मन की बातें

प्रश्न : मैं हृत्वि, मुम्बई बोरीवली से हूँ। मैं पीस ऑफ और माइंड और अवेकनिंग चैनल देखती हूँ और इसी के माध्यम से मैं ईश्वरीय विश्व विद्यालय से जुड़ पाई हूँ। तीन साल से मुझे रात को रोज़ भयानक सपने आते हैं। इसमें मुझे अलग-अलग लोग, अलग-अलग जगह दिखाई देते हैं, जिन्हें मैंने पहले कभी नहीं देखा। ये क्या है, मुझे समझ में नहीं आ रहा है। इसलिए मैंने भगवान का नाम स्मरण करना शुरू किया, जब भी नाम स्मरण करके सोती हूँ तो और सपने भयानक आने लगते हैं और जब मैं मेडिटेशन करके सोती हूँ तो ये और ज्य़ादा बढ़ जाते हैं तो इसका कारण क्या है, मेडिटेशन करने के बाद तो ये स्थिति सामान्य हो जानी चाहिए। लेकिन ऐसे भयानक सपने क्यों आते हैं? उत्तर : कभी-कभी प्रारम्भ में मेडिटेशन जब मनुष्य करता है तो उसकी कई निगेटिव चीज़ें भी एक्टिव होने लग जाती हैं, वो निकलने लगती हैं। जैसे कई बार कोई दवा देने से, खासकर आयुर्वेद वाले ये बताते हैं कि कोई बीमारी उभर सकती है, इससे डरें नहीं। मेडिटेशन लगातार करें, मैं समझता हूँ कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि 15 दिन आप करें लगातार। सोने से पहले आधा घंटा ज़रूर करें। उसके चिंतन में नहीं, परमात्म चिंतन में। धीरे-धीरे आप पायेंगी कि जो ज्य़ादा आने लगे हैं वो धीरे-धीरे माइनस की ओर जा रहे हैं। ये किसी का 15 दिन में ठीक हो जाता है और किसी का दो से तीन मास में। लेकिन ये एक कार्मिक अकाउंट पर भी डिपेंड करता है मेडिटेशन करने से हमने देखा है किसी की इम्प्युरिटी जागृत हो जाती है, कईयों के जीवन में विघ्न आने लगते हैं। कईयों को और तूफान जैसी स्थिति आ जाती है। ये ठीक हो जाता है लेकिन कभी-कभी ऐसा भी होता है ये एक अच्छे कार्य के लिए साधनाओं के मार्ग में बाधायें तो आया करती हैं। और जो उन बाधाओं से डर कर साधना को छोड़ देता है उसकी तो छूट जाती है। लेकिन जो संकल्पधारी है और अपनी साधनाओं को कदापि छोड़ता नहीं है ये सब चीज़ें पीछे चली जाती हैं।

