रीवा,मध्य प्रदेश। भारतीय संस्कृति में दादी माँ केवल परिवार की बुज़ुर्ग नहीं, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने वाली जीवंत कड़ी होती हैं। इसी भावना को साकार करते हुए ब्रह्मा कुमारीज़ शांति धाम, झिरिया, रीवा में दिनांक 06 फरवरी 2026, शुक्रवार, दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक “दादी माँ सम्मान समारोह” का अत्यंत गरिमामय, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक आयोजन सम्पन्न हुआ। यह समारोह नारी शक्ति, ममता, त्याग, तपस्या और संस्कारों के पुनर्जागरण का सशक्त प्रतीक बना।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सम्मान करना नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देना था कि दादी माँ उम्र नहीं, अनुभव हैं; दादी माँ बोझ नहीं, वरदान हैं; और दादी माँ घर तक सीमित नहीं, संस्कृति की धुरी हैं।
कार्यक्रम की विशेष शोभा बनीं राजयोगिनी बीके निर्मला बहन जी (भोपाल जोन डायरेक्टर), जिनकी दिव्य उपस्थिति से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भावुक और ओतप्रोत हो गया। अपने प्रेरक वक्तव्य में उन्होंने कहा—
“दादी माँ ईश्वर की वह पालना हैं, जो घर-घर में संस्कार बोती हैं। उनके पास बैठना ही एक प्रकार का ध्यान है।”
उन्होंने अपने बचपन की स्मृतियाँ साझा करते हुए बताया कि कैसे दादी माँ का अनुशासन, स्नेह और मौन शक्ति जीवन को स्थिर और सशक्त बनाती है। उन्होंने दादी माँ के साथ बिताए पलों को ‘ईश्वरीय पालना का प्रत्यक्ष अनुभव’ बताया।
इस अवसर पर समाज के विविध क्षेत्रों से मातृशक्तियों और विशिष्ट जनों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी व्यापक स्वरूप प्रदान किया। इनमें सैनिक स्कूल के प्राचार्य कर्नल अविनाश रावल ,साधना वीरेंद्र गुप्ता, विभा पटेल, ममता नरेंद्र सिंह, डॉ. ज्योति सिंह, श्रीमती पूर्णिमा मिश्रा सुनीता पांडे, सरला सिंह, डॉ. कविता रैकवार, प्रभा निगम, एडवोकेट सूर्य प्रकाश मिश्रा, सपना मिश्रा, दीपक सिंह, ग्रेनेडियर अभिषेक यादव, पूर्व पार्षद शांति सुंदरानी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
ब्रह्मा कुमारीज़ परिवार की सशक्त सहभागिता
कार्यक्रम में रीवा प्रभारी बीके लता बहन, चाकघाट प्रभारी बीके अर्चना, इंद्रानगर प्रभारी बीके नम्रता, मऊगंज प्रभारी बीके पूर्णिमा, हनुमना प्रभारी बीके खुशबू, गोविन्दगढ़ प्रभारी बीके अन्नपूर्णा, बीके उर्मिला, बीके मीनाक्षी, बीके ज्योति, बीके कृतिका–रितिका (आईटीआई ट्रेनर) तथा प्राचार्य बीके दीपक तिवारी सहित अनेक बहनों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी ने एक स्वर में दादी माँ को समाज की मौन संरक्षक बताया।
वक्ताओं ने कहा कि—“दादी माँ वह शक्ति हैं जो बिना बोले सिखाती हैं, बिना दिखाए त्याग करती हैं और बिना अपेक्षा प्रेम लुटाती हैं।”
कार्यक्रम के दौरान मम्मा जगदंबा सरस्वती, दादी प्रकाशमणि, दादी गुलज़ार, दादी जानकी, दादी रतनमोहनी, दादी निर्मलशांता, दादी मनोहर इंद्रा एवं मनमोहिनी दीदी जैसी दिव्य विभूतियों का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। वक्ताओं ने बताया कि कैसे इन महान आत्माओं ने अपने व्यवहारिक जीवन से लाखों लोगों को शांति, संयम और सेवा का मार्ग दिखाया।
एडवोकेट सूर्य प्रकाश मिश्रा ने कहा— “‘बुजुर्ग’ शब्द नहीं, ‘दादी माँ’ शब्द ही भारतीय संस्कृति का सच्चा सम्मान है।”
वहीं शायर सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने अपनी भावपूर्ण शायरी से नारी शक्ति और मातृत्व की गरिमा को शब्दों में उतारा, जिससे वातावरण भावुक हो उठा।
कार्यक्रम का सधा हुआ, संयमित और प्रभावी संचालन बीके प्रकाश भाई जी द्वारा किया गया, जिससे पूरा आयोजन अत्यंत सुव्यवस्थित और प्रेरणादायी बना।
समापन अवसर पर विश्वप्रिय दीपक भाई ने सभी अतिथियों, दादी माँ स्वरूपाओं, मातृशक्तियों, ब्रह्मा कुमारीज़ की बहनों एवं सहयोगी भाइयों के प्रति हार्दिक आभार प्रकट किया।
इस अवसर पर सभी उपस्थितजनों ने नशा मुक्ति तथा दादी माँ सम्मान एवं संरक्षण की विधिवत सामूहिक प्रतिज्ञा ली।






