मन की बातें

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प्रश्न : एक ऐसी मान्यता है कि यदि लड़की और लड़का अविवाहित रह जायें तो उनकी कामनायें जोकि अतृप्त रह जाती हैं इसलिए वो भटक जाती हैं, क्या ये सत्य है? उत्तर : कामनायें अतृप्त रह जाती हैं, लेकिन वो भटकेंगी नहीं अगर वो योगाभ्यास करेंगे बहुत अच्छा तो। क्योंकि इनकी जो वासनाओं की कामना है ना वो चैनलाइज़ हो जायेंगी। वो जो शक्ति है फिजि़कल पॉवर, वो स्पिरिचुअल पॉवर में बदल जायेगी और वो पॉवर उनको बहुत डिवाइन कर देगी और आनंद में रखेगी तो मन जब आनंद में होगा वासनाओं की ओर जो मन खींचा रहता है उससे मुक्त हो जायेंगे। ये बिल्कुल नैचुरल है जो अविवाहित रह गये, पवित्रता की धारणा के लिए उनके पास कुछ नहीं है तो उनकी वासनायें उन्हें सतायेंगी। वो इधर-उधर भी भटकेंगी अवश्य। लेकिन राजयोग के अभ्यास से इन वासनाओं को न्यूट्रल करने की शक्ति आ जाती है। तो वासना शुभ कामनाओं में बदल जाती है, ये फिजि़कल आनंद स्पिरिचुअल आनंद में बदल जाती है। और तब उनको भटकना नहीं पड़ता।

प्रश्न : मैं हैदराबाद से शालिनी शर्मा हूँ। योग के बहुत अलग-अलग स्वरूप हैं। कभी रूहरिहान की बात की जाती है, कभी ड्रिल की बात की जाती है, कभी बीज रूप की बात की जाती है तो मन में कन्फ्यूज़न होता है कि हम क्या करें, क्या न करें। तो क्या इसका कोई क्रम नहीं कि हम यहाँ से शुरुआत करें और यहाँ तक पहुंचें या इन सबको मिला-जुला कर भी किया जा सकता है? उत्तर : हरेक अभ्यासी की अपनी-अपनी मेंटेलिटी होती है। किसी को अपनी मन स्थिति को स्थिर करने के लिए प्रारम्भिक अभ्यास करने आवश्यक होते हैं। इसके लिए पाँच स्वरूपों का अभ्यास बहुत काम करता है। इससे नये-नये थॉट क्रियेट होते हैं और पुराने थॉट सब समाप्त हो जाते हैं। दूसरे कुछ ऐसे अभ्यासी होते हैं जिन्हें एकाग्रता की बहुत ज़रूरत होती है। तो स्पिरिचुअल ड्रील, रूहानी ड्रील, तीनों लोकों में जाना और वापिस आना इसके द्वारा एकाग्रता बहुत बढ़ जाती है और लम्बे समय तक योग का आनंद ले सकते हैं। पॉवरफुल योग कभी परमधाम में, कभी किरणों के नीचे, कभी उसकी छत्रछाया के नीचे, इसे ज्वालास्वरूप योग, पॉवरफुल योग कहते हैं। ये भी करना है तो हर तरह के योग अभ्यास को अपनाना चाहिए। क्योंकि हरेक से अनुभूति अलग-अलग होगी। लेकिन फाइनल यही है कि हम परमात्मा से जुड़ जायें। उसके पास जाकर बैठ जायें, उससे आनंद के वायब्रेशन महसूस करें। उसकी शक्तियों को, उसकी एनर्जी को अपने में भरें। जब भी योग में बैठें तो 10 मिनट पहले ये लक्ष्य ले लें कि 10 मिनट मुझे ये अभ्यास करने हैं, इस तरह से वायब्रेशन्स फैलाने हैं।

