Homeब्र. कु. सूर्यबच्चों के लिए अपॉइंटमेंट...!!!

बच्चों के लिए अपॉइंटमेंट…!!!

अपने अपॉइंटमेंट को सुन्दर यादगार बनाने के लिए क्या-क्या बातें करेंगे और क्या-क्या प्राप्त किया जा सकता है, इसकी कम से कम 15 सुन्दर बातें निकालें। और जो सुन्दर अवसर मिला है मिलने का, उसे अनुभवयुक्त यादगार बनाएं। उस सुन्दर मिलन की तस्वीर बुद्धि रूपी कैमरे में खींच लें। ऐसा मौका बार-बार कब मिलेगा!!

हम सभी ब्रह्मा वत्स इस संसार में बहुत-बहुत भाग्यवान हैं। ज़रा देखें हम सभी अपने भाग्य को और मुस्कुराएं। भगवान के साथ जीवन जीने का मौका मिला। उसकी पालना में पलने का स्वर्णिम अवसर प्राप्त हुआ। उसने हम सभी को एक बहुत सुन्दर अवसर दे दिया कि बच्चे सवेरे 3:00, 3:30, 4 बजे तक का समय तुम बच्चों के लिए है। अपॉइंटमेंट दे दी भगवान ने। तुम मेरे से मिलन करो। तुम मेरे से वरदान लो। मेरे से भिन्न-भिन्न तरह के अनुभव प्राप्त करो। 5 बजे के बाद का समय भक्तों के लिए है। शिव बाबा ने अपॉइंट कर दिए। तब मैं भक्तों की सुनता हूँ, उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करता हूँ, उनके पास भी जाता हूँ कभी-कभी।
कोई बहुत सच्चा भक्त होता है, अच्छे कर्म किए होते हैं तो मैं उसके पास भी जाता हूँ। तो सवेरे उठें आप, काम-धन्धा तो चलता रहेगा। अपनी दिनचर्या को सेट करें अच्छी तरह से। टाइम पर सो जाएं, टाइम पर उठ जाएं। पढ़ते थे ना, अर्ली टू बेड, अर्ली टू राइज़, मेक्स अ मैन हेल्दी, वेल्दी एंड वाइस। सवेरे उठना तो हेल्थ के लिए बहुत अच्छा है। बुद्धि का विकास होगा आपकी। सुन्दर विचार मन में उठेंगे। तो सवेरे उठने का मन बना लें। कई लोग कहते हैं तभी तो बहुत गहरी नींद आती है। मज़ा तो तभी आता है। लेकिन उससे ज्य़ादा मज़ा तो भगवान से मिलने में आएगा ना! उस मज़े को चखकर देखेें। उस रस का आनंद लेकर देखें। आगे-पीछे सो सकते हैं आप।
कई बाबा के बच्चे तो ऐसा भी करते हैं कि बारह बजे भी आयें या एक बजे भी आयें 4 बजे उठे, थोड़ा-सा फ्रेश रहेंगे। जितना भी हो आधा-पौना घंटा योगाभ्यास कर लिया क्योंकि थके थे, फिर फ्रेश हो गये, फिर सो गये। क्योंकि आत्म संतोष मिला कि सवेरे उठकर प्रभु मिलन किया। अपने को चार्ज किया। तो रोज़ सवेरे हम अपने को श्रेष्ठ संकल्पों से चार्ज भी करेंगे। और तब बाबा से अच्छा मिलन होगा और हमारी एकाग्रता भी बहुत अच्छी होगी। जिसका प्रभाव सारे जीवन पर पड़ेगा। आपकी स्टडी पर पड़ेगा, आपकी बुद्धिमानी पर पड़ेगा, आपके काम-धन्धों पर पड़ेगा। आपकी सफलता पर पड़ेगा। कितने लाभ हैं इसके।
