Homeलेखएक प्रेमपूर्ण श्रद्धांजलि : मुझे केवल एक नाम ही नहीं दिया,...

एक प्रेमपूर्ण श्रद्धांजलि : मुझे केवल एक नाम ही नहीं दिया, बल्कि एक नया जीवन दिया -बी.के.आनंद भाई ,शांतिवन,प्रेरणा निवास.

राजयोगी बी.के. बृज मोहन भाई जी ने मुझे केवल एक नाम ही नहीं दिया, बल्कि एक नया जीवन दिया। जीवन के हर कदम पर उन्होंने मेरा हाथ थामा और सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए मेरा मार्गदर्शन किया।

पहली मुलाकात और एक नया नाम: जब मैं नेपाल से दिल्ली के पांडव भवन आया, तब पहली बार हमारी मुलाकात वरिष्ठ भाई राजयोगी बृज मोहन जी से हुई। उन्होंने बहुत प्रेम से पूछा, “तुम्हारा नाम क्या है?” मैंने कहा, “मेरा नाम रघुनाथ है।” वे मुस्कुराए और बड़े अपनत्व से बोले, “यहाँ पहले से ही एक रघु भाई हैं। आज से तुम्हारा नाम आनंद होगा।” और उसी क्षण से मैं आनंद बन गया।

लेकिन भाई जी ने मुझे केवल एक नया नाम नहीं दिया, उन्होंने मुझे एक नया जीवन दिया। मेरे माता-पिता ने नेपाल में उन्नीस वर्ष तक मेरा पालन-पोषण किया। उसके बाद अगले सत्ताईस वर्षों तक भाई जी ने मेरी देखभाल एक पिता की तरह की।

उन्होंने कभी ऊँची आवाज में बात नहीं की, कभी क्रोध नहीं किया। मैं उन्हें अपना पिता मानता था और वे मुझे अपने बेटे की तरह देखते थे। कभी वे मुझे आनंद कहते, कभी नंदू और कभी बहुत प्यार से केवल “बच्चा” कहकर पुकारते।

जीवन के हर कदम पर उन्होंने मेरा हाथ थामा और मुझे आगे बढ़ाया—ठीक वैसे ही जैसे एक पिता चलना सीखते बच्चे को संभालकर आगे बढ़ाता है। उन्होंने मुझे केवल चलना नहीं सिखाया, बल्कि जीवन में कैसे चलना है, यह सिखाया।

पिता का हाथ, गुरु का हृदय : आज बाबा हमारे साथ हैं और भाई जी भी हमारे साथ हैं। बहनों और पूरे ब्राह्मण परिवार का प्रेम, सहयोग और शक्ति हमारे चारों ओर है। भाई जी ने मुझे जीवन जीने की कला सिखाई—हर कार्य में, हर जिम्मेदारी में और हर क्षण में। रसोई के छोटे-छोटे कामों से लेकर सेवा के श्रेष्ठ कार्यों तक, उन्होंने मुझे बहुत धैर्य और प्रेम से सिखाया। वे मेरे लिए निमित्त, मार्गदर्शक, गुरु, शिक्षक, पिता और साथी—सब कुछ बन गए। आज मैं जो कुछ भी हूँ, उसमें उनका बहुत बड़ा योगदान है।

अनुशासन और गहन योगमय जीवन : मेरे हृदय में उनकी एक स्मृति आज भी बहुत गहराई से बसी हुई है। जब भाई जी ओ.आर.सी. से शांतिवन आए, तब उन्होंने अपने जीवन को और भी अधिक सादगी, अनुशासन और तपस्या से भर लिया। वे रात के लगभग 12 से 1 बजे के बीच उठकर बाबा के कमरे में गहन योग में बैठते थे। मैं उसी कमरे में सोता था। जब मेरी नींद खुलती और मैं उनका बिस्तर खाली देखता, तो समझ जाता कि वे कहाँ गए होंगे। मैं चुपचाप बाबा के कमरे की ओर चला जाता। वहाँ वे बिल्कुल शांत और स्थिर होकर गहरे योग में लीन बैठे होते। मैं उन्हें धीरे से हिलाकर जगाने का प्रयास भी करता, लेकिन वे योग में इतने मग्न होते कि उनका ध्यान नहीं टूटता। तब मैं दरवाजे के पास चुपचाप बैठ जाता और उनके आँखें खोलने की प्रतीक्षा करता। एक दिन मैंने धीरे से कहा, “भाई जी, आप अकेले क्यों जाते हैं? फर्श की टाइलें फिसलन वाली हैं, कहीं आप गिर न जाएँ। मुझे भी अपने साथ ले चलिए, मुझे पीछे मत छोड़िए।” भाई जी प्रेम से मुस्कुराए और बोले, “बच्चा, तुम सो रहे थे। मैं तुम्हारी नींद खराब नहीं करना चाहता था।” यही उनका स्वभाव था—बाहर से शांत और सरल, लेकिन भीतर से बहुत विशाल और प्रेम से भरा हुआ।

जीवंत मुरली : सुबह से रात तक भाई जी पूरी तरह सेवा में समर्पित रहते थे। वे दिन में कई बार मुरली पढ़ते थे। ऐसा लगता था जैसे उनका जीवन स्वयं मुरली का स्वरूप बन गया हो।

एक मुरली से वे चार-पाँच गहरी बातें और नए अर्थ निकाल लेते थे। फिर दिन के अंत तक उन बातों को लिखते और दूसरों के साथ साझा करते। उनका पूरा जीवन तपस्या, अनुशासन और आत्म-संयम का उदाहरण था। वे योगमय पवित्रता और स्वयं को निरंतर बेहतर बनाने के अभ्यास में गहराई से लगे रहते थे। उनका जीवन हमें सिखाता है कि आध्यात्मिकता केवल विचारों तक सीमित नहीं होती; वह हमारे व्यवहार, दिनचर्या, कर्म और जीवन के प्रत्येक कार्य में दिखाई देनी चाहिए।

कृतज्ञता की अर्पण: आज जब वे हमारे बीच साकार रूप में नहीं हैं, तो मन शांत होकर पूछता है—“मैं उन्हें क्या दे सकता हूँ? उनके लिए क्या अर्पित कर सकता हूँ?” वास्तव में, मैं उन्हें जो कुछ दे सकता हूँ, वह है—अपने हृदय की सच्ची श्रद्धा, प्रेम और कृतज्ञता।

ईश्वर से मेरी यही प्रार्थना है कि— उनकी शिक्षाएँ हमारे विवेक को सदैव प्रकाश देती रहें।
उनका प्रेम और विनम्रता हमें सादगी और दिव्यता की याद दिलाते रहें।
उनकी तपस्या और पवित्रता की सुगंध हमारे जीवन का मार्गदर्शन करती रहे।
और उनके बताए मार्ग पर चलते हुए हमारे जीवन का हर कदम सेवा, पवित्रता और श्रेष्ठता की ओर बढ़ता रहे।

भाई जी, आपके द्वारा दिया गया नाम केवल मेरा नाम नहीं था—वह मेरे जीवन की एक नई शुरुआत थी।

RELATED ARTICLES

सबसे लोकप्रिय