‘अगर हम सौ फीसदी प्रयास कर रहे हैं तो दस फीसदी खुशी भी काफी है’ ये कहना है डैन हैरिस का। उसने अपनी माइण्डफुलनेस किताब मेंं लिखा है जो हमें बताती है कि हमें अपनी धार को गवाएं बिना अपने दिमाग में चलती चीज़ों को कैसे नियंत्रित कर सकते हैं और खुद को कैसे बेहतर बना सकते हैं।
हम जिस मनोस्थिति को लिए हुए चलते हैं, कार्य करते हैं उसको बरकरार रखना, उसमें एन्जॉय का ग्राफ सदा बना रहे। ये हम सबके सामने चैलेन्ज है। हम अनिश्चितता झेलने के लिए मानसिक रूप से रचे-बुने नहीं होते हैं। हमें इसके लिए खुद को तैयार करना होता है। इसमें मेडिटेशन बहुत मददगार होता है। अगर हम खुद को मेडिटेशन जैसी, माइण्डफुलनेश जैसी तकनीकों से नहीं सम्भालेंगे तो एंग्जायटी में डूब जायेंगे।
हमारे दिमाग में लगातार चलने वाली बातचीत के प्रति हममें से बहुत सारे लोग सचेत नहीं होते, लेकिन हमारी बहुत सारी समस्याओं की जड़ उसी में है। जब यह इंटरनल चैटिंग अनियंत्रित हो जाती है तो हमें तनाव से घेर लेती है। ध्यान का मतलब इसे नियंत्रित करके अपने मन पर काबू पाना है।
रिसर्च बताती है अगर आप माइण्डफुलनेश नहीं है तो खुशी आपके पास अधिक देर नहीं टिकेगी। बहाने न बनायें, जहाँ भी मौका मिले ध्यान करें। इसके लिए आपका कोलाहल से दूर किसी एकांत स्थल में होना ज़रूरी नहीं। ऑफिस की कुर्सी, होटल के कमरे, एयरपोर्ट के लाउंज- कहीं भी आप मेडिटेशन कर सकते हैं।
स्वामी विवेकानंद ने खुशी के लिए कहा है कि – भीतर से बाहर की ओर बढ़ें आपकी आत्मा से बढक़र कोई और शिक्षक नहीं। मतलब कि आप खुशी बाहर से ढूढऩे में लगे रहते हैं, क्षणिक खुशी मिल भी जाए परंतु स्थिर और स्थाई समय तक नहीं टिकेगी। हमें अपनी खुशी बनाए रखने के लिए मेडिटेशन एक पॉवरफुल टूल है। हमें उसे यूज़ करना है। यूज़ करने के लिए उसकी तकनीक का ज्ञान होना बहुत ज़रूरी है। तभी तो हम इसका इस्तेमाल सही ढंग से कर सकेंगे। मेडिटेशन वो तकनीक है जो हमारे मन की सकारात्मक ऊर्जा को सुदृढ़ करती है, व्यवस्थित करती है। बाह्य व भीतर से आने वाली नकारात्मक ऊर्जा को कम करती है। इसके लिए हमें अपनी चलती-दौड़ती जि़न्दगी के मध्य कुछ समय निकाल कर अपने आप से संवाद करना, बातें करना आवश्यक है। उसके लिए सबसे उत्तम समय प्रभात का समय अनुकूल है। इस समय नकारात्मक ऊर्जा टै्रफिक नहीं के बराबर होता है। ऐसे में अपने आप से संवाद करना बहुत सहज होगा। ज्य़ादा नहीं तो कम से कम 15 से 20 मिनट अपने आप से सुसंवाद अवश्य करें। जिससे आप जो हैं अपने वास्तविक ऊर्जा से ओत-प्रोत होंगे, पहचानेंगे और समझेंगे भी। और आपमें वो आत्मविश्वास पैदा होगा, वो जज़्बा पैदा होगा कि मैं नकारात्मक ऊर्जा से ज्य़ादा शक्तिशाली हूँ, मैं मुकाबला कर सकता हूँ और उसे हरा सकता हूँ। निगेटिविटी का प्रभाव मुझे प्रभावित नहीं कर सकता। क्योंकि मैं हूँ ही शक्तिशाली, खुशी मेरा स्वरूप है इसे कोई छीन नहीं सकता। परमात्मा से मुझे यह गिफ्ट के रूप में उपहार प्राप्त है। बस! करना इतना ही है कि रोज़ 20 मिनट अपने से रूबरू होने की आदत बनानी है। ऐसा करने में आप कामयाब हो जाते हैं। तब भला आपकी खुशी कौन छीन पाएगा! ये मन की एक्सरसाइज़ आपको चुस्त-दुरुस्त रखेगी। बाह्य दुश्मन आपकी खुशी को प्रभावित करने की कोशिश करेगा परंतु सफल नहीं होगा क्योंकि आपमें वो योग्यता, एबिलिटीज़ है जिससे वो उसे निष्प्रभावी कर देगी। मेडिटेशन का अर्थ कोई समझे तो मेडिटेशन एक मेढऱी से निकला हुआ इटालीक शब्द है। मेढऱी माना ही क्रटू हील योरसेल्फञ्ज। माना कि परमात्मा ने अपने आप को सशक्त करने की शक्ति प्रदान की है, उसे विधिपूर्वक अपनाने से हम शक्तिशाली हो जाते हैं। फिर हम भले कहीं पर भी हों, कैसी भी परिस्थिति में हों, कैसा भी वातावरण हो, चाहे दफ्तर में हों, चाहे कोई कर्म करते हो तब भी हमारा अटेन्शन उसी तरह होगा जैसे रस्सी पर चलने वाला नट। चाहे लोग चिल्ला रहे हों, वन्स मोर, वन्स मोर कर रहे हों फिर भी उनका ध्यान उससे हटता नहीं, बैलेन्स को बनाए रखता है। ठीक उसी तरह हम जो भी कर्म करेंगे, जो हमारे सामने बातें, कठिनाई आयेंगी तब भी हमारी खुशी बनी रहेगी और सक्सेस भी अवश्य होंगे। ठीक हैं ना! आप भी मेडिटेशन की तकनीक सीख जाएं और जीवन में स्थाई खुशी बनी रहे सदा ऐसी मंगल कामना।
आप अनिश्चितता झेलने के लिए मानसिक रूप से रचे-बुने नहीं होते
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