सृष्टि के परिवर्तन काल में, जब पुरानी दुनिया से नई दुनिया की ओर परिवर्तन होता है, तब केवल श्रेष्ठ शक्तियाँ ही नहीं, बल्कि विरोधी शक्तियाँ भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं। इन्हीं विरोधी शक्तियों को आध्यात्मिक भाषा में ”एडवर्स पार्टी” कहा जाता है। एडवर्स पार्टी का अर्थ है- वह शक्ति, प्रवृत्ति या समूह जो सत्य, शान्ति, पवित्रता और एकता के मार्ग में बाधा उत्पन्न करता है। देखने में यह नकारात्मक लग सकती है, परन्तु वास्तव में सृष्टि-नाटक में इसकी भी एक निश्चित और आवश्यक भूमिका है।
एडवर्स पार्टी का मुख्य कार्य आत्माओं को उनके वास्तविक स्वरूप से भटकाना है। यह माया, अहंकार, काम, क्रोध, लोभ, मोह और आसक्ति जैसे विकारों के माध्यम से मनुष्य को देह-अभिमान में ले आती है। इसके प्रभाव से मनुष्य स्वार्थी बनता है, संघर्ष बढ़ते हैं, हिंसा और अशान्ति का वातावरण बनता है। यही कारण है कि वर्तमान कलियुग में दु:ख, अशान्ति और अव्यवस्था दिखाई देती है। एडवर्स पार्टी आत्माओं की परीक्षा लेती है- क्या वे परिस्थिति में फँसती है या साक्षी बनकर पार होती हैं।
आज के समय में एडवर्स पार्टी क्या कर रही है? वह अपने चरम पर है। विज्ञान की उन्नति के साथ-साथ विकारों की भी तीव्रता बढ़ी है। भोग-विलास, भौतिक सुख, सत्ता और संग्रह की होड़ ने मानव को आन्तरिक रूप से कमज़ोर बना दिया है। मीडिया, विचारधाराएँ और वातावरण भी कई बार मनुष्य को सत्य से दूर ले जाने का कार्य करते हैं। यह सब एडवर्स पार्टी की रणनीति है- आत्माओं को उनकी शक्ति भूलाकर निर्बल बनाना।
परन्तु सृष्टि के नियम अनुसार, जब अंधकार चरम पर पहुँचता है, तभी प्रकाश का प्राकट्य होता है। नई दुनिया अर्थात् सतयुग की स्थापना के लिए एडवर्स पार्टी का भी एक अप्रत्यक्ष रोल है। विरोध के बिना विजय का मूल्य समझ में नहीं आता। एडवर्स पार्टी आत्माओं को मजबूत बनने का अवसर देती है। जब आत्मा विकारों का सामना कर विजयी बनती है, तभी वह योग्य बनती है नई दुनिया की नागरिक बनने के लिए।
नई दुनिया की स्थापना कैसे होती है? यह तलवार या हिंसा से नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन से होती है। परमात्मा द्वारा दी गई ज्ञान-शक्ति से आत्माएँ अपनी पहचान- ”मैं आत्मा हूँ”- में स्थित होती हैं। जैसे-जैसे आत्माएँ देह-अभिमान छोड़ आत्म-अभिमानी बनती हैं, वैसे-वैसे एडवर्स पार्टी स्वत: निष्क्रिय होती जाती है। योग, पवित्रता, सकारात्मक संकल्प और श्रेष्ठ कर्मों के द्वारा आत्मा अपनी शक्ति बढ़ाती है और माया पर विजय प्राप्त करती है। इस प्रकार एडवर्स पार्टी न तो सदा के लिए शत्रु है और न ही स्वतंत्र सत्ता। वह सृष्टि-चक्र में एक अस्थायी भूमिका निभाती है। उसका उद्देश्य आत्माओं को गिराना नहीं, बल्कि उन्हें परखना है। जो आत्माएँ इस परीक्षा में सफल होती हैं, वही नई दुनिया की नींव बनती हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि एडवर्स पार्टी भी अप्रत्यक्ष रूप से नई दुनिया की स्थापना की प्रक्रिया का एक अंग है- क्योंकि बिना संघर्ष के श्रेष्ठता का उदय संभव नहीं।
अंतत: एडवर्स पार्टी हमें यह सिखाती है कि बाहर की परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि हमारी आंतरिक स्थिति ही हमारे भविष्य का निर्माण करती है। जो आत्मा स्वयं पर विजय पाती है, वही विश्व-विजेता बनती है।



