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खूबसूरत हस्ती और ईश्वरीय मौलाई मस्ती वाले थें भ्राता राजयोगी निर्वैर जी ….

यह संसार खूबसूरत है तो रैन बसेरा भी है। कभी-कभी जीवन के कुछ ऐसे पड़ाव जिंदगी में आते है तब वैराग्य मन में उत्पन्न होता है। लेकिन कोई ऐसे महान राजयोगी शक्श जब अपने खेमे से चले जाते है ईश्वर की गोद में, तब भी कुछ ऐसा होता है जो मनुष्य के मन में वैराग्य की जगह प्रेरणा का राग का सागर भर जाता है। जी हाँ हम बात कर रहे है ऐसे खूबसूरत हस्ती ईश्वरीय मौलाई मस्ती वाले महान विभूति राजयोगी बी के निर्वैर भाई जी के विषय में, जिन्होंने दो साल पहले अपने नश्वर देह को त्याग कर दिया लेकिन, उनके हर कर्म ने लोगों के दिलों-दिमाग में जीने की चाहत छोड़ गया।

उनकी हर अदा सादगी लेकिन राजाओं जैसी थी, मानो इनके हर संस्कार में सादगी भरी राजाई और फरिस्ते की चाल थी। हमें भी कई बार उन्हें मिलने का मौका मिला हम धन्य हो गए। ऐसा लगता है जीवन में जो कुछ पाना था पा लिया। उनके व्यवहार से नम्रता, सहयोग की भावना, दूर दर्शिता और अपनापन महसूस होता था। वे शांति प्रिय थे। कार्य व्यवहार में कार्य करते हुए भी भाई साहब, शांति की अनुभूति में खोये रहते थे। सबकी सुनते थे और सबको खुश कर देते थे। उनका हृदय विशाल था, सहयोग की भावना से पूर्ण थे। निमित्त भी थे तो निर्माण भी थे। एकता के सूत्र में बाँधने की कला से भरपूर थे। इसलिए छोटे बड़े सबको सम्मान देते थे। भाई साहब छोटे बच्चों को भी आप आप कह के बात करते थे। मैंने कई बार महसूस किया है कि भाई साहब प्रश्नो का सटीक जवाब भी देते थे लेकिन उनकी दूरदर्शिता में कहीं न कहीं आत्मिक शांति,प्रेम सहज रूप से दिखलाई देती थी। विदेशी भाई बहनों के लिए भी गहन शांति के विषय में ही अक्सर करके अपना आशीर्वचन देते थे। कुछ खोया सा लगता है लेकिन कुछ देकर गये इसका सुकून देता है। भाई साहब की इस दूसरी पुण्यतिथि पर कोटि कोटि श्रद्धा सुमन अर्पित करते है। – बी. के. दिलीप राजकुले, ओम शांति मीडिया।

विभिन्न महानुभावों के संस्मरण और श्रद्धांजलियाँ

निर्वैर भाई का अतुलनीय सहयोग आदरणीय है : दिवंगत राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी जी

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी रतनमोहिनी जी ने महाप्रयाणी निर्वैर जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने ईश्वरीय विश्व विद्यालय में अमूल्य सहयोग दिया है। उनका सहयोग आदरणीय है तथा प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय और सारा परिवार निर्वैर भाईजी के स्नेह और सहयोग को सादर मन से याद करेगा।

इतना बड़ा कारोबार संभालते हुए भी निर्वैर भाई जी सदा रिलैक्स रहते थे : राजयोगिनी बी.के. जयंती दीदी

ब्रह्माकुमारीज़ की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी जयंती दीदी जी: निर्वैर भाई साहब के मार्गदर्शन में सीखने का मौका मिला। उन्हें बचपन से ही जानती थी। आप एक मूक भाई-बहन थे पूरी निष्ठा और आत्मीयता के साथ मिलते थे। सभी के लिए मम्मा देते थे, उनकी बातें सुनते और सकारात्मक प्रेरणाएं देते थे। आपका जीवन स्थिरता से भरपूर रहा। आप ब्रह्माकुमारीज़ परिवार की शोभा थे। इतना बड़ा कारोबार संभालते हुए भी आप सदा रिलैक्स रहते थे।

निर्वैर भाई ने अपने दिव्य जीवन से सभी के लिए प्रेरणा दी : दिवंगत बी.के. बृजमोहन भाई

पूर्व महासचिव बी.के. बृजमोहन भाई: निर्वैर भाईजी का जीवन रॉयल्टी की मिसाल था। उन्होंने अपने दिव्य जीवन से सभी के लिए प्रेरणा दी। पूरी उम्र लोगों की भलाई के लिए समर्पित कर दी।

निर्वैर भाईजी की शिक्षाएं और आदर्श जीवन सदा याद रखा जाएगा : बी.के. मुन्नी दीदी

ब्रह्माकुमारीज़ की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बी.के. मुन्नी दीदी: ब्रह्माकुमारीज़ का मैनेजमेंट संभालते में निर्वैर भाईजी से हमेशा साथ मिला। समय प्रति समय मार्गदर्शन मिला। आपकी सलाह से कई बड़ी-बड़ी सेवाओं को मूर्त रूप दिया गया। आपकी शिक्षाएं और आदर्श जीवन सदा याद रखा जाएगा।

भ्राता निर्वैर जी का महान जीवन हमेशा प्रेरणाभूत रहेगा : दीदी शशिप्रभा जी

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की संयुक्त प्रशासिका दीदी शशिप्रभा जी ने अपने ३० वर्षों की यात्रा में भ्राता निर्वैर जी के साथ को स्मृति में लाते हुए कहा भ्राता निर्वैर जी ने हमारे हर कार्य को आध्यात्मिक शक्ति से मज़बूत कैसे किया जाता है इसे सीखा और भ्राता निर्वैर जी का महान जीवन सब ही सब के लिए प्रेरणाभूत रहेगा।

निर्वैर भाईजी के पास से समाधान मिल जाता था : बी.के. सुदेश दीदी

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बी.के. सुदेश दीदी ने कहा कि निर्वैर भाईजी के सामने कोई कैसी भी समस्या लेकर जाए तो उसे समाधान मिल जाता था।

निर्वैर भाई की प्रेरणा से ही ये जादुई ग्लोबल हॉस्पिटल बना : बी.के. डॉ. अशोक मेहता

ब्रह्माकुमारीज़ मेडिकल विंग के अध्यक्ष मुंबई के वरिष्ठ डॉक्टर अशोक मेहता: मैंने जब निर्वैर भाई से कहा कि संस्थान में मेडिकल सुविधा कुछ होनी चाहिए तो उन्होंने कहा था कि आप संभालो तो शुरू कर देंगे। इस तरह उन्होंने हॉस्पिटल की शुरुआत की। आपकी प्रेरणा से ही ये अद्भुत ग्लोबल हॉस्पिटल बनाया गया।

गलती करनेवालों के प्रति निर्वैर भाई का दृष्टिकोण सकारात्मक रहता था : बी.के. डॉ. प्रताप

ग्लोबल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. प्रताप मिड्ढा: वर्ष १९७७ में पहली बार निर्वैर भाईजी से मुलाकात हुई। उनमें दयालुता का गुण भरा हुआ था। वह हर कार्य सब्र तरीके से करते थे। उनका हर चीज़ को लेकर दृष्टिकोण बहुत सकारात्मक रहता था। उनके जीवन में कई बातें सीखी हैं। जो गलती करता था उसके प्रति भी उनका दृष्टिकोण सकारात्मक रहता था। मेरे लिए वह हमेशा अव्वल दर्जे के रोल मॉडल रहेंगे।

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