सवेरे के लिए दो बातें मैं आपके सामने रख रहा हूँ। एक है – अपनी प्राप्तियों की एक लिस्ट बना लें। कम से कम 15-16, नहीं तो 25। क्या-क्या मिला इस अन्तिम जन्म में। सवेरे उठकर या तो उसे पढ़ लिया करें या याद कर लिया करें। और मन को खुशी में डांस करा दो। मन आपे डांस करेगा, करा क्या दो। सबसे पहली प्राप्ति स्वयं भगवान मिले। ये बात अगर किसी बड़े सन्यासी से पूछी जाए तो क्या उत्तर मिलेगा आप समझ सकते हैं। शंकराचार्य भी क्या उत्तर देंगे आप समझ सकते हैं। वो कहेगा अहम ब्रह्मास्मि। मैं ही वो हूँ। भगवान से मिलन, वो हमारा परमपिता हम वही कैसे हो सकते हैं! शिव तो पिता है, हम शिव कैसे हो सकते हैं! वो तो सृष्टि का क्रिएटर है। हम क्रिएटर हैं क्या? वो भाग्यविधाता है, हम किसी के भाग्यविधाता हैं क्या? याद करें उठते ही… क्रक्रवाह मेरा भाग्यञ्जञ्ज। स्वयं भगवान मिल गए। मेरे पास आ गये। कितने मेरे पुण्य थे, जो भगवान से मेरा मिलन हुआ।
अब इस निगेटिविटी को छोड़ देंगे कि देर से क्यों हुआ, जल्दी क्यों नहीं हुआ? पहले मिल जाते तो अच्छा होता, ये सब नहीं। मिलने का समय निश्चित है इस ड्रामा में। जब मिले तब का ही आनंद लो। ये सोच-सोच कर आनंद को भूला न दो कि पहले क्यों नहीं मिले?
दूसरी प्राप्ति, उसने आकर सत्य ज्ञान दिया। ज्ञान बहुत बड़ी चीज़ है। भगवान को हज़ारों सालों से ढूंढते आये, वो है कौन? मैं कौन हूँ? कहाँ रहता है वो? समझ में नहीं आया तो कह दिया कि सब जगह रहता है। कहाँ मिलोगे फिर सब जगह रहता है तो। हमारे अन्दर ही है तो फिर मिलने की प्यास क्यों है? सोच के देखो। तुम्हारे अन्दर बैठा है तो उसकी फीलिंग है कुछ? वो शांति का सागर है तो तुम अशांत। वो प्रेम का सागर है और तुम नफरत के सागर। वो पवित्रता का सागर है और तुम विषय विकारों के सागर बन गए हो। कहाँ है भगवान अन्दर! अन्दर होता तो ये सब दुगर्ति थोड़े ही होती मनुष्य की। सत्य ज्ञान दे दिया। जीवन जीने की राह मिल गई। लोग अंधकार में भटक रहे हैं। बहुत सहारा मिला, भगवान ने जैसे ही कहा कि मीठे बच्चे, तुम मेरे हो, मैं तुम्हारा हूँ। मैं तुम्हारे साथ हूँ। मैं तुम्हें मदद करता हूँ। मैं तैयार हूँ, जब भी तुम्हें समस्या हो मुझे बुला लो, सदा रेडी हूँ तुम्हारे लिए। कितनी बड़ी चीज़ हो गई। भगवान सहारा बन गया। वो बाप, टीचर, सद्गुरु बनकर आ गया। गति-सद्गति का मार्ग दिखा दिया उसने। भटकने की ज़रूरत नहीं रही। जीवन नैया की पतवार अपने हाथ में ले ली। निश्ंिचत होकर जीवनमय यात्रा करो। मैं हूँ तुम्हारी पतवार। कितनी बड़ी चीज़ है! संसार में लोगों का जीवन चिंताओं से भरा हुआ है, परेशानियों से भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि सब मुझे दे दो, हल्के हो जाओ। और हमें बना दिया बेफिक्र बादशाह। सो गया था हमारा भाग्य। सोये हुए भाग्य को पुन: जगा दिया।

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