हमारी हर सोच का डेबिट-क्रेडिट होता है, इसलिए स्थूल धन के साथ दुआओं का धन भी जरूर कमाएं” — बी.के. सीए ललितभाई
राजकोट,गुजरात: हैप्पी विलेज रिट्रीट सेंटर, राजकोट में फाइनेंस फ्रेटर्निटी सेवा विंग द्वारा बैंक मैनेजरों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA), कंपनी सेक्रेटरीज (CS) तथा वित्तीय क्षेत्र से जुड़े प्रोफेशनल्स के लिए ‘माइंड मनी मैनेजमेंट’ विषय पर विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में वित्तीय प्रबंधन के साथ-साथ मन के प्रबंधन, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक मूल्यों के महत्व पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में गुजरात ज़ोन की निदेशिका बी.के. भारतीदीदी, माउंट आबू स्थित फाइनेंस फ्रेटर्निटी सेवा विंग के वाइस चेयरमैन बी.के. सीए ललितभाई, एलआईसी के एसडीएम डिवीजन हेड डॉ. एम.के. दवे, माही मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के चीफ एग्जीक्यूटिव भाई आलोक कुमार गुप्ता, आरडीसी बैंक के सीईओ सखिया साहब, आईसीएआई के चेयरमैन सीए धवल दोशी तथा नथानी ब्लड बैंक के संचालक नाथानी साहब सहित वित्तीय एवं व्यावसायिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मनमोहक स्वागत नृत्य के साथ हुआ।

माउंट आबू से पधारे मुख्य वक्ता बी.के. सीए ललितभाई ने ‘कार्मिक अकाउंट फिलॉसफी’ की व्याख्या करते हुए कहा कि जीवन में हमारी प्रत्येक सोच और कर्म का भी एक प्रकार का डेबिट और क्रेडिट होता है। उन्होंने कहा कि हमारे कर्म ही हमारे सच्चे मित्र हैं, इसलिए हमें अपने कर्मों और विचारों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार वित्तीय वर्ष में 31 मार्च की क्लोजिंग के बाद 1 अप्रैल से नई ओपनिंग होती है, उसी प्रकार हमारे जीवन में भी कर्मों की बैलेंस शीट मजबूत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थूल धन के साथ-साथ दुआओं का धन अर्जित करना भी आवश्यक है, क्योंकि यही जीवन की वास्तविक समृद्धि है।
मन को सकारात्मक एवं संतुलित रखने के लिए उन्होंने तीन दैनिक अभ्यासों पर विशेष जोर दिया—
प्रतिदिन कम से कम 101 बार शुभकामनाएं (Good Wishes) देना।
कम से कम 51 बार कृतज्ञता (Gratitude) का अनुभव करना।
कम से कम 21 बार दूसरों की सराहना (Appreciation) करना।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति, वस्तु या स्थान पर आधारित खुशी स्थायी नहीं होती। स्थायी खुशी हमारे अंतरजगत की यात्रा और परमात्मा की स्मृति में निहित है। अपने व्यस्त जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने उपस्थित लोगों को राजयोग का गहन अभ्यास भी कराया।


इस अवसर पर डॉ. एम.के. दवे ने ब्रह्माकुमारी भाई-बहनों के संपर्क में आने पर अनुभव होने वाली सकारात्मक ऊर्जा की सराहना की। वहीं, आरडीसी बैंक के सखिया साहब ने कहा कि यह सेमिनार केवल व्यावसायिक विषय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे आध्यात्मिक अनुभूति भी प्राप्त हुई।
सेमिनार में लगभग 200 लोगों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के समापन अवसर पर बी.के. तनीषा बहन ने मधुर एवं मुस्कुराहट से भरपूर गीत प्रस्तुत कर सभी को आनंदित किया। कार्यक्रम के पश्चात सभी ने प्रेमपूर्वक ब्रह्मा भोजन का आनंद लिया।





