परमात्मा एक ही है और वो शिव निराकार है। हम सभी भी उसी की संतान हैं। चाहे कोई भी धर्म, जाति, पाति, पंथ, देश, प्रांत के हो लेकिन सर्व सर्वोच्च सर्वशक्तिवान एक ही है। वो हमारा माता-पिता है। इसी संदर्भ में सर्वशास्त्रशिरोमणि भगवद् गीता में अर्जुन को श्रीकृष्ण के संवाद में बताया है कि श्रीकृष्ण सामने था फिर भी श्रीकृष्ण ने कहा कि तुम मुझे नहीं जानते, मुझे देख नहीं सकते तो वो कौन था? अगर श्रीकृष्ण सामने खड़े हैं और उसके बावजूद भी वो कह रहे हैं अर्जुन को कि क्रतुम मुझे नहीं देख सकतेञ्ज तो वो बोलने वाली शक्ति कौन थी? जबकि श्रीकृष्ण को तो देख ही रहे थे। फिर कैसे कह सकते कि तुम इन चर्म चक्षु से मुझे नहीं देख सकते, क्योंकि मैं परमधाम का वासी हूँ, जहाँ सूर्य, चंद्र, तारों की रोशनी नहीं पहुँच सकती, बहुत स्पष्ट तरीके से परमात्मा ने अपना परिचय दिया है।
लेकिन आज हम सभी गीता जयन्ती मनाते हैं, लेकिन गीता के उस रचनाकार, उस पिता के बारे में क्यों नहीं बात करते हैं। आज ये संगोष्ठी में हम इसी बात पर विचार करेंगे कि वो पिता का सत्य स्वरूप क्योंकि कृष्ण का शाब्दिक अर्थ लिया जाए तो आकृष्ट करने वाले। तो आकृष्ट करने वाली दो ही मूर्तियाँ थीं – एक तो श्रीकृष्ण की। जोकि शारीरिक रूप से साकार स्वरूप में थी और दूसरी जो निराकार स्वरूप में। जो हज़ारों सूर्य से तेजोमय स्वरूप देखा- अर्जुन ने कहा ”बस करो, ये तेज मैं सहन नहीं कर पा रहा हूँ”, तो वह निराकार तेजोमेय स्वरूप वो वास्तव में श्रीकृष्ण के माध्यम से गीता ज्ञान दे रहे थे और इसीलिए शिव के लिए भी यह महिमा गाई जाती है कि वह भी आकृष्ट करने वाली है। क्योंकि जहाँ चारों ओर अंधेरा हो, कहीं एक छोटी-सी दीपक की लाइट भी आ जाए, तो वह हरेक के ध्यान पर आकर्षित करती है, आकृष्ट करती ही है और इसीलिए शिव के लिए भी कहा जाता है- सत्यम, शिवम, सुन्दरम। अति सुन्दर स्वरूप अगर है तो शिव का ही है, तो साकार श्रीकृष्ण के माध्यम से बोलने वाली शक्ति वो निराकार स्वरूप जो उसमें अवतरित हुई थी, जो कहते हैं कि मैं प्रकृति का आधार लेकर, प्रकृति को अधीन करके योग माया से प्रगट होता हूँ। तो प्रगट होने वाले पिता- परमात्मा और गीता- माता है।
जो ज्ञान दिया, जिससे हमें अच्छे संस्कार प्राप्त होते हैं लेकिन जब माता-पिता का महत्व गुम हो जाता है तब शायद धर्म ग्लानि संसार के अंदर होने लगती है। जोकि आज के संसार का परिदृश्य देखें तो धर्म ग्लानि का ही दिखाई दे रहा है। ऐसे में गीता में किए गए वायदे अनुसार परमात्मा इस धरा पर आकर हमें शुद्ध पावन बनाकर सुख-शांति की राह दिखाकर फिर से नई दुनिया बनाने अर्थ धरा पर आते हैं। आप भी सोचिए और इस पर विचार करिए।
परमात्मा है एक शिव निराकार… न कि कोई साकार
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