मुख पृष्ठलेखखुशी के लिए शिवरात्रि के पावन पर्व पर लें पाँच संकल्प

खुशी के लिए शिवरात्रि के पावन पर्व पर लें पाँच संकल्प

सबकी सुबह स्वर्णिम सुबह हो तो कितना अच्छा हो। उठना एक बात, तरोताज़ा होकर उठना अलग बात। हम सबकी दिनचर्या आज कल थोड़ी उलझी हुई सी है। कारण मानसिक, शारीरिक थकान भी है, कुछ चिंता, दु:ख, अशांति भी है। ऐसे में स्वस्थ और सुदृढ़ जीवन की कल्पना तो नहीं कर सकते ना! परमात्मा के बच्चे होने के नाते उसके जैसा होना हमारी नियति होनी चाहिए। अगर वैसा ही हो जाए तो आप सोचो आपसे लोग प्रभावित भी होंगे और आपको फॉलो भी करेंगे। इस पावन शिवरात्रि पर्व पर अगर हम कुछ संकल्पों पर ध्यान दें तो अपने को उस लायक बना सकते हैं। ये हमारे लिए व्रत भी होगा, और यही उपवास भी।

  • सुबह की शुरुआत मेडिटेशन से- पुराने समय में सभी सुबह उठकर सबसे पहले एक ऐसा संकल्प करते थे कि आज का पूरा दिन मेरा खुशी वाला हो, सफल हो, सबसे सहयोग मिले, आदि-आदि। और उसी संकल्प में भगवान का ध्यान भी करते थे। चाहे उन्हें समझ आए न आए लेकिन ध्यान अवश्य करते थे। तो ऐसे क्यों न हम अपनी दिनचर्या फिर से शुरू करें।
  • सदा सभी के प्रति शुभ भावना रखेंगे- दुआएं कमाने का साधन है सभी को खुशी देना। सबके भले के बारे में सोचना और सबको आगे बढ़ते देखना, सभी के प्रति शुभ भावना रखना ये हमारी दिनचर्या का हिस्सा हो। ये भी हमें सफलता दिलाता है।
  • प्रकृति के प्रति जागरूक रहेंगे- वैसे तो अगर कोई हमें सबकुछ मुफ्त में देता है तो वो है हमारी प्रकृति। लेकिन हमारी भी सामाजिक जि़म्मेदारी है कि हम भी उनके प्रति जागरूक रहें। अगर प्रकृति शुद्ध है तो हम सबका शरीर भी स्वस्थ होगा और साथ-साथ बाहर का वातावरण भी शुद्ध रहेगा। तो कम से कम अच्छे भाव प्रकृति को दो। जल और ऊर्जा का संरक्षण करें।
  • केवल शुभ कर्म करेंगे- लोगों से पूछो तो हमेशा कहते हैं कि मैं तो कर्मयोगी हूँ। मेरे से तो बुरा काम होता नहीं है। लेकिन परमात्मा कहते हैं कि हम सभी को जो भी कर्म करना है वो केवल परमात्मा के अर्थ करेंगे तो वो कर्म शुभ कर्म माना जाएगा। बाकी जो भी हम कर्म करते हैं वो कर्म हमारे स्वार्थ के लिए तो हो सकता है लेकिन अगर परमात्मा का नाम शामिल हो जाए तो परमार्थ के लिए होता है।
  • सात्विक भोजन ही स्वीकार करेंगे- आहार, विचार को जन्म देता है। अगर उसमें सात्विक आहार हो तो सोने पर सुहागा। शाकाहारी होना आम बात है। लेकिन सात्विक होना खास बात है। सात्विक भेाजन में बिना प्याज, लहसून के परमात्मा की याद में बना भोजन ही हम स्वीकार करें तो हमारा मन अति शुद्ध होता चला जाएगा। और हमारी पवित्रता भी बढ़ेगी। इन्हीं पांच शुभ संकल्पों से अपनी दिनचर्या की शुरुआत करें और इसको लम्बेकाल तक अभ्यास में लाएं तो जीवन रचनात्मक बन जाएगा।
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