Homeलेखचेतना के प्रकाश में दीवाली का एहसास

चेतना के प्रकाश में दीवाली का एहसास

समय अपनी गति से आगे बढ़ता है और व्यक्ति परिस्थिति और आने वाली उठा-पटक के बीच अपनी उन्नति को या अवनति को देखता है। कहते हैं – समाज है, समुदाय भी है लेकिन सबके अपने-अपने नियम और कानून हैं। और उस काननू के दायरे में रहकर कार्य न करें तो समाज क्या कहेगा, समुदाय क्या कहेगा, ये बात चलती है। स्वाभाविक-सी बात है, चलनी ही है, चलेगी, लेकिन कई बार लगता है कि इतने समय से सबकुछ चल रहा है फिर भी एक दिन की रोशनी हमेशा के अंधेरे को नहीं मिटाती, ये हमें भी लगता है।
तो व्यक्ति त्योहार मना रहा है, और वो यादगार का त्योहार मना रहा है। क्योंकि कोई भी चीज़ इस दुनिया में अगर मनाई जाती है तो कभी न कभी तो उसका प्रादुर भाव हुआ है इस धरती पर। और वो आज एक त्योहार के रूप में सामने है। लोग मनाते हैं और भूल जाते हैं लेकिन हम सबकी अब जिम्मेवारी बनती है कि उस बात को समझें और सबके सामने रखें। उदाहरण के लिए हम सबके अन्दर का जो एहसास है, जो चेतना है वो बुझी-सी है, अंधकार में है। उसमें बहुत सारे अंधकार के बल हैं। अज्ञानता है, अपवित्रता है, अशांति है, दु:ख है, तकलीफ है, दर्द है और उससे हमारी आत्मा पूरी तरह से घिरी हुई है। जब हम उसको निकालने बैठते हैं तो हमारे आस-पास बंधन आते हैं। इतने सारे बंधन देखकर और अंधकार बढ़ता जाता है। तो जब हम इसको समझने का प्रयास करते हैं, उस प्रकाश को फील करने के लिए जब हम बाहर जाते हैं और अपनी समझ, अपनी जागृति को बढ़ाते हैं तो वो धीरे-धीरे अंधकार प्रकाश की दिशा में आगे बढ़ता है। और धीरे-धीरे चेतना जागृत होती है।
चेतना के प्रकाश का एक उदाहरण ये है कि हम सभी हर कार्य करते हैं लेकिन कार्य से खुद को अलग रखते हैं, कार्य को अलग रखते हैं। हरेक चीज़ से जब हम जुडऩा बंद कर देते हैं तो हमारी खुशी बढऩी शुरु हो जाती है। और खुशी ही जीवन का वो प्रकाश है, जो हमेशा बिना कंडीशन के जलता रहता है, बिना शर्त के जलता है। और इसी बात को अगर हम सभी जीवन में अपना लें कि हर कार्य को करें, छोड़ें, व्यक्ति से मिलें, घुलें, कार्य किया, चले गए, ऐसे ही अपने कर्म, चेतना, बुद्धि, मन हरेक चीज़ को जितना हम समझते जाते हैं उतना अन्दर उजाला होता जाता है। और जब ये उजाला पूरा प्रवीण हो जाता है तो हम सभी के जीवन में हमेशा प्रकाश रहता है।
और इसी प्रकाश को अगर हमने जगा लिया तो बाहर की दीवाली परफेक्ट हो जाएगी। और वो दीवाली हमेशा सबके अन्दर, ज़हन में जलती रहेगी चाहे दीपक में तेल हो, ना हो लेकिन सारा चीज़ आपके साथ हमेशा होता रहेगा। जीवन खुशियों से भरा रहेगा तो इस दीवाली इस तरह से चेतना के प्रकाश को जगाकर फैलाएं। और एक सुन्दर-सी दीवाली मनाएं।

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