मन की बातें – राजयोगी ब्र.कु. सूरज भाई

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प्रश्न : मैं कैलाशपंथ, हिमाचल से हूँ। मेरे भाई ने बिज़नेस में मुझे धोखा दिया और मेरे लिए उल्टा-सीधा प्रसारित भी किया। उसके धोखे से मैं बहुत टूट गया हूँ और बहुत दु:खी रहने लगा हूँ। मैंने एक बार तो मरने की कोशिश भी की लेकिन बच गया। अब भी मैं इस सदमे से उभर नहीं पाया हूँ,मैं क्या करूँ?
उत्तर : जब अपना कोई इस प्रकार धोखा दे जाता है जिस पर हमने विश्वास किया हो तो सचमुच टूटने की स्थिति तो आ जाती है। लेकिन मैं आपको कहूंगा कि ये जीवन बहुत मूल्यवान है। ये धोखा देना, धन का चले जाना ये सब तो विनाशी हैं। ये तो आज हैं कल नहीं, आज कोई मित्र हैं, कल शत्रु बन जाते हैं। कोई शत्रु है वो मित्र बन जाता है, ये खेल तो चल रहा है लेकिन कभी भी अपने जीवन को नष्ट करने की नहीं सोचनी चाहिए।
मुझे एक सच्ची घटना याद आ गई – बहुत साल पहले अफ्रीका से एक अमीर व्यक्ति बॉम्बे में हमारे प्रोग्राम में आये और उनको ज्ञान बहुत अच्छा लगा और राजयोग सीखा। उन्होंने केन्या में हमारा सेन्टर खोलने के लिए निमंत्रण दिया। अचानक क्या हुआ 6-8 मास ही हुए थे। बहुत बड़ा बिज़नेस था उनका 47 कंट्रीज़ में, दिवाला हो गया। दिवाला हो गया तो सबकुछ चला गया और एक मकान बचा उसके पास। वो अपने बगीचे में घूम रहे थे। उनका फ्रेंड उनको मिलने आया हुआ था सांत्वना देने, सांत्वना दी और बातचीत होने लगी तो बोला बहुत बुरा हो गया, आपका इतना सबकुछ नष्ट हो गया। हम आपके साथ हैं कोई मदद चाहिए तो बताना क्योंकि ऐसे विकट समय पर ही मनुष्य को मदद की ज़रूरत पड़ती है। वो सोचते रहे, सोचते रहे और उन्होंने एक बहुत सुन्दर बात कही कि देखो जब मैं भारत से अफ्रीका में आया था तो मैं एक अटैची और बैग लेकर आया था, मेरे पास कुछ नहीं था। मैंने एक छोटी-सी नौकरी की थी और केवल 30 साल में मैं एक बहुत बड़े बिज़नेस का मालिक बन गया था। मैंने बिज़नेस क्रियेट किया था ना, मैं क्रियेटर हूँ, चलो मेरा बिज़नेस नष्ट हो गया, पैसा नष्ट हो गया, लेकिन मैं तो जि़ंदा हूँ। तो जब क्रियेटर जि़ंदा है तो मैं फिर क्रियेट कर लूँगा। वो टैलेंट्स मेरे अन्दर है। ये बात सुनकर मुझे भी बहुत आनंद आया।
मैंने सीखा, वि आर क्रियेटर। हमारा सबकुछ नष्ट हो जाये हमें अपने को नष्ट करने की कभी नहीं सोचनी चाहिए। सबने देखा ये कि 5-7 साल में फिर से उन्होंने अपना बिज़नेस स्थापित कर लिया, फिर वे उसी पॉजि़शन पर थे। तो मैं आपको कहूँगा कि मरने की कभी न सोचें और ये बुरे दिन आपके जीवन में आये हैं। आपको तो पता है ना कि सत्य आपके पास है। अपने सत्य में विश्वास रखें और दूसरों के द्वारा फैलाये गये प्रचार से अपने को निराश न करें। अपनी खुशी को नष्ट न करें। देखिए संसार ही ऐसा है, कलियुग के अंत में वो व्यक्ति जो बहुत पाप कर रहा है, जो धोखा दे रहा है अपने को बचाने के लिए, अपने को सत्य सिद्ध करने के लिए, उल्टी-सुल्टी बातें तो करेगा ही। इसलिए इससे प्रभावित न होकर ऐसे सोचें कि जैसे बहुत सारी बदबू हो और एक अगरबत्ती जला देते हैं, अगरबत्ती ये तो नहीं सोचती ना कि बदबू बहुत है, नहीं। वो तो अपनी सुगन्ध फैलायेगी।
इसीलिए राजयोग सीखें, क्योंकि राजयोग हमें सदा प्रसन्न रहने की कला भी सिखाता है। राजयोग का एक ये भी विधान है कि वो हमारे मन में सुन्दर विचारों को क्रियेट करने की कला प्रदान करता है। आप सुन्दर विचारों को क्रियेट करिए। और आपके पॉजि़टिव व सत्यता के विचारों के वायब्रेशन्स उस असत्य व निगेटिव वायब्रेशन्स को नष्ट कर देंगे। आप दिखा दें कि आपको कोई व्यक्ति धोखा देकर बिगाड़ नहीं सकता। हमारे भाग्य को छिन नहीं सकता, भगवान हमारे साथ है, भाग्य हमारे साथ है।
प्रश्न : मैं सतरूपा बोहंती,भवानीपटना ओडि़शा से हूँ। मैं और मेरे पति दोनों ही बहुत क्रोधी हैं। कभी-कभी हमारी लड़ाई इतनी बढ़ जाती है कि पड़ोसियों को आकर छुड़ाना पड़ता है। मैं अपने गुस्से को कैसे नियंत्रित करूं?
