प्रश्न : मेरे पति व मेरी सास मुझे शुरु से ही पसंद नहीं करते थे। वे मुझसे बात-बात पर झगड़ा किया करते। उन्होंने अब मुझे घर से निकाल दिया है। कुछ समय से मैं अपने भाई के घर में रह रही हूँ। कुछ लोग मुझे वापस ससुराल चले जाने की सलाह दे रहे हैं और मुझे भी लग रहा है कि मुझे अपने ससुराल चले जाना चाहिए। कृपया मुझे बताएं कि मुझे क्या करना चाहिए?
उत्तर : इससे पहले कि आप निर्णय लें तो नज़दीक के किसी ब्रह्माकुमारी आश्रम पर जाकर ईश्वरीय ज्ञान लें। राजयोग मेडिटेशन करें। अपने बारे में बहुत कुछ जानें। कर्मों की गुह्य गति के बारे में जानें तो आपका चित्त शांत हो। क्योंकि आपके मन में पति और सास के लिए डेफिनेटली निगेटिव फीलिंग्स भर गई होंगी कि उन्होंने शुरु से ही आपके साथ दुव्र्यवहार किया। तो पहले तो आप अपने चित्त को शांत करें। और उन दोनों को क्षमा कर दें। बहुत अच्छा होगा ताकि जो आपके मन में कटुता भर गई है; और आपके मन की कटुता सबसे पहले आपको कड़वा बना रही है। आपको ज़हरीला कर रही है, आपकी शांति को भंग कर रही है, आपके जीवन में जो बहुत सुख होना चाहिए था पारिवारिक, उसको नष्ट कर रही है। वो समाप्त हो जाये। और उन दोनों के प्रति क्षमाभाव, दोनों के प्रति शुभ भावना ले आयें।
जब आप ज्ञान-योग सीखेंगी तो आपको एक चीज़ सिखाई जायेगी कि ये सभी आत्मायें हैं और ये संसार एक विशाल नाटक है। सभी आत्मायें इसमें देह रूपी वस्त्र पहन कर अपना पार्ट प्ले कर रहे हैं। तो पति और सास भी दोनों आत्मायें हैं और अपना-अपना पार्ट प्ले कर रही हैं। तो इस दृष्टि से आपके मन की कटुता समाप्त होगी। और मेरी तो राय ये है कि भाई के पास तो आप कब तक रहेंगी। किसी नारी को अपने ही घर में रहना शोभा देता है। समस्यायें तो हैं लेकिन अपनी शुभ भावनाओं से आप इनका हल कर सकती हैं। आपको वहीं जाना चाहिए। और महत्वपूर्ण बात ये है कि उन्हें बदलने के बजाय अपने को बदलना चाहिए क्योंकि जब मनुष्य के साथ ऐसा व्यवहार होता है तो मनुष्य अपने को नहीं देख पाता। समझते हैं कि ये दोनों मेरे शत्रु हैं, ये दोनों मेरे को कष्ट पहुंचा रहे हैं, मेरी जीवन के साथ खेल रहे हैं। मुझे बिल्कुल नष्ट कर देना चाहते हैं। तो आपकी अपनी निगेटिव भावनायें उनको पहुंचती हैं और उनका गलत व्यवहार भी बढऩे लगता है। मैं आपको कहूंगा कि आप अपने को चेंज करें। अगर आपका कोई संस्कार ऐसा हो जो दूसरों को बुरा लगता हो, आपका बात करने का तरीका ऐसा हो जो दूसरों को भाता न हो, अगर ऐसा है तो उसको भी आप ठीक करें।
स्पिरिचुअलिटी का मैं एक अच्छा सिद्धान्त आपके लिए सुना देता हूँ। संसार में लोग कहते हैं हमें कोई भी प्यार नहीं करता। कई जगह ये समस्यायें ढूंढनी चाहिए कि कोई मुझे प्यार क्यों नहीं करता! प्यार तो हर मनुष्य के पास है, प्यार वो हर मनुष्य को देना भी चाहता है, पर यदि दूसरे लोग मुझे प्यार नहीं दे रहे तो कहीं न कहीं मेरी भी कुछ गड़बड़ है। इसका मैं एक बहुत सुन्दर समाधान कहूँगा। जो आत्मा स्वयं को देह से न्यारा अनुभव करती है उसे सबका प्यार अवश्य मिलता है। बहुत सुन्दर ये स्पिरिचुअल फिलॉसफी है। इसलिए आपके लिए राय है कि आप राजयोग मेडिटेशन सीख कर मैं आत्मा हूँ ये देह अलग है। मैं आत्मा हूँ, मैं तो पवित्र आत्मा हूँ, बिल्कुल शुद्ध हूँ। शक्तिशाली हूँ। मैं भी इस देह रूपी चोले को धारण करके इस नाटक में पार्ट प्ले कर रही हूँ। बिल्कुल मैं अलग, ये देह अलग। कुछ दिन आप ये अभ्यास करेंगी तो आपको अनुभव होगा जो लोग आपसे घृणा करते थे वो लोग आपसे प्यार करने लगेंगे, लेकिन आप मेडिटेशन की प्रैक्टिस करेंगी तो उनका विचार भी बदल जायेगा और आपको सम्मान सहित स्वीकार करेंगे।