प्रश्न : मेरा नाम यश्विनी है और मैं पुणे से हूँ। क्या अमरत्व जैसी कोई चीज़ है? हम सुनते रहे हैं कि देवतायें अमर थे, आज भी हिमालय में कई ऐसे ऋषि हैं जिनकी आयु सैंकड़ों वर्ष है। उत्तर : ये बिल्कुल सत्य कहा गया है कि जिसने देह लिया वो देह तो छोडऩा ही है। लम्बी आयु हो सकती है। और हमारे जो तपस्वी और ऋषि-मुनि हैं उनके पास काया को कल्पित करने की एक ऐसी विद्या होती है कि वो जड़ी-बुटियों के प्रभाव से जो शरीर पर आयु का असर आ जाता है, सब कुछ सिस्टम एकदम वीक पड़ जाता है बॉडी में तो वो उसको जैसे रिन्यू कर लेते हैं अपनी शक्तियों से, जड़ी-बुटियों से, और विभिन्न क्रियाओं से। तो ऐसे लोग थोड़ा लम्बा समय जी लेते हैं। हमने भी सुना है कि एक त्रैलंग स्वामी थे बनारस में। जो तेलंगाना से थे इसीलिए उन्हें त्रैलंग स्वामी कहते थे। वो 300 साल जिये। और उनके पास बहुत सारी सिद्धियां थीं, उन्होंने और सारी संसार की इच्छाओं को त्याग कर दिया था, इसलिए ऐसे कुछ तपस्वी हैं। एक योगी बाबा भी हुए जिनको लोग कहते हैं कि वो हमेशा 25 साल की आयु जैसे ही दिखते थे। 250 साल वो भी जिये। कई उनके शिष्य भी हमारे पास आये हैं जो राजयोग सीख रहे हैं, तो ये है तो सत्य लेकिन अमरत्व जो देवताओं के बारे में प्रसिद्ध है कि वो अमर थे। अमर का अर्थ ये है कि देवयुग में मृत्यु शब्द ही नहीं था। उनको कोई फीलिंग ही नहीं थी। उनकी मृत्यु तो ऐसी थी जैसे एक पुराना वस्त्र बदल कर नया लेना। उनको इसकी फीलिंग होती थी कि ये देह अब बूढ़ा हो गया है, मैं आत्मा इसे छोड़कर नये बच्चे के शरीर में प्रवेश करती हूँ। लेकिन देह तो सबको छोडऩा ही होता है। बस, यही कारण है कि देवताओं को अमर कह दिया गया। और वही स्थिति योगियों की भी बन जाती है कि इन्हें मृत्यु जैसी भासना होती नहीं है। तो उन्हें ऐसे लगता है कि ये देह छूट गया और दूसरे में चले गए। यहीं हैं, आत्मा अमर है। और जो शास्त्रों में ये कहावत ही है कि देवासुर संग्राम के समय उन्होंने मंथन किया था, उससे बहुत सारी बहुमूल्य चीज़ें निकली थीं। उसमें से एक अमृत भी था। जो देवताओं को पिला दिया गया था। इससे सभी समझते हैं कि अमृत कोई पानी की तरह होता है, घड़े में भरा और वो पिलाया गया था। वास्तव में ज्ञान को ही अमृत कहा जाता है। जिससे मनुष्य अमर बन गया यानी उसे सद्विवेक प्राप्त हो गया। मृत्यु तो सृष्टि का नियम है। अगर लोग सदा ही जीते रहें और नये आयेंगे वो भी जीते रहेंगे तो संसार का कल्याण हो नहीं पायेगा और बहुत सारी विकृतियां इस संसार में आ जायेंगी। मनुष्य अति पीडि़त रहने लगेगा। इसलिए मृत्यु-जन्म, मृत्यु-जन्म यही चक्र चलता रहता है। रही बात अमृत की जो मनुष्य की जन्म-जन्म की इच्छा थी वो पूर्ण हो रही है। स्वयं भगवान सबके लिए अमृत लेकर ही आये हैं। प्रभु मिलन ही सबसे बड़ा अमृत है। शास्त्रों-वेदों से भी लोगों ने ज्ञान प्राप्त किया। लेकिन कोई भी सच्चा ज्ञानी बन नहीं पाया। ज्ञान उनके जीवन में नहीं आया।  बल्कि बहुत लोगों को उनके ज्ञान ने अभिमानी बना दिया। भगवान ज्ञान का सत्य प्रकाश लेकर आया है उसके ही ज्ञान को ज्ञान अमृत कहा जाता है। क्योंकि भगवान की परम सत्य है। वही सत्य ज्ञान देते हैं और उसके द्वारा ही मनुष्य सबकुछ प्राप्त करता है, अपनी खोई हुई स्थिति को प्राप्त करता है। मुक्ति और जीवनमुक्ति को प्राप्त करता है। तो ये समय सभी की उस इच्छा को पूर्ण होने का भी है कि हमें कहीं से अमृत मिले और अमृतपान कराया जा रहा है। जिसको भी अमृतपान करना हो उसको परमात्मा अमृतपान करा रहा है,आ जाओ, भगवान स्वयं अमृतपान करायेंगे।

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