मुख पृष्ठदादी जीदादी जानकी जीहमें कभी भी अन्दर से रेस्टलेस नहीं होना है

हमें कभी भी अन्दर से रेस्टलेस नहीं होना है

अभी हमें अन्दर से डीप पुरुषार्थ करके अपने संकल्पों में शांति लानी है, प्रेम सम्पन्न बनना है। ज्ञान कहता है अन्दर की खुशी हो, शक्ति हो। अपने ही संकल्पों की गहराई में जाओ तो युद्ध का संस्कार समाप्त हो जायेगा। कोई कारण भी बने तो भी विजयी बनो, योद्धे नहीं बनो। अब छोटी-छोटी बातों को बड़ा बनाकर लड़ते-झगड़ते नहीं रहो। संकल्प को शुद्ध और शांत रखने की आदत डालो।
ब्राह्मण हूँ, स्वदर्शन चक्रधारी हूँ, तो संकल्प धीरे-धीरे चलेंगे, ज़रूरी काम के संकल्प आयेंगे। नहीं तो शांत रहेंगे। अन्दर के पुरुषार्थ में शांति रहे तो संकल्पों को नियंत्रित रख सकते हैं। बोलते, करते सबको अच्छा-अच्छा कहके अन्दर शांत रहना है। अन्दर की शांति हमारे रूट में(जड़ों में) चली जाये, मेरे में ज़रा भी अशांति न हो।
संकल्पों में अगर शांति, शुद्धि होगी तो वो वायब्रेशन पहुंचेंगे। कलह वाले नहीं होंगे, मिलनसार होंगे। मुस्कुराहट भी ऐसी होगी, जो खुश हो जायेंगे। अगर अन्दर चला गया तो फल अच्छा निकलेगा, जिसको कहा जाता है सफलता। संकल्प में, वाणी में, चाहे कर्म में, सम्बन्ध में सफलता होगी। ऐसे अन्दर ही अन्दर अपने संकल्प की उत्पत्ति शांति वाली हो, स्नेह वाली हो। कुछ काम वाले संकल्प हो, अच्छी वृत्ति से अच्छा वायब्रेशन फैलायें।
बाबा का एक बोल सदा याद रहता है सी फादर, फॉलो फादर। यह आँखें बाबा को देखने के लिए हैं। अगर आँखें इधर-उधर होंगी तो फॉलो नहीं कर सकेंगे। मुझे अन्दर लगन है, इच्छा है सिर्फ फॉलो फादर करने की। योग शिवबाबा से लगाना है लेकिन फॉलो ब्रह्मा बाबा को करना है। यह बाबा कैसे कर्म कर रहा है, स्थापना का इतना बड़ा कार्य है, फिर भी उन्हें कोई जवाबदारियां थकाती नहीं हैं। हमारी जि़म्मेवारी है सिर्फ अपनी स्थिति अच्छी रखने की।
हर बात में बाबा को देखो, बाबा पत्र लिख रहा है तो भी कहेगा बाबा लिख रहा है। बाबा भण्डारे में जायेगा तो भी कहेगा बाबा के भण्डारे में जा रहा हूँ। तो सदा ही बाबा को याद रहा कि यह शिवबाबा का यज्ञ है। कभी मेरा नहीं कहा। मिस्टेक तब होती है जब मेरा कहते हैं। मेरापन भारी करता है। मैं पन का अभिमान थका देता है। अभी हमें कभी भी अन्दर से रेस्टलेस नहीं होना है।
बाबा बच्चों की कोई भी कमी न सुनता है, न देखता है, सिर्फ अपना काम करता है। हम सुनते देखते हैं तो भविष्य थोड़े ही याद रहेगा! बाबा बच्चों को भी याद दिलाता है बच्चे विनाश के पहले सतयुगी राजधानी बनानी है। यह पुरानी दुनिया खत्म हुई पड़ी है, सिर्फ आप बच्चे तैयार हो जाओ।

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