परमात्मा ऊर्जा अध्यात्म की ओर प्रेरित करता है। आज हम देखते है क्या है आत्मा? आत्मा में मन, बुद्धि और संस्कार है। शरीर में मस्तिष्क, आंखे, कान, नाक, हृदय, हाथ,पाव आदि है लेकिन जब तक इसमें ऊर्जा आत्मा प्रवेश न करे तब तक कार्य नहीं कर सकते। आत्मा शरीर में प्रवेश करते ही सोचने,देखने,बोलने का कार्य करती है।
ओम् माना अहं आत्मा हूँ और मेरा शरीर है। आत्मा तो देखने में नहीं आती है। यह समझ में आता है – मैं आत्मा हूँ, यह मेरा शरीर है। आत्मा में ही मन-बुद्धि है। शरीर में बुद्धि नहीं है। आत्मा में ही संस्कार अच्छे वा बुरे रहते हैं। मुख्य है आत्मा। उस आत्मा को कोई देख नहीं सकते हैं। शरीर को आत्मा देखती है। आत्मा को शरीर नहीं देख सकता। हम सभी जान सकते हैं कि आत्मा निकल जाती है तो शरीर जड़ हो जाता है। आत्मा देखी नहीं जाती है, शरीर देखा जाता है।
आजकल डॉक्टर्स भी मानते है कि हम केवल शरीर को ठीक करते है लेकिन अगर इसमें से ऊर्जा, आत्मा निकल गई तो हम भी कुछ नहीं कर सकते। शरीर में बढ़ने की चेतना भी तब आती है जब इसमें चैतन्य आत्मा प्रवेश करती है नहीं तो शरीर मृत पड़ा रहेगा। शरीर की बढ़ने की प्रक्रिया अलग है, आत्मा की उन्नति, सदगति या आध्यात्म पथ पर बढ़ने की प्रक्रिया अलग है। शरीर रूपी प्रकृति को खाना पीना आदि दिया जाए तो वह अपने आप बढ़ते जाती है। लेकिन उस प्रक्रिया में भी आत्मा का बहुत बड़ा रोल होता है। जैसे कि आपके पास पंखा लगा है, कनेक्शन भी है लेकिन करंट नहीं है तो वह नहीं चल सकता इसी तरह शारीर में भी सभी अंग कार्य तब करेंगे जब करंट अर्थात ऊर्जा का प्रवेश होगा। इस ऊर्जा को धीरे धीरे जानेगे,समझेंगे तब ब्रह्मांड के सत्य और परमात्म ऊर्जा तक पहुंच सकेंगे।

