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बृजमोहन भाई जी- ज्ञान, तपस्या और प्रेम के प्रकाश-स्तम्भ समान विभूति थे -राजयोगिनी बी. के. जयंती दीदी (अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका,ब्रह्माकुमारीज़)

आदरणीय राजयोगी बी.के. बृजमोहन भाई साहब अपनी दूरदर्शी बुद्धि, गहन ज्ञान, तथा ईश्वरीय ज्ञान की गूढ़ सच्चाइयों को रमणीकता,सहज और आत्मीयता के साथ साझा करने की अपनी अद्भुत क्षमता के लिए सदैव याद किए जाएंगे।

मुझे आदरणीय राजयोगी बी. के. बृजमोहन भाई साहब से दिल्ली में कई बार मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, अस्पताल में भी और ओ.आर.सी. में भी। प्रत्येक मुलाकात में एक उन्नत-आध्यात्मिक अनुभव होता था। उनकी उपस्थिति गहन तपस्या और दिव्य शक्ति से ओत-प्रोत थी। उन्हें देखते हुए ऐसा अनुभव होता था मानो वे पहले ही अव्यक्त अवस्था में प्रवेश कर चुके हों।
उनकी दृष्टि -मौनऔर शक्ति से परिपूर्ण थी। उनके माध्यम से बाबा की जीवंत उपस्थिति का अनुभव होता था। उन क्षणों में ऐसा लगता था मानो वे सभी शेष कर्मों के हिसाब-किताब को पूर्ण शान्ति के साथ चुका रहे हों—बिना किसी दुःख या चिंता के, केवल योग के खजाने को संचित करते हुए। उनके चेहरे पर सदैव एक कोमल, सुकून देने वाली मुस्कान रहती थी।

मौन शक्ति और योग की जागरूकता:
ड्रामा अनुसार उनकी शारीरिक यात्रा के अंतिम दृश्य भी कल्याणकारी थे। ऐसा प्रतीत होता था कि उनकी आंतरिक इच्छा पूरी हो गई, मौन और गहन तपस्या के लिए एक मौका मिला है । इससे भी पहले, जब वे अमृतवेला मेडिटेशन कराते थे, वे पल शक्तिशाली आध्यात्मिक एकाग्रता के स्वर्णिम क्षण हुआ करते थे। उनका आभा निरंतर स्मृतिलब्धा —“एक बाबा, दूसरा न कोई”—को प्रतिबिंबित करता था। उनकी अत्यंत गहरी दृष्टि बाबा का प्रकाश और प्रेम की उपस्थिति को व्यक्त करती थी।

रमणीकता और गरिमा से भरपूर ज्ञान:
बृजमोहन भाई साहब को उनकी असंख्य दिव्य विशेषताओं के लिए याद किया जाएगा—उनकी दूरदर्शी बुद्धि, गहन ईश्वरीय ज्ञान की गूढ़ सच्चाइयों को हसते हसते, सहज भाव और आत्मीयता के साथ साझा करने की उनकी दुर्लभ क्षमता थी । उनका अनोखा वरदान था कि वे हर व्यक्ति को मुस्कुराने पर विवश कर देते थे। उनके सहज हास्य के पीछे ऐसी गहरी अनुभूतियाँ थीं, जो प्रत्येक आत्मा को स्पर्श करती थीं और उन्हें बाबा के करीब ले आती थीं। उनके महावाक्य प्रेम और गहराई से परिपूर्ण थें तथा ज्ञान की ऐसी अविस्मरणीय मधुर बोल थे, जो सुनने वाले प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में गूंजती रहती थीं।

