मुख पृष्ठलेखदिव्य गुणों का ख़ज़ाना - ‘गुण-ग्राहकता’  …… बी.के.रामसिंह, रेवाड़ी

दिव्य गुणों का ख़ज़ाना – ‘गुण-ग्राहकता’  …… बी.के.रामसिंह, रेवाड़ी

गुणी तो इस संसार में असंख्य मिल जाते हैं परंतु गुण-दृष्टा कोई बिरले ही मिलते हैं। जो व्यक्ति गुणों का पारखी है, वही गुणीजनों का सम्मान करता है अर्थात् गुणजन व्यक्ति ही हरेक गुणी व्यक्ति के गुणों का मनन-चिंतन करके, उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है।

सद्गुणों को जीवन में उतारकर ही व्यक्ति समाज का हिस्सा बनता है: मनुष्य के विशेष गुण संयम, प्रेम, मित्रता, शांति, संगठन, त्याग, कल्याण, शील, समृद्धि, सेवा, क्षमता, सुरक्षा, न्याय, नियम, सहकार्य, समता, कर्तव्य, अर्थ, अधिकार, नीति, बंधुत्व, बुद्धिमत्ता, आरोग्य आदि एक संतुलित और प्रगतिशील समाज के निर्माण में योगदान देते हैं। इसके अलावा मनुष्य का सर्वोत्तम गुण है – मानवता, जिसमें दया, करुणा, अहिंसा, प्रेम, विनम्रता, ईमानदारी, त्याग, निस्वार्थता जैसे सद्गुणों का समावेश होता है।

मानवीय गुणों से ही व्यक्ति की समाज में पहचान होती है: सदगुण सर्वमान्य प्रामाणिक मानवीय गुण होते हैं, जो व्यक्ति की गरिमा को बढ़ाते हैं और समाज में स्थान प्राप्त करने में मदद करते हैं। एक अच्छे व्यक्ति में ईमानदारी, विनम्रता, दृढ़-संकल्प, कर्मों व निर्णयों की जिम्मेदारी लेना, सत्य-निष्ठ और पारदर्शी होना आदि गुण शामिल है। मनुष्य के अच्छे गुणों में दयालुता, उदारता, सम्मान ईमानदारी, सहानुभूति, निष्ठा, दया, करुणा, सहयोग आदि शामिल है। इसके अलावा जरूरतमंदों की मदद करना, औरों की भलाई के कार्य में मददगार बनना, सर्व का सम्मान करना तथा अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लेना ही अच्छे गुण कहलाते हैं।

गुण-ग्राहकता की दृष्टि से ही आत्म-विकास संभव है:- जिस व्यक्ति में स्वयं में गुण नहीं है और गुणों को ग्रहण करने की आकांक्षा भी नहीं है, वह शरीर से सुंदर होते हुए भी बिना खुशबू के फूल समान है क्योंकि मनुष्य जीवन में प्रसन्नता के लिए गुणों की प्रशंसा करना और गुण-ग्राहकता बहुत जरूरी है। जहां गुण- ग्राहकता की दृष्टि है, वही आत्म- विकास संभव है और समस्त विकारों की मुक्ति भी होती है। एक सच्चा गुण-ग्राहक ही किसी के गुणों की असली कदर करना जानता है। गुण-ग्राहकता अर्थात् किसी के गुणों या अच्छी बातों को पहचानने, उसकी सराहना करने का भाव, क्षमता या स्वीकार करना है। व्यक्ति का सबसे बड़ा गुण उसके सुंदर चरित्र होते हैं।

एक अच्छे व्यक्ति में करुणा, सम्मान, ईमानदारी, दयालुता, आत्म-विश्वास जैसे गुण होने चाहिए। इसके अलावा उसे महत्वाकांक्षी, बुद्धिमान और कठिन परिस्थितियों में आशावादी व धैर्यवान भी होना चाहिए। सदा सत्य बोलना, सर्व के प्रति दया और समस्याओं का समय पर समाधान ढूंढ लेना, भावनात्मक गुणों में शामिल है। गुण-ग्राहकता हमें अपने अंदर के गुणों (जैसे दृढ़ता, एकाग्रता, सहनशीलता, नम्रता) को पहचानने और उन्हें बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है ताकि हम बेहतर बन सकें। यह दूसरों की बुराइयों या कर्मियों पर ध्यान देने की बजाय, उनके अच्छे गुणों को देखना सिखाती है, जिससे मन शांत और सकारात्मक रहता है।

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