Homeदादी जीदादी हृदयमोहिनी जीविदेशी भाई-बहनों द्वारा पूछे गए प्रश्न... दादी जी के शब्दों में उत्तर

विदेशी भाई-बहनों द्वारा पूछे गए प्रश्न… दादी जी के शब्दों में उत्तर

प्रश्न:-अशरीरी, फरिश्ता और बीजरूप अवस्था में क्या अन्तर है? इन अवस्थाओं का अनुभव कैसे कर सकते हैं?
उत्तर:- सबसे पॉवरफुल और फस्र्ट स्टेज है बीजरूप बनना। बीजरूप अर्थात् जैसे वृक्ष का बीज होता है, सारे वृक्ष में टाल-टालियां, फल-फूल की ताकत अपनी-अपनी होती लेकिन बीज में सब शक्तियां इक्_ी और मर्ज रूप में होती हैं। ऐसे ही जब हमारी बीजरूप स्टेज होती है, उसमें दूसरी सब स्थितियां लाइट हाउस, माइट हाउस, सर्वशक्ति सम्पन्न स्टेज या फरिश्तापन वा रूहरिहान की स्टेज, सब बीजरूप स्थिति में समाई हुई हैं। जिस समय हम बीजरूप स्थिति में स्थित होते हैं उस समय सर्वशक्तियाँ, सर्वगुण, सर्वसंबंध सबका रस हमारे में भरा होता है। इमर्ज रूप में नहीं होता। इमर्ज रूप में तब हो जब कर्म या वाणी में आयें। रूहरिहान में संकल्प द्वारा बाबा से बातचीत करते हैं। बीजरूप स्टेज में सर्वशक्तियों का सार है। सर्व स्थितियों का सार रूप जो है वह बीजरूप है। बीजरूप स्थिति में हम यह नहीं कह सकते कि इस स्थिति की अनुभूति कम है। उस समय फीलिंग आएगी जैसे सर्व प्राप्तियों का स्वरूप हैं। सबकुछ बीजरूप स्थिति में समाया हुआ है।
अशरीरी स्टेज अर्थात् शरीर के भान से परे। शरीर का भान अपने तरफ ने खींचें। लेकिन अशरीरी स्थिति के बाद ही हम बीजरूप स्थिति व फरिश्ता-पन की स्थिति का अनुभव कर सकते हैं। अशरीरी बनें तो फरिश्ता बनकर काम-काज करते कर्मयोगी रहेंगे। कर्म का बंधन है तो न चाहतेे भी वह अपनी तरफ खींचेगा। तो बंधन माना फँसना, परवश हो जाना। लेकिन कर्मयागी बनकर कर्म के संबंध में आना यह है ब्राह्मण जीवन। जब कर्मक्षेत्र पर हैं, कर्मेन्द्रियों का आधार लिया तो कर्म के बंधन से अतीत होंगे, कर्म से नहीं। अशरीरी होकर हर कर्म में आयेंगे। फरिश्ता रूप में कर्म करते हर कर्म से न्यारे रहेंगे। फरिश्ता अर्थात् जिसका देह और देह के संबंध व पदार्थों से रिश्ता न हो। तो हम अशरीरी बनकर शरीर के आकर्षण से परे होकर जो कर्म करते हैं वही फरिश्ता स्टेज है। फरिश्ता माना बंधन से परे। फरिश्ते को लाइट की काया है। तो फरिश्ता स्टेज में हड्डी-मास के शरीर का भान नहीं होता है। हम इससे न्यारे, डबल लाइट होते हैं। अगर हम अशरीरी होकर बीजरूप स्थिति में स्थित होते हैं तो लगता है जैसे कि बाबा के बिल्कुल समीप परमधाम में ऊंची से ऊंची स्थिति, ऊंचे स्थान से बाबा के साथ लाइट-माइट की किरणें सूर्य के मुआफिक चारों ओर फैला रहे हैं। बीजरूप स्टेज जैसे ऊंचे से ऊंची प्वाइंट है। बाबा के समीप समान हैं, उसमें सब रस भरे हुए हैं। बीजरूप स्टेज ज्यादा टाइम नहीं रहती है, थोड़ा टाइम रहती है फिर फरिश्ता रूप में या मनन में आ जाएंगे। बीजरूप स्टेज पॉवरफुल बाप समान स्टेज है उसमें इतनी लाइट-माइट होती जोकि विकर्म भस्म हो जाते हैं। यह थोड़े समय की स्टेज भी बहुत मदद देने वाली है। एक-दो घंटे भी उस स्टेज का अभ्यास करो तो ऑटोमेटिक वह स्टेज अपनी तरफ खींचती रहेगी। उसकी मदद से जैसे उपराम होते जाएंगे। कर्म करते भी करावनहार बाबा याद रहेगा। लेकिन बीजरूप व फरिश्ता रूप स्टेेज का अनुभव करने के लिए अशरीरी तो बनना ही पड़ेगा।

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