सीमाओं से परे सेवा:
उनकी वैश्विक सेवाएँ प्रेरणादायक और पूर्ण समर्पण से भरी हुई थीं। मुझे लगभग दो वर्ष पहले का वह समय स्पष्ट रूप से याद है, जब ग्लोबल रिट्रीट सेंटर, ऑक्सफोर्ड का नवीनीकरण के बाद पुनः उद्घाटन हुआ था। उनका स्वास्थ्य ठीक न होने के बावजूद उन्होंने वहाँ आने के निमंत्रण को अत्यंत विनम्रतापूर्वक स्वीकार किया।
लगभग नब्बे वर्ष की आयु में विदेश यात्रा करना आसान नहीं था—फिर भी वे महान प्रेम और विनम्रता के साथ आए। चाहे कितने भी कार्यक्रम आयोजित किए गए हों, वे प्रसन्नचित्त, शांत और पूर्णतः एकाग्र बने रहे। विदेश में भी उनकी… अमृतवेले योग के समय बाबा की गहन तपस्या और अटूट स्मृति को प्रतिबिंबित करते थे।

दिव्य बुद्धि का वरदान:
भाई साहब को ऐसी दिव्य बुद्धि का वरदान प्राप्त था, जिसने उन्हें परिस्थितियों को गहराई से समझने और ऐसे संतुलित एवं सामंजस्यपूर्ण निर्णय लेने में सक्षम थे, जिन्हें सभी सहजता से स्वीकार करते थे। उनके निर्णय कभी किसी पर थोपे हुए नहीं होते थे—वे स्पष्टता और सत्य से उत्पन्न होते थे तथा स्वाभाविक रूप से हर हृदय को जीत लेते थे। उनकी उपस्थिति जहाँ भी वे सेवा करते, वहाँ एकता और शान्ति लेकर आती थी।
जब उनका शरीर धीरे-धीरे शांत होता जा रहा था, तब भी उनका मन बाबा की स्मृति में लीन रहा और सभी के लिए शान्ति तथा शक्ति के प्रकम्पन फैला रहे थे । निःसंदेह, बाबा ने ऐसे महान आत्मा को सूक्ष्म वतन में एक विशेष कार्य सौंपा है, ताकि वे विश्व परिवर्तन की अपनी सेवा को आगे भी जारी रखें।

मानवता के लिए अनन्त सेवा:
दिल्ली में उनके आध्यात्मिक प्रभाव ने अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों—जिनमें राजनीतिक नेता, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी शामिल थे जिनको ज्ञान योग से मोहित किया। उन्होंने सत्ता के पदों पर बैठे लोगों तक दिव्य ज्ञान पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा आंतरिक परिवर्तन और नैतिक जागृति के लिए प्रेरित किया।
अब बाबा उनके माध्यम से और भी सूक्ष्म रूप से कार्य करते हुए विश्व सेवा के कार्य को तीव्र गति प्रदान कर रहे हैं। उनकी गहरी इच्छा—बाबा का संदेश विश्वभर में पहुँचाना और ब्राह्मण आत्माओं को कर्मातीत अवस्था प्राप्त करने में सहायता करना—निश्चित रूप से उनकी सूक्ष्म सेवा के माध्यम से साकार होगी।

हृदय की श्रद्धांजलि:
हमारी शुद्ध भावनाएँ और शुभकामनाएँ सदैव ऐसे महान आत्मा के साथ रहेंगी—जो केवल मधुबन से ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के ब्राह्मण परिवार की ओर से भी उनके साथ प्रवाहित होती रहेंगी। उनका मार्गदर्शन, विनम्रता और अथक सेवा प्रत्येक हृदय पर अमिट छाप छोड़ गए हैं।
आज हम कृतज्ञता, प्रेम और स्मृति से भरी अपनी हृदयस्पर्शी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। हम जानते हैं कि भाई साहब शिव बाबा के साथ मानवता की सेवा करते रहेंगे, तथा प्रकाश, प्रेम और उच्च आध्यात्मिक शक्ति के प्रकम्पन फैलाते रहेंगे।

-राजयोगिनी बी. के. जयंती दीदी

(अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका,ब्रह्माकुमारीज़ )

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