बाबा का बहुत अच्छा महावाक्य है-यदि तुम बाप समान बनना चाहते हो तो जैसे मैं इस खेल को साक्षी होकर देखता हूँ वैसे ही तुम भी इस खेल हो साक्षी होकर देखो और सकाश दो। हमारी सकाश संसार की दूर-दूर अनेक आत्माओं को जायेगी। वो अपना पार्ट प्ले कर रहे हैं, और हम अपना पार्ट प्ले करें।
ये विश्व का खेल एक सुन्दर ड्रामा है। इसे खेल भी कहते हैं। हार-जीत, सुख-दु:ख का खेल, उत्थान और पतन का खेल, इसमें कभी हार है, कभी जीत है। कभी भक्ति है, कभी ज्ञान है। भक्ति भी अच्छी, ज्ञान भी अच्छा। जो कुछ हो रहा है सबकुछ अच्छा है। अच्छा ही होगा। बहुत सुन्दर संकल्प है कि जो हो गया वो भी अच्छा था। जो हो रहा है ये भी अच्छा है, और जो होगा वो भी बहुत अच्छा होगा। ये ड्रामा पाँच हज़ार वर्ष का है, ये हूबहू रिपीट होगा। ये एक वंडरफुल बात है। इसमें कई लोगों को कई बातें समझ में नहीं आती। सोचते हैं कि अगर हूबहू रिपीट होगा तो हम ये कर्म क्यों कर रहे हैं? वो भी तो रिपीट हो रहे हैं ना क्योंकि हमने कल्प पहले किए थे वो हमारा पार्ट है, वो हमें रिपीट करना ही है। तो इसमें सबकुछ रिपीट होता, हूबहू रिपीटेशन है ड्रामा का। भक्ति में भी, शास्त्रों में भी इसके लिए छोटी-छोटी बातें कही गई हैं, जैसे बनी बनाई बन रही अब कुछ बननी नाही। चिंता ताकी कीजिए जो अनहोनी होय।
बहुत ही सुन्दर बात है, जो होने वाला है वो पहले से ही डिसाइडेड है, बना बनाया खेल है, हम चिंता क्यों करें? क्योंकि हमें पता नहीं है कि क्या होने जा रहा है। इसलिए मनुष्य सोचता है कि क्या इसको बदला नहीं जा सकता? बदलें तो तब जब ये पता हो कि ये होने जा रहा है। अगर हमें पता हो कि एक घंटे के बाद हम वहाँ जायेंगे, हमें उसे बदलना है आज नहीं जायेंगे, कल जायेंगे। वो पता था ना! तो आज के बदले हमने कल कर दिया, इसको ही बना बनाया ड्रामा कहते हैं। पहले भी ऐसे ही हुआ था।
मैं एक उदाहरण दे रहा हूँ बहुत अच्छा, और ये बातें बहुतों के सामने आती हैं कि हमारे जीवन में कुछ ऐसी बुरी घटनाएं हो गईं कि जिन्हें हम याद भी नहीं करना चाहते। अगर वो याद आ जाती हैं तो रूह कांप उठती है। इन घटना को दो साल हो गए, अढ़ाई साल हो गए। हम बहुत दु:खी थे। हम ज्ञान में आ गये। सबकुछ नष्ट हो गया था तो शांति के लिए खोज हो रही थी तो बाबा के पास आ गये। अब जब सुनते हैं कि ड्रामा हूबहू रिपीट होता है तो परेशान हो उठते हैं। वो बुरे दिन हमारे फिर आयेंगे! वो बुरी घटनाएं हमारे जीवन में फिर होंगी! क्या इसको बदला नहीं जा सकता! कहते हैं जब हम मुरलियों में, महावाक्यों में सुनते हैं कि रिपीट होगा तो हमारी खुशी चली जाती है। बात तो बहुत प्रैक्टिकल है। क्योंकि कोई भी मनुष्य अपने जीवन में बुरा नहीं चाहता।
