पूर्वी उ.प्र. के क्षेत्रीय कार्यालय से बी के विपिन ने रखे अपने विचार, बी के अजीत व बी के दिनेश भी रहे उपस्थित
काशी सुमेरू पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती जी महाराज के साथ आर एस एस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्रीमान् सुरेश सोनी जी, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्रीमान स्वांत रंजन जी,कुटुंब प्रबोधन राज्य प्रमुख सुखदेव जी और क्षेत्रीय प्रचारक रमेश जी का रहा सानिध्य
वाराणसी, उत्तर प्रदेश: आर एस एस के द्वारा शताब्दी वर्ष समारोह के अवसर पर देशभर में आयोजित की जा रही विभिन्न कार्यक्रमों की कड़ी में वाराणसी में सामाजिक सद्भाव बैठक आयोजित हुआ | काशी सुमेरू पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती जी महाराज के मुख्य आतिथ्य और आर एस एस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्रीमान् सुरेश सोनी जी की अध्यक्षता में आयोजित अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्रीमान स्वांत रंजन जी, कुटुंब प्रबोधन राज्य प्रमुख सुखदेव जी और क्षेत्रीय प्रचारक रमेश जी के सानिध्य में हुए कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज़ क्षेत्रीय कार्यालय सारनाथ के बी के विपिन भाई को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया |
काशी के सौ से अधिक मठ, पंथ, धार्मिक और सामाजिक संघ-संस्था के प्रमुख और मुख्य प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुए कार्यक्रम में आपसी सामाजिक सद्भाव, वैश्विक एकता, कुटुंब समरसता आदि विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार एवं संस्थागत कार्यों को संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत किया | ब्रह्माकुमारीज़ की और से सारनाथ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के राजयोगी बी के विपिन भाई ने आपसी सद्भाव के लिए आत्मिक बोध आत्मिक भाव का होना आवश्यक बताया | उन्होंने कहा की आत्मिक भाव ही देह, देह के धर्म, जाती, भाषा, सम्प्रदाय और अन्य अनेक भेदभाव को ख़तम कर आपसी एकता का भाव बढ़ा सकता है | आगे विपिन भाई ने कहा की हमें समाज में अहम् भाव को मिटाकर “हम” की भावना को बढाना होगा | उन्होंने आचार, विचार और व्यवहार के आपसी प्रभाव को स्पष्ट करते हुए कहा की हमें अपने आचार अर्थात आहार को भी सात्विक और श्रेष्ठ बनाना होगा तभी विचार और व्यवहार भी सात्विक और श्रेष्ठ होगा | ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा विश्व भर में चलाई जा रही एक आध्यात्मिक मुहीम – एक विश्व, एक विश्व पिता और एक विश्व परिवार की भावना को आपसी वैश्विक सद्भाव का आधार बताते हुए उन्होंने कहा की आज ब्रह्माकुमारीज़ परिवार विश्व के करीब 150 देशों में बिना किसी भेदभाव और बिना कोई वैर-विरोध के अनेक धर्म और सम्प्रदाय के बीच प्राचीन भारतीय सनातनी संस्कृति और सभ्यता को बढावा देकर लोगों को आपसी एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य कर रही है |
कार्यक्रम में काशी सुमेरु पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती जी महाराज, आर एस एस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्रीमान सुरेश सोनी जी के साथ अनेक संत-महात्माओं और बौद्ध, जैन, सिख, कबीरपंथ, संत रविदास पंथ आदि के प्रमुख प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए | उक्त अवसर पर सारनाथ क्षेत्रीय कार्यालय से बी के अजीत भाई, रमेश सिंह जी के साथ नाटी इमली सेवाकेंद्र से बी के दिनेश भाई भी उपस्थित रहे |











