हैदराबाद,तेलंगाना। ब्रह्माकुमारीज़ के कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग द्वारा “प्रभावी नेतृत्व के माध्यम से ग्रामीण विकास” विषय पर 500 सरपंचों के लिए प्रशिक्षण-सह-सेमिनार का आयोजन ग्लोबल पीस ऑडिटोरियम, एकेडमी फॉर ए बेटर वर्ल्ड, ब्रह्माकुमारीज़ – शांतिसरोवर, हैदराबाद में किया गया।कार्यक्रम में ग्रामीण विकास, राजयोग, आंतरिक नेतृत्व, तनाव प्रबंधन तथा ग्राम विकास के सफल अनुभवों पर विभिन्न सत्र आयोजित किए गए।
कार्यक्रम का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों में नेतृत्व क्षमता, सकारात्मक सोच, जनभागीदारी, सुशासन तथा गांवों के समग्र एवं सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।डॉ. अनसूया सीतक्का, माननीय मंत्री, PR&RD विभाग, तेलंगाना ने कहा कि गांवों का विकास तभी तेज गति से संभव है, जब स्थानीय नेतृत्व जनता की आवश्यकताओं को समझकर सरकार के साथ मिलकर प्रभावी ढंग से कार्य करे।
उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ के इस पवित्र प्रांगण में सरपंचों को मेडिटेशन के माध्यम से तनाव कम करने और आंतरिक शांति प्राप्त करने का प्रयास करने का संदेश दिया।राजयोगिनी बी.के. संतोष दीदी, निदेशक, ब्रह्माकुमारीज़, सेंट पीटर्सबर्ग, रूस ने अपने मुख्य संबोधन में कहा कि प्रभावी नेतृत्व की शुरुआत आत्म-परिवर्तन से होती है और सकारात्मक नेतृत्व ही समाज में स्थायी परिवर्तन ला सकता है।राजयोगिनी बी.के. कुलदीप दीदी, निदेशक, शांतिसरोवर, ब्रह्माकुमारीज़, हैदराबाद ने सरपंचों को आंतरिक शक्ति, शांति और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ समाज एवं गांव की सेवा करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आंतरिक सशक्तीकरण से नेतृत्व को अधिक प्रभावी और जनकल्याणकारी बनाया जा सकता है।बी.के. सुमंत, मुख्यालय समन्वयक, कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग, माउंट आबू ने एग्रीकल्चर एवं रूरल विंग की गतिविधियों, शाश्वत योगिक कृषि तथा मल्टीलेयर फार्मिंग मॉडल के माध्यम से किसानों और गांवों की समृद्धि पर प्रकाश डाला। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में इनकी भूमिका को रेखांकित करते हुए सरपंचों को सेवा-भाव से कार्य करने के लिए प्रेरित किया।श्रीमती डी. दिव्या, आईएएस, कमिश्नर, PR&RD विभाग ने ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सरपंचों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए जनभागीदारी और जवाबदेही को मजबूत करने पर जोर दिया।
बी.के. अरुंधति, तेलंगाना कोऑर्डिनेटर, कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग, हैदराबाद ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए कहा कि सशक्त नेतृत्व और सकारात्मक सोच के माध्यम से गांवों में स्थायी एवं समग्र विकास लाया जा सकता है। उन्होंने “Leading from Within” (अंतरात्मा से नेतृत्व) विषय पर प्रशिक्षण दिया तथा प्रभावी नेतृत्व के लिए आत्म-जागरूकता, सकारात्मक सोच और आंतरिक शक्तियों को विकसित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।श्याम प्रताप सिंह, सरपंच, जहोटा, राजस्थान ने अपने गांव के विकास का अनुभव साझा करते हुए बताया कि दृढ़ इच्छाशक्ति, जनसहयोग और प्रभावी नेतृत्व से गांव में सकारात्मक बदलाव संभव है। उन्होंने ग्राम विकास के अपने अनुभवों और किए गए कार्यों की जानकारी भी साझा की।बी.के. श्रीलता, राजयोग शिक्षिका, हैदराबाद ने गतिविधि-आधारित सत्र “Stress Busters” के माध्यम से तनाव प्रबंधन और जीवन में संतुलन बनाए रखने के व्यावहारिक उपाय बताए।
बी.के. मनीषा, राजयोग शिक्षिका, करीमनगर ने “आंतरिक स्व को सशक्त बनाने के लिए ध्यान” विषय पर ध्यान सत्र कराया। उन्होंने राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से आत्मिक शक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का अभ्यास कराया। राजयोग अनुभूति के माध्यम से सरपंचों को एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव भी कराया गया।बी.के. विष्णुप्रिया, गायिका एवं राजयोग शिक्षिका, हैदराबाद ने थीम सॉन्ग के माध्यम से ग्रामीण विकास, एकता और सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणादायी भावना को अभिव्यक्त किया।
विभिन्न सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को नेतृत्व, आत्म-विकास और सकारात्मक जीवनशैली से जोड़ा गया।









