प्रश्न : मेरा नाम रोहन है। क्या मेडिटेशन से डिफेक्टिव कलर विज़न को ठीक किया जा सकता है? ये एक जैनेटिक डिजीज है और मेडिकल साइंस में इसका कोई भी ट्रीटमेंट नहीं है।
उत्तर : देखिए हम हमेशा से ही ये बात कहते आ रहे हैं मेडिकल साइंस आजकल हर बीमारी को ठीक नहीं कर पा रही। मानसिक रोग तो ऐसे-ऐसे हो रहे हैं जिसमें मेडिकल साइंस तो कुछ कर ही नहीं पा रही है। बहुत सारी बीमारियां भी आजकल निकल गई हैं जिनका कोई इलाज हमारी मेडिकल साइंस के पास नहीं होता। पर इस स्पिरिचुअल साइंस के पास होता है। बीमारियों का एक कारण पूर्व जन्मों के कर्म भी होते हैं। बीमारी का एक कारण मानसिक टेंशन भी रहती है। निगेटिव थिंकिंग भी रहती है। और कहीं न कहीं हर बीमारी इधर से ब्रेन से ही शुरू हो रही हैं। बीज कहीं न कहीं मनुष्य के ब्रेन में है। कहीं न कहीं मनुष्य का खान-पान भी ऐसा है, मनुष्य क्या-क्या खा रहा है उससे भी बीमारियां पैदा हो रही हैं। तो डॉक्टर लोग तो केवल वर्तमान रिज़न देखेंगे ना! लेकिन बीज कहाँ है ये हर डॉक्टर को पता नहीं चल सकता।
इसलिए स्पिरिचुअल पॉवर अपने में भरने से कई बीमारियां ठीक हो जाती हैं। इनको एक अपनी आँखों को प्युअर एनर्जी देनी होगी। एक ये अभ्यास करेंगे जो हम बहुत बार बताते हैं- हाथों को मलते हुए तीन बार ये अभ्यास करेंगे कि मैं परमपवित्र आत्मा हूँ और अपने हाथों को अपनी आँखों पर रखेंगे एक मिनट। फिर करेंगे प्युअर वायब्रेशन्स आँखों को जा रहे हैं और मेरी आँखों को नॉर्मल कर रहे हैं। जो भी ये डिफेक्ट है भिन्न-भिन्न कलर्स का वो समाप्त हो रहा है। ऐसा आपको दस बार करना है। दूसरा अभ्यास, पानी को इसी संकल्प से चार्ज करेंगे कि मैं परम पवित्र आत्मा हूँ। आधा गिलास पी लें और आधा गिलास आँखों पर छिडक़ दें। तीसरा अभ्यास, ब्रेन को एनर्जी देंगे। और इसके लिए संकल्प करेंगे मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ। तीन बार करके एक मिनट अपने सिर पर हाथ रखेंगे। एक-एक मिनट कर ऐसा दस बार करना है। और चौथा अभ्यास, विज़न बनाएंगे। विशेषकर रात को सोते समय और सुबह उठते ही मैं इस बीमारी से मुक्त हूँ। अब मान लो मैं पढ़ रहा हूँ और दूर तक देख रहा हूँ। मुझे बिल्कुल क्लियर विज़न है कोई समस्या नहीं है। और साथ में इम्र्पोटेंट ये है कि एक घंटा पॉवरफुल राजयोग का अभ्यास, मेडिटेशन करें। मेडिटेशन से वो विकर्म भी नष्ट होंगे जो बीमारी का मूल आधार बने हुए हैं। हमने किस जन्म में न जाने क्या किया है, किस पाप-कर्म के कारण हमारी विज़न में ये डिफेक्ट आ गया है। राजयोग ऐसी विद्या है जो धीरे-धीरे सीखनी होती है। क्योंकि मनुष्य का मन बहुत भटकता है। विद्या तो इतनी है कि आत्मिक स्वरूप में स्थित होकर परमात्मा से अपना नाता जोड़ो उसे विज़ुअलाइज़ करो और उसकी एनर्जी को रिसीव करो। उससे बात करो, उसका लव फील करो। उसकी शांति को अनुभव करो, उसकी शक्तियों को अनुभव में लाओ।
