मथुरा,उत्तर प्रदेश। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रिफाइनरी नगर स्थित स्थानीय सेवा केंद्र पर बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक दशहरा महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रामलीला विशेष आकर्षण का केंद्र रही। कलाकारों ने मेघनाद वध, सीता हरण और भरत मिलाप सहित विभिन्न प्रसंगों का सजीव मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में अहंकार रूपी रावण के दहन के साथ बुराइयों को त्यागने का संदेश दिया गया।
सेवा केंद्र प्रभारी राजयोगिनी बीके कृष्णा दीदी ने दशहरे का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि रावण के दस सिर मनुष्य के दस मनोविकारों—काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष, नफरत, आलस्य और अलबेलेपन के प्रतीक हैं। इन विकारों का समूल नाश आत्मिक ज्ञान रूपी बाण से ही संभव है।
मथुरा रिफाइनरी के चीफ मैनेजर एवं राजयोग प्रशिक्षक बीके प्रमोद भाई ने मनोविकारों से मुक्ति के लिए राजयोग मेडिटेशन को प्रभावी माध्यम बताया। बीके मनोज भाई ने विकर्मों के विनाश हेतु सामूहिक ज्वालामुखी स्वरूप योगाभ्यास कराया।
रामलीला में तमन्ना, रिया, कृष्णा, लव, कुश और सोनू सहित बाल कलाकारों ने सहभागिता की। मंच संचालन बीके आलोक भाई ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन बीके पूजा बहन ने प्रस्तुत किया। आयोजन की सफलता में बीके सौरभ, बीके मनोहर, गौरी सहित अन्य सहयोगियों का विशेष योगदान रहा।