प्रश्न : मैं मोहम्मद अकबर हूँ, मुम्बई से। आपने चर्चा की थी कि योग को मनोरंजन और रूचिकर भी बनाया जा सकता है। अब तक तो हमने सुना था कि जब हम ध्यान करते हैं तो ध्यान करने के बाद बिल्कुल एकाग्रता आती है। योग को कैसे मनोरंजक बनाया जाये और हम समाज में रहते हुए भी कैसे सबके साथ बैलेन्स बना कर रखें? उत्तर : बहुतों के साथ ये बातें हो ही रही हैं। नई-नई भी बहुत आत्मायें राजयोग सीखने आ रही हैं और उन्हें इन चीज़ों की बहुत ज़रूरत होती है ताकि वो अपने सोशल लाइफ में रहते हुए या कहीं कार्यरत होते हुए या कोई अच्छे अधिकारी होते हुए योग को एन्जॉय कर सकें। केवल यदि यही बताया जाता है कि चलो योग लगा लो, तो ये पर्याप्त नहीं है। लगाना तो योग ही है लेकिन उसका 16 तरीकों से अभ्यास किया जा सकता है। जैसे किसी काम में आप अभ्यास कर लें कि मैं आत्मा यहाँ बैठी हूँ, हाथों द्वारा काम कर रही हूँ। मान लो आप पेंटर हैं तो आपकी बहुत अच्छी एकाग्रता हो जायेगी। मैं आत्मा हाथों द्वारा पेंटिंग कर रही हूँ। आप भोजन बना रहे हैं तब भी ये अभ्यास कर लें- मैं परमपवित्र आत्मा हूँ, बाबा के लिए भोजन बना रही हूँ। और बाबा से बीच-बीच में बातें करते रहें कि बाबा देखो मैं आपके लिए दाल बना रही हूँ। मैंने कितनी अच्छी रोटी बनाई है, खा लेना अच्छे से। जलने नहीं दी है। देख लेना नमक बिल्कुल अच्छा डाला है फिर न कह देना कि ज्य़ादा हो गया। सब खा लेना, मैंने बहुत प्यार से बनाया है आपके लिए। ऐसे बाबा से बातें करते हुए भोजन बनायें। कपड़े धो रहे हैं, सफाई कर रहे हैं, सफाई करते हुए संकल्प कर लें हज़ार भुजाओं सहित बाबा मेरे साथ हैं, तो सफाई करने में बड़ा आनंद आयेगा। बाबा मैं घर की सफाई कर रही हूँ, आप मेरी बुद्धि की सफाई करते रहना। मेरी बुद्धि में कोई कचरा न आने पाये। मैं भी ध्यान रखूंगा, आप भी ध्यान रखना। कपड़े धो रहे हैं, तो ये देह भी मेरा वस्त्र है इसको भी मुझे स्वच्छ रखना है। फिर अभ्यास कर लें कि बाबा की किरणें मुझ पर पड़ रही हैं। जब टैप से पानी पड़ेगा ना तब सोचना है कि ऊपर से शक्तियों का फाउंटेन मेरे ऊपर पड़ रहा है। पानी पीना है, चाय पीनी है तो 2-3 बार अभ्यास कर लें कि मैं पवित्रता का फरिश्ता हूँ। तो ये मनोरंजन हो जायेगा। एक बहुत अच्छा इंट्रस्टिंग अभ्यास मैं बता रहा हूँ- हम ऐसा देखें हमारी लेफ्ट साइड में ब्रह्मा बाबा है। सूक्ष्म रूप में वो हमारी माँ है। उनके मस्तक से शीतल किरणें मुझे आ रही हैं। 10 सेकण्ड महसूस करेंगे कि मेरे चित्त को शीतल कर रही हैं। फिर अपने राइट साइड में देखें ज्ञान सूर्य शिव बाबा है। अब उससे शक्तियों की किरणें निकल कर मुझ पर आ रही हैं। फिर ब्रह्मा बाबा से शीतलता की किरणें। फिर शिव बाबा से शक्तियों की किरणें। इस तरह से करते रहें तो मनोरंजन हो जायेगा। खेल हो जायेगा और हम योग के नये-नये तरीके सीखते जायेंगे। ऐसे ही सकाश देने की बात होती है, संसार को वायब्रेशन देने की बात होती है उसको भी हम वैरायटी ढंग से करेंगे तो ये मनोरंजन भी हो जायेगा और हमारे चित्त को भी बड़ा सुकून देगा।

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