चामराजनगर,कर्नाटक। स्थानीय प्रजापित ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का 34वाँ वार्षिकोत्सव प्रकाश भवन में आयोजित किया गया। वार्षिकोत्सव का उद्घाटन करने के बाद बोलते हुए राजर्षि ब्रह्माकुमार प्राणेश जी ने कहा, “दुनिया में सबसे बड़ा धन ज्ञान है..! सबसे शक्तिशाली हथियार धैर्य है..! सबसे अच्छा बचाव सत्य है..! सबसे अच्छी दवा हँसी है..! आश्चर्य की बात यह है कि ये सभी चीजें दुनिया में बिना पैसे के आसानी से उपलब्ध हैं..! इसे प्राप्त करना ही जीवन का लक्ष्य होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि जिस प्रकार फूलों से भरा बगीचा सुंदर होता है, उसी प्रकार अच्छे विचारों से भरा मन भी उतना ही सुंदर होता है, उसी प्रकार सकारात्मक विचारों को विकसित करने के लिए समय निकालना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
संस्था की संयोजिका, मनोबल प्रशिक्षक, स्वामी विवेकानंद सद्भावना राज्य पुरस्कार विजेता राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी दानेश्वरी जी ने कहा कि हमारा महान संकल्प और व्यापक मानसिकता ही असली खजाना है। ये स्वाभाविक रूप से सभी खज़ानों को हमारे पास लाते हैं, और इसके लिए हमें सोचना, बोलना और कर्म करना चाहिए।
गुंडलुपेट सेवा केंद्र की संयोजिका, राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी वीणाजी ने कहा कि प्रेरणा किसी से भी मिल सकती है, लेकिन प्रयास हमेशा हमारा अपना होना चाहिए।
ओम शांति समाचार सेवा की बीके आराध्या ने वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी। पिछले एक वर्ष से नियमित रूप से राजयोग का अभ्यास कर रहे 12 नए छात्रों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में तहसीलदार गिरिजक्का कमिश्नर ओंकारप्पा, स्वास्थ्य विभाग से पुष्पा और गीता, न्यायिक विभाग से श्रीनिवास, शिक्षा विभाग से नागराज, सुंदरन्ना और प्रमिला ऊदगड्डी, शिक्षक श्रीनिवास, पुलिस विभाग से सिद्धया, जीवन बीमा निगम से पुट्टशेखर मूर्ति, यलंदूर ईश्वरीय विश्वविद्यालय से महालक्ष्मी, तिनारसीपुर से शांभवी और पद्मा सुंदरी उपस्थित थीं।