उत्तर : ये कटु समस्या है। देखिए क्रोध की शुरूआत मूढ़ता से होती है; और इसका अन्त पश्चाताप से। क्रोध करने के बाद ऐसा हो ही नहीं सकता कि क्रोधी व्यक्ति पश्चाताप की अग्नि में न जलता हो। अभी आपके अन्दर इच्छा हो गई कि इस क्रोध से निजात पायें हम किसी भी तरह। क्योंकि घर का वातावरण तो बहुत खराब हो जाता है; और बच्चों पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है। माँ-बाप के वायब्रेशन्स बच्चे जल्दी ग्रहण करते हैं। और जिस घर में क्रोध की अग्नि जलती है वहाँ प्रेम और खुशी का माहौल तो रहता ही नहीं। और जिस घर में प्रेम और खुशी न हो उस घर में बच्चों का बौद्धिक विकास और शारीरिक विकास दोनों ही रूक जाते हैं। क्रोध स्वयं में एक निगेटिविटी है। मुझे याद आ रहा है कि जब मनुष्य क्रोध करता है तो उसे याद रखना चाहिए कि वो बाहर की बहुत सारी निगेटिव एनर्जी को अट्रैक्ट कर रहा है, ये बहुत सूक्ष्म साइकोलॉजिकल थ्योरी हो गई। मेडिकल डॉक्टर्स जो हैं वो हमारे यहाँ तो बहुत अच्छी तरह एक्सप्लेन करते हैं कि क्रोध की तरंगों से बॉडी में क्या-क्या हो जाता है। पूरी नस नाडिय़ां खींच जाती हैं, सेल्स डेड होने लगते हैं। किसको हाई ब्लड प्रेशर होने लगता है, किसी को हार्ट अटैक होने लगता है, तो इससे बचना चाहिए।
आपने इच्छा व्यक्त की है तो मैं बताऊंगा कि आपके शहर में जहाँ भी आस-पास ब्रह्माकुमारीज़ सेवाकेन्द्र है आप वहाँ जायें, वहाँ राजयोग के द्वारा इस क्रोध पर विजय पाने का बहुत सरल तरीका मिलता है। राजयोग और स्पिरिचुअल नॉलेज क्रोध को समाप्त कर देती है। फिर भी जब तक आप वहाँ जायें तो मैं आपको एक सुन्दर-सी प्रैक्टिस सीखा देता हूँ। आप दोनों ही सवेरे जल्दी उठें और प्रकृति के शांत वातावरण का इफेक्ट अपने ब्रेन पर आने दें। थोड़ा खुली हवा में आ जायें, छत पर जायें। हर समय बंद कमरे में रहना वो अच्छा नहीं है हेल्थ के लिए भी, ब्रेन के विकास के लिए भी। और इस तरह विचार करें कि ये जीवन कितना सुन्दर है। भगवान ने ये कितना सुन्दर संसार रचाया है। हम क्यों छोटी-छोटी बातों में उलझ कर इसकी सुन्दरता को नष्ट कर देते हैं। नहीं, हमें बहुत अच्छा इंसान बनना है। हम तो भगवान के बच्चे हैं। वो तो शांति का सागर है। मुझे भी अब शांत हो जाना है। तो सात बार रोज़ संकल्प करें मैं भगवान की संतान हूँ, मेरा चित्त शांत हो गया है…। तो अगर सात बार रोज़ ऐसा करेंगे तो सब्कॉन्शियस माइंड इसे रिसीव करेगा और वो चित्त को शंात करेगा। और क्रोध की अग्नि थोड़े दिन में बुझ जायेगी।
क्रोध को जीतने के लिए इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि क्रोध का जन्म होता है कामना से, मनुष्य एक-दूसरे से कुछ एक्सपेक्ट करता है कि ये व्यक्ति मेरे सामने झूठ न बोले, ये व्यक्ति टाइम पर आये, ये व्यक्ति बहुत बुद्धिमान हो… ये ज़रूरी नहीं कि वो व्यक्ति हमारी कामनाओं पर खरा उतरे। अपनी कामनाओं को भी थोड़ा डाउन करें। थोड़ा धैर्यचित्त हों और ये याद रखेंगे कि धैर्य से क्रोध को जीता जा सकता है। तो बहुत जल्दी ही आपको सफलता मिल जायेगी।

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