इसलिए हम सभी को राय देंगे और देते हैं कि हमारे सेवाकेन्द्रों पर जाकर 7दिन का कोर्स अवश्य करें। ताकि जो ईश्वरीय ज्ञान है, प्रारम्भिक ज्ञान जो है वो आपको क्लियर हो जाये। तब राजयोग में और आनंद आएगा और आपको पूरी नॉलेज मिलेगी कि मैं कौन हूँ, भगवान है कौन? इस संसार का चक्र क्या है? कर्मों की गुह्य गति कैसी है? और राजयोग का सही-सही तरीका क्या है? हो सकता है समय लग जाये लेकिन तीन मास तक तो हम करने को अवश्य कहेंगे।
प्रश्न : मुझे ऐसा लगता है कि जैसे सांप मेरे शरीर पर चढ़ रहे हैं। कहीं पर भी मैं बैठी हूँ कभी लगेगा की पैर पर सांप चढ़ रहा है। जैसे ही मैं बिस्तर पर गईं तो पीठ पर लगने लगता है कि जैसे सांप है तो ऐसे में ज़ोर से चीख पड़ती थीं। होता कुछ भी नहीं लेकिन ये फीलिंग आती रहती है कि जैसे सांप है और वो मुझे काट लेगा। ऐसी समस्या में क्या किया जाए?
उत्तर : इसमें दो चीज़ें होती हैं, एक तो मानसिक रोग भी हो सकता है और दूसरा ये सब जो है ब्लैक मैजिक का इफेक्ट भी हो सकता है। तंत्र-मंत्र का इफेक्ट लोग करा देते हैं, दूसरे को परेशान करने के लिए। ऐसे में आपको किसी साइकेट्रिक को भी दिखा देना चाहिए। पूर्व जन्म में भी कुछ ऐसी घटनाएं घटी हैं मनुष्य के साथ, सब्कॉन्शियस माइंड में बहुत बुरी तरह से छा गई हैं। उसका इफेक्ट भी रहता है। तो आपको अभ्यास ये करना है- सवेरे उठकर आपको लिखना है 108 बार कि मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ। शाम को भी लिखें कि मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ। लास्ट में गुड फीलिंग के साथ, गुड अवेयरनेस के साथ मैं इस बाधा से मुक्त हूँ। मैं बिल्कुल फ्रेश हूँ। मेरा तन भी बिल्कुल क्लीन है, फ्रेश है। मैं इस ब्लैक मैजिक के इफेक्ट से मुक्त हूँ, ऐसे संकल्प करें। सवेरे भी 108 बार मास्टर सर्वशक्तिवान का अभ्यास करें और रात को भी 108 बार। तो काफी मदद मिल सकती है। ऐसे में कई बार होता है मनुष्य कर नहीं पाता। क्योंकि ये ब्लैक मैजिक का इफेक्ट इतना बुरा होता है कि मनुष्य को मानसिक रूप से कमज़ोर कर देता है। तो इसमें चाहिए उनको कोई साथी, जो उसके साथ बैठे और कराए कि लिखो। क्योंकि मनुष्य 10-20 बार लिख कर छोड़ देता है कि छोड़ो ये क्या है। कोई उसके साथ बैठे कि चलो पहले 21 बार लिखो, फिर 31 बार, 10-10 बढ़ाएं और ये संकल्प करें तो धीरे-धीरे उसमें रूचि पैदा हो जाएगी और सब ठीक होने लगेगा। अगर कोई मानसिक परेशानी है तो भी इससे निकल जाएगी और कोई ब्लैक मैजिक किया है तो भी इससे निकल जाएगा।
