448 कैदियों एवं जेल स्टाफ को दिया सकारात्मक एवं संस्कारित जीवन का संदेश
छतरपुर, मध्य प्रदेश: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, छतरपुर सेवाकेंद्र के तत्वावधान में छतरपुर जिला जेल में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव श्रद्धा, उल्लास एवं आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया।कार्यक्रम का उद्देश्य जेल स्टाफ एवं बंदियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आध्यात्मिक रहस्य, भगवान श्रीकृष्ण के आदर्श जीवन, दिव्य गुणों एवं संघर्षों से प्रेरणा लेकर सत्य, धर्म, धैर्य, कर्तव्य एवं सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता एवं मंच संचालक ब्रह्माकुमारी रीना बहन जी ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आध्यात्मिक रहस्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जैसा दिव्य, गुणवान, मर्यादित एवं आदर्श जीवन जीना ही सच्ची जन्माष्टमी है।जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि अपने भीतर श्रेष्ठ विचारों, दिव्य गुणों एवं सकारात्मक संस्कारों को जन्म देने का पावन अवसर है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी जेल में हुआ था।जिस प्रकार उनका जन्म अंधकार और विपरीत परिस्थितियों के बीच एक नई आशा और परिवर्तन का संदेश लेकर आया, उसी प्रकार यह जेल भी प्रत्येक बंदी के जीवन में एक नई शुरुआत का स्थान बन सकती है। यहाँ से व्यक्ति अपने अंदर के नकारात्मक विचारों, बुरी आदतों एवं अवगुणों की बेड़ियों को तोड़कर एक नए, उज्ज्वल, संस्कारित एवं मर्यादित जीवन की शुरुआत कर सकता है।
ब्रह्माकुमारी रीना बहन जी ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत हों, मनुष्य को सत्य, धर्म, धैर्य और कर्तव्य के मार्ग से नहीं हटना चाहिए। व्यक्ति का अतीत चाहे जैसा भी रहा हो, यदि उसके विचार और संकल्प श्रेष्ठ हों तो वह अपने वर्तमान और भविष्य को बदल सकता है। उन्होंने बंदियों को श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने तथा प्रेम, शांति, संयम और सदाचार को अपनाने का संदेश दिया।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी रेखा बहन जी एवं ब्रह्माकुमारी सुमन बहन जी ने भी अपने प्रेरणादायक विचार व्यक्त करते हुए बंदियों को आपसी प्रेम, भाईचारा, सद्भाव, करुणा एवं आत्म-संयम को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।उन्होंने कहा कि नकारात्मक विचारों से दूर रहकर आध्यात्मिक एवं सकारात्मक चिंतन के माध्यम से जीवन में श्रेष्ठ परिवर्तन लाया जा सकता है।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित मनमोहक राधा-कृष्ण नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियांरहीं। इनमें शिवांशी बहन, अंजलि बहन, मुस्कान बहन, अदिति बहन, तनिष्का बहन एवं कृतिका बहन ने अपनी सुंदर प्रस्तुतियों से उपस्थित सभीबंदियों एवं जेल स्टाफ का मन मोह लिया।सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम, करुणा, धर्म एवं सदाचार के संदेश को सुंदर एवं भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया।
इस कार्यक्रम में 448 बंदियों सहित जिला जेल का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रभारी जेल अधीक्षक योगेंद्र पवार ने सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए ब्रह्माकुमारी बहनों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया तथा इस प्रकार के आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायक कार्यक्रमों की सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा प्रेम, सद्भाव, संयम, सदाचार एवं सकारात्मक सोच के साथ एक श्रेष्ठ जीवन जीने का संकल्प लिया।






