Homeसंपादकीयसमय की मेगा सेल में हम क्या बटोर रहे हैं ?

समय की मेगा सेल में हम क्या बटोर रहे हैं ?

परमात्मा ने हमें अनेक शक्तियाँ दी हैं-सहन करने की, सामना करने की, सही निर्णय लेने की, समाने की, क्षमा करने की, और परिस्थितियों को सहजता से पार करने की। ज्ञान भी हमारे पास है और इन शक्तियों की पहचान भी। फिर भी जब जीवन में कोई वास्तविक परिस्थिति आती है, कोई अपमान कर देता है, हमारी बात नहीं मानता या अचानक कोई परेशानी सामने आती है, तब लगता है जैसे हमारी शक्तियां कहीं छिप गई हैं।
यही हमारे पुरुषार्थ की सच्ची परीक्षा है। ज्ञान सुनते समय शांत रहना आसान है, लेकिन परिस्थिति के बीच उसी ज्ञान को याद रखना और व्यवहार में लाना ही वास्तविक सफलता है।
मान लीजिए, किसी बड़े मॉल में केवल दस मिनट के लिए मेगा सेल लगी है और इन दस मिनटों में जो भी सामान आप ले लेंगे, वह हमेशा के लिए आपका हो जाएगा। क्या आप इन दस मिनटों में किसी की बुराई करेंगे या सोशल मीडिया में समय गँवाएंगे? बिल्कुल नहीं। आप हर सेकंड का मूल्य समझकर उपयोगी वस्तुएं अपनी झोली में भरेंगे।
संगमयुग का यह समय भी एक आध्यात्मिक मेगा सेल जैसा है। समय सीमित है, लेकिन इस समय किया गया श्रेष्ठ पुरुषार्थ हमारे भविष्य की स्थायी आध्यात्मिक कमाई बन सकता है। फिर हम अपना समय व्यर्थ संकल्पों, तुलना, नाराज़गी, दूसरों की जाँच-पड़ताल और पुरानी बातों को दोहराने में क्यों गँवाएं?
हमारा प्रत्येक व्यर्थ संकल्प ऐसा है जैसे हमने अपनी आध्यात्मिक झोली से कोई कीमती हीरा बाहर फेंक दिया हो। इसके विपरित, हर श्रेष्ठ संकल्प, शांत प्रतिक्रिया और सकारात्मक कर्म हमारी कमाई बढ़ाता है।
जब कोई हमारी बात के विपरीत व्यवहार करे,तो तुंरत स्वयं से पूछें-”मैं कौन हूँ?” मैं देह नहीं, आत्मा हूँ। मैं शिवबाबा का बच्चा हूँ। मैं शांति, प्रेम और शक्ति का स्वरूप हूँ। बस कुछ सेकंड रूक जाएं। प्रतिक्रिया देने से पहले लिया गया यह छोटा-सा विराम हमें कमज़ोरी से शक्ति की ओर ले जाता है।
हमारी एक आध्यात्मिक सीट भी है- स्वमान की सीट। जब हम स्वमान में होते हैं, तो हमारी शक्तियां सहज रूप से काम करती हैं। लेकिन देहभान आते ही हम सोचने लगते हैं- ”उसने मुझे ऐसा कैसे कह दिया?” यही वह क्षण है जब हमें अपनी सीट पर वापस बैठना है।
अमृतवेला केवल उठकर बैठने का नाम नहीं, बल्कि अपने रूहानी स्वरूप का अनुभव करने का समय है। स्वयं को लाइट और माइट का स्वरूप समझें और परमात्मा से शक्ति लेकर दिनभर उसका प्रयोग करें। दिन में बार-बार स्वयं से पूछें- आज मैं क्या कमा रहा हूँ? व्यर्थ संकल्प या श्रेष्ठ संकल्प? शिकायत या शक्ति? प्रतिक्रिया या शांति?”
अवसर हमारे पास है, ज्ञान हमारे पास है और मार्गदर्शन भी। आवश्यकता केवल इतनी है कि जो जानते हैं, उसे सही समय पर याद करें और जीवन में प्रयोग करें।
इसलिए आज से अपनी छोटी-छोटी चेकिंग शुरू करें। परिस्थिति आए-रुकें। एक क्षण स्मृति में आयें- ”मैं आत्मा हूँ।” अपनी सीट पर बैठें- मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ।” फिर कर्म करें।
याद रखें, हर परिस्थिति हमें गिराने नहीं, अपनी शक्ति पहचानने का अवसर देने आती है। जब संगमयुग की यह मेगा सेल समाप्त होगी, तब हमारी झोली शांति, शक्ति, प्रेम और श्रेष्ठ संकल्पों के आध्यात्मिक खज़ाने से भरी हो।

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