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पतरातू: ब्रह्माकुमारीज संस्थान द्वारा चैतन्य दुर्गा मॉं की झांकी एवं तीन दिवसीय राजयोग चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया

पतरातू, झारखण्ड: ब्रह्माकुमारीज सेवाकेंद्र में महानवमी को चैतन्य दुर्गा मां की झांकी प्रस्तुत किया गया एवं तीन दिवसीय “दुर्गा मॉं के आध्यात्मिक रहस्य चित्र प्रदर्शनी वा राजयोग चित्र प्रदर्शनी का आयोजन पतरातू क्षेत्र के पंच मन्दिर कैम्पस में रखा गया। चित्र प्रदर्शनी का विधिवत फिता काट कर उद्घाटन किया। कार्यक्रम में पंच मन्दिर के पुजारी बालेश्वर पाण्डेय सहित पूजा समिति के अध्यक्ष दीपराज सिंह, उपाध्यक्ष विकास कुमार सिंह वा समिति के अनेकों सदस्यों को दुर्गा मां पट्टा ओढ़ाकर एवं शिव आमंत्रण मैगजिन देकर सम्मानित भी किया  किया गया। दुर्गा मॉं का  रूप धारण करने वाली बीके रीतू बहन थी।

राजयोगा मेडिटेशन ट्रेनर बीके रामदेव ने कहा कि विशेष दुर्गा मां से हम नवरात्रि में सिद्धि प्राप्त करना चाहते हैं अर्थात सफलता चाहते हैं यदि हम प्रतिदिन राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास करेंगे तो हमें सफलता अवश्य मिलेगी। राजयोग से जीवन में सुख ,शांति, आनंद , प्रेम और खुशी की प्राप्ति होती है एवं राजयोग से मनोविकार काम क्रोध लोभ मोह अहंकार को भी हम सहज ही जीत सकते हैं राजयोग मेडिटेशन के द्वारा दुर्गा मां  की शक्तियों को हम जागृत कर सकते हैं और हम सुखी जीवन जी सकते हैं आनंदमय जीवन जी सकते हैं स्थानीय सेवा केंद्र पर आकर राजयोग का अभ्यास करने से जीवन में सहज ही एकाग्रता की प्राप्ति होती है।

पतरातू सेवाकेंद्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी रोशनी बहन ने कही कि आज आवश्यकता  है कि हम नवरात्रि के वास्तविक आध्यात्मिक रहस्य को समझें और अपने जीवन में धारण करें।

नवरात्रि का वास्तविक अर्थ पौराणिक कथाओं में बताया जाता है कि जब देवता ,असुरों के अत्याचार से दुखी हो गए, तब देवी शक्ति प्रकट हुईं और उन्होंने असुरों का संहार करके देवताओं की रक्षा की।

यदि हम इस कथा को आध्यात्मिक दृष्टि से समझें, तो हमारे जीवन में भी काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और ईर्ष्या जैसे अनेक मनोविकार हैं। ये विकार ही हमारे मन की शांति और सुख को समाप्त कर देते हैं।

इसलिए नवरात्रि का सच्चा अर्थ है—अपने अंदर की आसुरी प्रवृत्तियों को समाप्त करके दैवी गुणों को जागृत करना।

जब हम अपने मन को पवित्र बनाते हैं, परमात्मा शिव को याद करते हैं और श्रेष्ठ कर्म करते हैं, तभी हमारे जीवन में सच्ची विजय होती है।

नौ देवियों का अध्यात्मिक रहस्यों पर प्रकाश डालते हुए ब्रह्माकुमारी रोशनी ने कही कि प्रथम दिवस पर मां शैलपुत्री अडिग संकल्प शक्ति पर्वत के समान अटल रहने का संदेश। आध्यात्मिक जीवन में यह आत्मा की दृढ़ता, विश्वास और श्रेष्ठ संकल्पों पर स्थिर रहने का प्रतीक है। दूसरे दिवस पर 

माँ ब्रह्मचारिणी  तपस्या और पवित्रता की शक्ति ब्रह्मचर्य,

संयम, साधना और एकाग्रता का संदेश देता है ।राजयोग शिक्षा में इसे आत्मिक अनुशासन और पवित्र जीवन से जोड़कर समझा जा सकता है।

तीसरे दिन पर माँ चंद्रघंटा निर्भयता और शांति की शक्ति

भय, क्रोध और नकारात्मक परिस्थितियों का सामना धैर्य तथा साहस से करने का प्रतीक है। सच्ची शक्ति के साथ मन में शांति बनाए रखना। चोथे दिन  माँ कूष्मांडा ,जो सृजन और आनंद की शक्ति जीवन में उमंग, उत्साह, सकारात्मकता और कल्याणकारी संकल्पों का संचार करती है ,अपने विचारों से दूसरों के जीवन में भी आशा का प्रकाश फैलाना है। पांचवें दिन माँ स्कंदमाता  मातृत्व और करुणा की शक्ति

प्रेम, वात्सल्य, संरक्षण और निःस्वार्थ सेवा का प्रतीक। हर मनुष्य आत्मा के प्रति सम्मान और शुभभाव रखने का प्रतीक है। 

छठवें दिन मां कात्यायनी धर्म और न्याय कीशक्ति,अन्याय, बुराइयों और कमजोरियों के विरुद्ध खड़े होने का संदेश देता है ।अपने जीवन में सत्य, साहस और नैतिकता को अपनाने का प्रतीक है ।

सातवें दिन पर माँ कालरात्रि का पूजन होता है,जो विकारों पर विजय की शक्ति है। अज्ञान, भय, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे आंतरिक शत्रुओं को पहचानकर उन पर विजय प्राप्त करना। अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का यादगार है।

आठवें दिन माँ महागौरी का पूजन होता है,जो स्वच्छता और पवित्रता की शक्ति मन, बुद्धि, दृष्टि और व्यवहार को निर्मल बनाती है। पुराने नकारात्मक संस्कारों को बदलकर शुद्ध एवं श्रेष्ठ संस्कार धारण करने का यादगार है।

और अंतिम नौवां दिन माँ सिद्धिदात्री — सिद्धि और संपूर्णता की शक्ति , आत्मिक उन्नति, श्रेष्ठ गुणों की प्राप्ति और जीवन में संतुलन का यादगार है।

अंत में उन्होंने कहा कि राजयोग के अभ्यास से मनुष्य आत्मा में शांति, प्रेम,सुख और शक्ति जैसे को विकसित करने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में मां दुर्गा का चैतन्य दर्शन कर आरती कर अति आनंदित हुए और मां का दिव्य अलौकिक अनुभूति भी किए।बीके रामदेव बीके गुलाब , बीके रोशनी,बीके गीता देवी, बीके जुही,बीके दुलारी , बीके बिराजो, बीके गुन कुमारी,आदि लोग  उपस्थित थे।

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