परमात्मा ऊर्जा अध्यात्म की ओर प्रेरित करता है। आज हम देखते है क्या है परमात्म ऊर्जा,क्या है उसका चमत्कार? जैसे कि सभी को ज्ञात है कि अपना नाम, पता,काम आदि लेकिन फिर भी कुछ खाली खाली महसूस होता है। कुछ पाने की इच्छा है, कुछ जानने की अभिलाषा है। आज उस अभिलाषा को जानते है उसकी गहराइयों में जाने का प्रयास करते है।
फॉर्मल एजुकेशन में शरीर विज्ञान को जीवशास्त्र कहा जाता है। अध्यात्म एजुकेशन में आत्म विज्ञान को आध्यात्म शास्त्र कहा जाता है। जीवशास्त्र और आत्म विज्ञान दोनों को मिलाया जाए, तो कहेंगे जीवात्मा का शास्त्र अर्थात् जीव और आत्मा का ज्ञान। जीव अर्थात शरीर नाशवान है,कुछ काल के बाद इसका विनाश हो जाता है परन्तु आत्मा अर्थात चेतना, ऊर्जा जिसका विनाश नहीं होता। हम सभी जानते है शरीर विज्ञान में शरीर के विभिन्न अंगों के बारे में जानकारी होती है। शरीर के गतिविधियों की जानकारी होती है लेकिन आत्म विज्ञान इससे बहुत ही अलग है और चमत्कारिक है। आत्मा अपने आपमें चमत्कार है जिसमें सोचने ,समझने और कर्म करने की शक्ति होती है। आत्म मन द्वारा सोचती है। आत्मा बुद्धि द्वारा निर्णय करती है और स्थूल कर्म शरीर के अंगों द्वारा करती है। इस तरह अपने ही मन,बुद्धि और संस्कारों तथा आसपास के लोगों और वायुमंडल पर प्रभाव डालती है। इसलिए अपनी सोच को बहुत ही सकारात्मक बनाना चाहिए। यह कला आध्यात्म ज्ञान द्वारा प्राप्त होता है। धीरे धीरे हम इस अध्यात्म ऊर्जा की ओर बढ़ेंगे और परमात्म ऊर्जा , विशाल ब्रह्मांड की सच्चाई को जानने, प्रेरक सकारात्मक आकाँक्षाओं की प्रेरणा लेंगे।

