधान हो सकता है? कृपया बतायें क्या करें? 11 वर्ष हो गये हैं हमें इस प्रकार की परिस्थिति से जूझते हुए।
उत्तर : बहुत लम्बा समय हो गया है, और आपने करा भी सबकुछ लिया है। क्योंकि जहाँ ऐसी चीज़ होती है वहाँ उन आत्माओं के वायब्रेशन्स रहते ही हैं। और कभी-कभी उन आत्माओं का भी वहाँ वास हो जाता है। अगर वो आत्मायें बड़ी अच्छी हैं, बड़ी कॉपरेटिव हैं तो सब कार्यों में मदद होने लगती है। लेकिन आत्मा बहुत अच्छी नहीं है तो इस तरह की स्थिति बनने लगती है। जैसे आपके साथ बनी। तो आपको दो चीज़ मैं सजेस्ट करूंगा, अगर मकान आदि बेचना सहज हो तो वो भी आपको कर लेना चाहिए। पर बात ये है कि जो लेगा उसको भी इसी परिस्थिति का सामना करना पड़ेगा। इसीलिए अगर इसका एक सुन्दर समाधान हो जाये तो चाहे आप बेच दें उनके लिए भी अच्छा हो, चाहे आप खुद रहें आपके लिए भी कल्याणकारी हो। अगर आपने राजयोग नहीं सीखा है तो हमारे विश्व विद्यालय में प्रति गुरूवार शिव बाबा को, जो सुप्रीम है, जो सद्गुरू है, जो गुरूओं का भी गुरू है उसको हम भोग लगाते हैं। किसी व्यक्ति की तरफ से लगता है वो हर गुरूवार को। तो आपको सेवाकेन्द्र पर जाना चाहिए। कोर्स कर लेना चाहिए और राजयोग सीख लेना चाहिए। ये सारी विधि वहाँ बहनें बता देंगी कि राजयोग कैसे करना है। वो हम भी बहुत चर्चा कर चुके हैं और वहाँ जाकर आपको सात दिन सीखना ही चाहिए। क्योंकि आपके कल्याण के लिए बहुत अच्छी चीज़ होगी। तो जब आप सेन्टर पर जाकर ये सब सीख लेंगी तो आपको क्या करना है कि एक तो रोज़ पानी ले लें एक लोटा और उसको दृष्टि देकर 21 बार संकल्प करें कि मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ। अपने घर में रोज़ एक बार छिडक़ने लगें। और संकल्प करें कि यहाँ जो भी आत्मा हो वो मुक्त हो जाये। उसको पुनर्जन्म मिले। दूसरी चीज़ है, उस आत्मा को सात दिन तक भोग खिला दिया जाये। जैसे हम शिवबाबा को भोग लगाते हैं, एक थाली अलग से भोग की रख ली जाये साथ में। और बाबा से रिक्वेस्ट की जाये कि इस आत्मा को भोग खिलाकर मुक्त कर दो। ये बहुत सुन्दर विधि होती है। क्योंकि आत्मायें पवित्र भोजन खाकर भी मुक्त हो जाती हैं। और तीसरी चीज़ है आप 21 दिन के लिए उस आत्मा की मुक्ति अर्थ एक योग भ_ी कर लें। एक घंटा रोज़ योग। एक स्वमान पहले याद कर लेंगे। मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ और मास्टर मुक्तिदाता हूँ। और इस योग अभ्यास से इस आत्मा की मुक्ति हो। ऐसा संकल्प करके वहीं पर कोई भी एक व्यक्ति जिसका अभ्यास बहुत सुन्दर हो, एक घंटा योग करें 21 दिन। तो ये निश्चित है वो आत्मा पुनर्जन्म ले लेगी। उसकी भी मुक्ति होगी, उसका भी कल्याण होगा। और ये घर उस परिस्थिति से मुक्त हो जायेगा।

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