तो मैं तो सीधा कहता हूँ बाबा के पास क्यों आये? क्योंकि वो बुरी घटना हो गई थी, उससे परेशान थे, बहुत दु:खी थे, बहुत अशांति थी, टेंशन थी खोज रहे थे कि कहाँ से रास्ता मिले, शांति कहाँ से मिले। तो आ गये शिव बाबा के पास! तो सीधा सिद्धान्त है अगर वो ना होता तो ये भी न होता। वो न होता तो तुम भगवान के पास भी न आते। आपको इतना बड़ा भाग्य मिल गया, आपके जीवन में खुशी आ गई। शांति आ गई, एक नया दृष्टिकोण आ गया तो ये अच्छा हुआ या नहीं? तो जो कुछ हुआ वो अच्छा था। अब हम सबके लिए सबसे अच्छी बात है कि इस ड्रामा को याद करके हमें बहुत आनन्दित होना चाहिए। देखो ये खेल कैसा बना हुआ है कि अंत में, कल्प के अंत में यानी कलियुग के अंत में इस धरा पर स्वयं भगवान भी आयेंगे और वे देवकुल की आत्माओं का आह्वान करेंगे कि आ जाओ और अनेक देव कुल की आत्माएं उनके पास आ जायेंगी। वो उनसे ज्ञान लेंगी, वो उनके साथ आनंद मनायेंगी, उनके साथ खेलेंगे, उनके साथ खायेंगे।
जैसे शास्त्रों में दिखाया गया श्रीकृष्ण की कहानी। आपमें से कभी-कभी कई सोचते होंगे, मैं भी सोचता था कि जब श्रीकृष्ण थे, जब वो गाय चराया करते थे, जब वो ग्वाल बालों के साथ जंगल में जाया करते थे, हम भी उसमें होते तो कितना अच्छा होता! जब उन्होंने अर्जुन को ज्ञान दिया हमें भी दिया होता तो कितना अच्छा होता! अब भगवान ने आकर बताया कि जब श्रीकृष्ण होंगे तो तुम भी बहुत सारी मनुष्यात्माएं उनके साथ होंगी। फिर रिपीट होगा ड्रामा, श्रीकृष्ण आयेंगे इस धरा पर तो अकेले तो नहीं होंगे ना, उनका भी एक संसार है अपना। और हम सबको ये बड़ा भाग्य मिल गया कि भगवान इस धरा पर आये और हमने उन्हें पहचान लिया। संसार के अरबों-अरबों लोग तो अनभिज्ञ बैठे हैं। उन्हें इस अंधकार में दिखाई नहीं देता कि भगवान भी आ गया है। लेकिन वो आ गया, हमने उसे पहचाना और उसने हमें सत्य ज्ञान दिया। और कितनी बड़ी बात कि वो जो युग परिवर्तन का दिव्य कार्य कर रहा है उसमें उसने हमें अपना साथी बना लिया है। हम उसके साथी बन गये हैं।
हमारा पार्ट भगवान के साथ और ये फिक्स हो गया कि जब-जब भगवान इस धरा पर अपना दिव्य कार्य करने आयेेंगे तो हम भी उनके साथ होंगे, साथी होंगे, सहयोगी होंगे। उसका प्यार हमें प्राप्त होगा। उसकी शक्तियां हमें प्राप्त होंगी। हम पात्र बन जायेंगे तो इसको अगर याद करेंगे तो बहुत ही मौज में रहेंगे। बाबा का बहुत अच्छा महावाक्य है-यदि तुम बाप समान बनना चाहते हो तो जैसे मैं इस खेल को साक्षी होकर देखता हूँ वैसे ही तुम भी इस खेल हो साक्षी होकर देखो और सकाश दो। हमारी सकाश संसार की दूर-दूर अनेक आत्माओं को जायेगी। वो अपना पार्ट प्ले कर रहे हैं, और हम अपना पार्ट प्ले करें। तो ड्रामा के ज्ञान को चिंतन में लाकर अपने को तैयार करें। इस ड्रामा में हमारा हीरो पार्ट है। भगवान के साथ पार्ट है ये याद रहे। और हम सब आत्माओं को वापिस जाना है। ये ड्रामा पूर्ण हो रहा है। इन्हीं स्मृतियों से हम अपनी स्थिति को बहुत श्रेष्ठ बना सकेंगे।