प्रश्न : मैं जीन्द से शारदा कश्यप हूँ। मेरा बेटा इंजीनियरिंग का विद्यार्थी है। उसका दो पेपर में बैक आ गया है, अब वह घर में सारा दिन उदास बैठा रहता है। बहुत परेशान है कि मैं अपना पेपर कैसे क्लीयर करूंगा, कर पाऊंगा या नहीं। मेरा भविष्य क्या होगा। मैं बहुत समझाती हूँ कि सब ठीक हो जायेगा लेकिन वो समझ नहीं पा रहा है मुझे उसके लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर : निश्चित रूप से ऐसे केसेज बच्चों के साथ होते हैं। और वो बच्चा बहुत उदास हो जाता है। कुछ बच्चे तो ऐसे हैं खुश मिजाज नेचर के होते हैं कि जो कुछ भी हुआ ठीक है, होना होगा हो जायेगा, छोड़ो कोई बात नहीं। लेकिन कुछ बच्चे बड़े सीरियस होते हैं जो हर चीज़ को सीरियसली देखते हैं। उनका एक साल बेकार जा रहा है ये क्या हो गया! तो उनके मन में उदासी आ जाती है। और माँ-बाप भी थोड़े परेशान हो जाते हैं और चाहते हैं कि हमारा बच्चा इससे निकल जाये। मनुष्य का जीवन महत्वपूर्ण है। मैं आपके बच्चे के लिए कहूँगा ये जीवन तो खेल है, इसे खेल मानें। बैक आई है तो कल सफलता हो जायेगी। पेपर क्लीयर हो जायेंगे। अपने मन पर उदासी की चादर जो उन्होंने डाल ली है उसको उतार फेंके और बिल्कुल उमंग-उत्साह और खुशी अपने मन में लायें। और फिर से तैयारी करें पूरे उमंग-उत्साह के साथ। सफलता होगी। मैं तो ये राय दूंगा कि कोई आपके आस-पास ब्रह्माकुमारीज़ सेवाकेन्द्र हो तो वहाँ जाकर थोड़ा मेडिटेशन सीखें ताकि एकाग्रता बढ़े और जीवन में खुशी लौटे।
मेडिटेशन का सबसे अच्छा फायदा यही होता है कि एक मुर्दे समान बने व्यक्ति में भी नवजीवन का संचार करने लगता है। और वहाँ हमारे सेवाकेन्द्रों में बहुत सारे भाई-बहन आते हैं तो खुशी का माहौल इतना ज्य़ादा होता है कि उदास व्यक्ति भी वहाँ आकर खुश हो जाता है। आपके बेटे को हर समय घर पर ही नहीं रहना चाहिए, उससे थोड़ा बाहर आये। कई बार ऐसा होता है कि निराशा के बहुत गर्त में चले जाते हैं, मेरे फ्रैंड्स मुझे क्या कहेंगे, लोग क्या कहेंगे शायद ये सब बातें सोच-सोच कर बहुत ज्य़ादा परेशान हो रहा हो। लेकिन फिर बाहर तो निकलना ही है। घर पर कब तक रहेंगे। फ्रैंड्स से तो कभी न कभी मिलेगा ही। और फै्रंड्स भी जानते हैं बहुतों की बैक आती है कोई बात नहीं। वो खुलेगा तो फ्रैंड्स भी बहुत अच्छी तरह इनके साथ मिले-जुले रहेंगे। तो और नहीं तो हमारे आश्रम पर जाये, वहाँ की खुशी का माहौल उनके अन्दर खुशी पैदा करेगा। और ये उदासीनता समाप्त हो जायेगी। क्योंकि उदासीनता तो उसकी ब्रेन की शक्तियों को नष्ट करती जायेगी। इसलिए उनको इस उदासी से बाहर आना ही है। इसलिए मैं आपको कहूँगा कि आप उसका साथ देती रहें। उनको प्रोत्साहित करती रहें। और उनको अपने साथ घूमने-फिरने पिकनिक पर ले जाया करें, बाज़ार में ले जाया करें। और आश्रम पर भी इसे अपने साथ ले जायें तो वो इससे बाहर आ जायेगा।
मन की बातें राजयोगी बी. के. सूर्य भाई जी
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