जहाँ दृढ़ता है, वहाँ सफलता है। दृढ़ता बहुत आवश्यक है। जीवन में कुछ भी हासिल करना हो तो सबसे पहले दृढ़ संकल्प अपने मन के अन्दर करने की आवश्यकता है। जितना हमारा लक्ष्य स्पष्ट होता है, मन के अन्दर दृढ़ संकल्प होता है तो पुरुषार्थ उसी दिशा के अन्दर बढऩे लगता है और तब व्यक्ति कोई भी चीज़ को, असम्भव से असम्भव बात को भी सम्भव कर देता है। लेकिन आज की दुनिया ऐसी है कि जहाँ आपने कोई बात को प्राप्त करने का दृढ़ संकल्प किया तो कई लोग आपके मनोबल को हिलाने का प्रयत्न करेंगे, अरे छोड़ो! ये तो बहुत ऊंची बात है। ये प्राप्त करना तो असम्भव हो जाता है। तुम पहले अपना लक्ष्य नीचे का रखो। नीचे का रखेंगे तो पहले उसको प्राप्त करो, फिर उसको सीढ़ी बनाकर आगे बढ़ो।
तो पहली बात ये है कि जैसे ही दृढ़ संकल्प कोई बात का करते हैं तो सबसे पहले जो आवाज़ उठती है कि प्रोत्साहित करने के बजाए, उमंग-उत्साह को बढ़ाने के बजाए लोग मनोबल को तोडऩे का या हिलाने का प्रयत्न करते हैं और उस समय एक बहुत बड़ी कसौटी होती है व्यक्ति के जीवन में। क्या वो उनका सुने या अपने लक्ष्य पर पक्का रहे? क्योंकि अगर लक्ष्य पर पक्का रहा, दृढ़ संकल्प करके पुरुषार्थ आरम्भ किया तो एक न एक दिन उस लक्ष्य को प्राप्त करना ही है। क्योंकि कहा गया है दृढ़ता में सफलता है। और जब प्राप्त कर लेगा तो ज़रूर है सुख-शांति को अनुभव करेगा जीवन के अन्दर। लेकिन उस सुख-शांति तक पहुंचने के लिए कई लोग रास्ते में अनेक प्रकार की बातें सुनाते हुए हमारा हौसला कम करने का प्रयत्न करेंगे, ये नहीं हो सकेगा, ये असम्भव है, छोड़ दो। कुछ लोग ऐसे भी मिलेंगे कि अरे करो-करो हम तेरे साथ हैं। कुछ भी होगा हम आपके साथ खड़े हैं और अगर कोई आवश्यकता पड़ी तो मदद भी कर देंगे। लेकिन ये कहने वाले बहुत कम लोग होते हैं। जैसे ही उस यात्रा पर चले हिम्मत करके, तो कभी-कभी ये भी हो सकता है कि जिन्होंने आश्वासन दिया था और सोचा था कि ये कुछ करने वाला नहीं है हमें कहने में क्या जाता है, और जब वो करना आरम्भ कर देता है तो उस समय कहाँ गायब हो जाते हैं पता ही नहीं चलता है।
इसीलिए जीवन की इस राह के ऊपर आगे बढऩे के लिए आवश्यकता है कि हम पहले से ही अपने मन के अन्दर इस बात को अच्छी तरह से ठान लें कि आगे का रास्ता कहीं न कहीं मुझे अकेले ही तय करके आगे बढऩा है। जो इंसान दूसरों पर आधारित रहता है वो कभी सफल नहीं होता। क्योंकि आधार निकला तो वो भी जीवन में से हिम्मत हार के बैठ जाएगा। इसीलिए अगर जीवन में आगे बढऩा है तो किसी को भी आधार मत बनाइए। व्यक्तियों को आधार मत बनाइए। आधार ज़रूरी है लेकिन कौन-सा आधार अपनाना है, मजबूत आधार चाहिए तब उस मुकाम पर, उस मंजि़ल पर पहुंचना आसान है। तो जीवन में भी कमज़ोरी का आधार कभी नहीं लो। कमज़ोरी माना कभी-कभी आलस्य, अलबेलापन, गलत संग, ये गलत आधार अगर लिया तो ये कमज़ोर आधार एक न एक दिन आपको तोड़ेगा। और तोड़ेगा तो नीचे गिरेंगे और चोट बहुत गहरी लगेगी। इसीलिए मजबूत आधार हमें प्राप्त होता है, वैल्यूज़ से, मूल्यों से, जीवन के कुछ सिद्धान्तों से, ये हमें मजबूत आधार देंगे। तो दूसरों का आधार लेने के बजाए हम अपनी ही जीवन के कुछ सिद्धान्त ऐसे बना दें। जीवन के अन्दर कुछ मूल्य ऐसे अपनाएं, जो मूल्य हमें अन्दर से ताकत देगा, शक्ति प्रदान करेगा, और उस शक्ति के आधार से मंजि़ल तक पहुंचना आसान हो जाएगा। तभी मैंने कहा कि व्यक्तियों के आधार पर निर्भर नहीं रहना। आज हैं कल नहीं भी हैं। कल वो आधार निकल भी जाये लेकिन अपने ही सिद्धान्तों का आधार होगा, अपने ही मूल्यों का आधार होगा, अपने ही मजबूत हौसले का अधार होगा तो वो कितना भी कोई तोडऩे का प्रयत्न करे जितना भी वो हिलाने का प्रयत्न करता है उतना और मजबूती करता जाता है। और उस मंजि़ल को हासिल करके ही रहते हैं। असम्भव को सम्भव करके दिखा देंगे। तो मजबूत वैल्यूज़ का आधार लो। तब जीवन के अन्दर सफलता कोई बड़ी बात नहीं है।
राजयोगिनी ब्र.कु. ऊषा दीदी, वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका


