अंबिकापुर,छत्तीसगढ़। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, अंबिकापुर सेवा केंद्र में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास एवं आध्यात्मिक वातावरण में धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में श्रीकृष्ण के जीवन एवं सतयुगी संस्कृति की सुंदर झांकी के साथ विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।
इस अवसर पर सेवा केंद्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी ने सभी को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि निराकार परमात्मा शिव का रात्रि के समय, अर्थात कलियुग के अंत में, ब्रह्मा तन द्वारा इस धरा पर अवतरण होता है। परमात्मा अपने सत्य ज्ञान के माध्यम से मनुष्य को काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसी आंतरिक बुराइयों से मुक्त कर आत्मा को पावन बनाने का मार्ग बताते हैं। जब मनुष्य इन विकारों से मुक्त होकर पूर्ण पवित्र बनता है, तब वह सद्गति की दुनिया में प्रवेश करता है, जिसे सतयुगी दुनिया कहा जाता
उन्होंने कहा कि सतयुग की दुनिया के प्रथम राजकुमार श्रीकृष्ण होते हैं। श्रीकृष्ण ही आगे चलकर श्री नारायण और राधा आगे चलकर श्री लक्ष्मी बनती हैं। लक्ष्मी-नारायण का संयुक्त राज्य ही स्वर्ग की निशानी माना जाता है। जन्माष्टमी हमें अपने जीवन में श्रीकृष्ण के समान पवित्रता, प्रेम, शांति और दिव्य गुणों को धारण करने की प्रेरणा देती है।
कार्यक्रम में बच्चों एवं युवाओं द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। अदिति ने सुंदर नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं खुशी गुप्ता, खुशी, रोशनी, अनुष्का एवं क्षितिज द्वारा आकर्षक नृत्य एवं नाटक की प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
इस अवसर पर बीके ज्योति एवं बीके प्रतिमा द्वारा सुंदर गीत प्रस्तुत किए गए। पूरे कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिकता एवं उमंग-उत्साह का वातावरण बना रहा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लेते हुए श्रीकृष्ण के दिव्य चरित्र एवं सतयुगी संस्कृति को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का समापन सभी को जन्माष्टमी की शुभकामनाओं एवं प्रसाद वितरण के साथ किया गया।





